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अद्रिजा रॉय का खुलासा: 'अनुपमा' की राही ने ठुकराए कई प्रोजेक्ट्स, बोलीं — 'जुड़ाव नहीं तो किरदार नहीं'

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अद्रिजा रॉय का खुलासा: 'अनुपमा' की राही ने ठुकराए कई प्रोजेक्ट्स, बोलीं — 'जुड़ाव नहीं तो किरदार नहीं'

सारांश

'अनुपमा' की राही बनकर घर-घर पहचानी जाने वाली अद्रिजा रॉय ने खुलासा किया कि उन्होंने कई प्रोजेक्ट्स सिर्फ इसलिए ठुकराए क्योंकि वह उन किरदारों से जुड़ नहीं पाईं। उनका फलसफा साफ है — इंतज़ार मंज़ूर, लेकिन बिना जुड़ाव के कोई भूमिका नहीं।

मुख्य बातें

अद्रिजा रॉय ने स्वीकार किया कि उन्होंने करियर में कई प्रोजेक्ट्स को किरदार से जुड़ाव न होने के कारण ठुकराया।
उनका मानना है कि जिस भूमिका पर विश्वास न हो , उसके साथ न्याय करना संभव नहीं।
टाइपकास्टिंग को स्वाभाविक बताते हुए कहा — 'हर नया रोल कुछ नया सीखने का मौका होना चाहिए।' प्रोजेक्ट चुनते समय कहानी, टीम और किरदार का योगदान — तीनों को परखती हैं।
टीवी में महिला केंद्रित कहानियों की बढ़ती स्वीकार्यता को इंडस्ट्री के लिए सकारात्मक संकेत बताया।

अद्रिजा रॉय, जिन्होंने स्टार प्लस के चर्चित धारावाहिक 'अनुपमा' में राही कपाड़िया की भूमिका से दर्शकों के दिलों में जगह बनाई है, ने हाल ही में एक विशेष बातचीत में अपने करियर के फैसलों, टीवी इंडस्ट्री में आए बदलावों और उन प्रोजेक्ट्स पर खुलकर बात की जिन्हें उन्होंने ठुकरा दिया। अभिनेत्री ने स्पष्ट किया कि वह केवल उन्हीं किरदारों को स्वीकार करती हैं जिनसे उन्हें भीतर से जुड़ाव महसूस होता है।

किरदार से जुड़ाव — अद्रिजा की पहली शर्त

अद्रिजा रॉय ने बताया कि उन्होंने अपने करियर में कई ऐसे प्रोजेक्ट्स को मना किया है जो पेशेवर दृष्टि से बुरे नहीं थे, लेकिन जिनसे वह खुद को जोड़ नहीं पाईं। उनके अनुसार, 'हाँ, मैंने कुछ प्रोजेक्ट्स के लिए मना किया है। ऐसा इसलिए नहीं था कि वे खराब थे, बल्कि इसलिए क्योंकि मैं उन किरदारों से जुड़ाव महसूस नहीं कर पाई। अगर मैं किसी भूमिका पर विश्वास नहीं करती हूँ, तो मेरे लिए उसके साथ न्याय करना मुश्किल हो जाता है। मैं इंतज़ार करना पसंद करूँगी, लेकिन ऐसा काम करना चाहती हूँ जो मुझे अंदर से उत्साहित करे।'

यह रुख उनकी उस सोच को दर्शाता है जो व्यावसायिक सफलता से पहले कलात्मक ईमानदारी को रखती है — एक ऐसा दृष्टिकोण जो हिंदी टेलीविज़न की तेज़-रफ़्तार दुनिया में दुर्लभ माना जाता है।

टाइपकास्टिंग का डर और बदलाव की चाहत

जब उनसे पूछा गया कि किसी एक किरदार की सफलता के बाद कलाकार के एक जैसी भूमिकाओं में बंध जाने का खतरा कितना वास्तविक है, तो अद्रिजा ने इसे स्वाभाविक बताया — लेकिन इससे खुद को अलग रखने की भी बात कही।

उन्होंने कहा, 'जब कोई भूमिका लोकप्रिय हो जाती है तो लोग आपको उसी अंदाज़ में देखने लगते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि आपने उस किरदार को अच्छी तरह निभाया है। मैं इसके लिए किसी को दोष नहीं देती। लेकिन एक कलाकार के तौर पर मैं हमेशा खुद को और दर्शकों को सरप्राइज़ करना चाहती हूँ। मेरे लिए हर नया रोल कुछ नया सीखने का मौका होना चाहिए।'

गौरतलब है कि टाइपकास्टिंग हिंदी टेलीविज़न की एक पुरानी चुनौती रही है, जहाँ लंबे समय तक एक ही शो में काम करने वाले कलाकारों को उस किरदार से बाहर निकलने में संघर्ष करना पड़ता है।

प्रोजेक्ट चुनने का तरीका

अद्रिजा ने यह भी साझा किया कि वह किसी भी प्रोजेक्ट को स्वीकार करने से पहले पूरी तस्वीर देखती हैं। उनके अनुसार, 'कहानी क्या है, टीम कैसी है और किरदार शो में क्या योगदान दे रहा है — इन सभी चीज़ों को समझना ज़रूरी होता है। हर स्थिति में कोई एक सही या गलत जवाब नहीं होता। हर कलाकार को अपने हिसाब से फैसला लेना पड़ता है।'

यह ऐसे समय में आया है जब ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के विस्तार के बाद टेलीविज़न कलाकारों के सामने विकल्पों की कोई कमी नहीं है, लेकिन सही विकल्प चुनने का दबाव भी उतना ही बढ़ा है।

महिला किरदारों में बदलाव — सकारात्मक संकेत

अद्रिजा ने टीवी इंडस्ट्री में महिला किरदारों के बदलते स्वरूप पर भी अपनी राय रखी। उनका मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं के लिए लिखे जाने वाले किरदारों में उल्लेखनीय सुधार आया है।

उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि चीज़ें पहले से काफी बेहतर हुई हैं। अब महिलाओं को ज़्यादा अहमियत रखने वाले किरदार मिल रहे हैं। हालाँकि अभी भी सुधार की गुंजाइश है, लेकिन अच्छी बात यह है कि दर्शक अब महिलाओं के नेतृत्व वाली कहानियों को स्वीकार कर रहे हैं। यह इंडस्ट्री के लिए एक सकारात्मक संकेत है।'

आगे देखें तो अद्रिजा रॉय की यह सोच और उनका चयनात्मक रवैया संकेत देता है कि वह अपने करियर को दीर्घकालिक नज़रिए से आकार देना चाहती हैं — और दर्शक उनके अगले किरदार का बेसब्री से इंतज़ार करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब 'इंतज़ार करना पसंद करूँगी' जैसा बयान साहसिक भी है और जोखिम भरा भी — असली परीक्षा यह होगी कि उनका अगला चुना हुआ किरदार इस दर्शन को कितना सार्थक करता है।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अद्रिजा रॉय ने कौन से प्रोजेक्ट्स क्यों ठुकराए?
अद्रिजा रॉय ने ऐसे प्रोजेक्ट्स को मना किया जिनसे वह खुद को भीतर से नहीं जोड़ पाईं — न कि इसलिए कि वे खराब थे। उनका कहना है कि जिस किरदार पर विश्वास न हो, उसके साथ न्याय करना मुश्किल होता है।
अद्रिजा रॉय 'अनुपमा' में कौन सा किरदार निभाती हैं?
अद्रिजा रॉय स्टार प्लस के धारावाहिक 'अनुपमा' में राही कपाड़िया की भूमिका निभाती हैं, जिसने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई है।
क्या अद्रिजा रॉय टाइपकास्टिंग से डरती हैं?
अद्रिजा ने माना कि किसी किरदार की सफलता के बाद दर्शक कलाकार को उसी साँचे में देखने लगते हैं, जो स्वाभाविक है। हालाँकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वह हर नई भूमिका में खुद को और दर्शकों को सरप्राइज़ करना चाहती हैं।
अद्रिजा रॉय प्रोजेक्ट चुनते समय किन बातों का ध्यान रखती हैं?
वह कहानी, टीम और किरदार के शो में योगदान — इन तीनों पहलुओं को परखती हैं। उनके अनुसार हर स्थिति अलग होती है और हर कलाकार को अपने हिसाब से फैसला लेना पड़ता है।
हिंदी टीवी में महिला किरदारों को लेकर अद्रिजा की क्या राय है?
अद्रिजा का मानना है कि पहले की तुलना में अब महिलाओं को अधिक सशक्त और अहमियत रखने वाले किरदार मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि दर्शकों द्वारा महिला केंद्रित कहानियों की बढ़ती स्वीकार्यता इंडस्ट्री के लिए सकारात्मक संकेत है, हालाँकि सुधार की अभी भी गुंजाइश है।
राष्ट्र प्रेस
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