अद्रिजा रॉय का मानसिक स्वास्थ्य पर संदेश: 'हर कमेंट दिल पर न लें, खुद को आप सबसे बेहतर जानते हैं'
सारांश
मुख्य बातें
टीवी सीरियल 'अनुपमा' में राही की भूमिका निभा रहीं अभिनेत्री अद्रिजा रॉय ने वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे से पूर्व मानसिक स्वास्थ्य के विषय पर बेबाकी से अपने विचार साझा किए हैं। 7 अक्टूबर 2026 को मुंबई में दिए एक विशेष इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवन की तेज़ रफ़्तार में मानसिक शांति सबसे पहले प्रभावित होती है, और इसीलिए भावनाओं को पहचानना, ज़रूरत पड़ने पर विराम लेना और अपनी आंतरिक शांति को प्राथमिकता देना आज के समय की सबसे बड़ी ज़रूरत है।
भावनाओं को स्वीकार करने का साहस
अद्रिजा रॉय ने कहा, 'लोग अक्सर अपनी परेशानियों को छिपाकर सबके सामने सामान्य दिखने की कोशिश करते हैं। उन्हें लगता है कि अगर उन्होंने स्वीकार कर लिया कि वह किसी मुश्किल दौर से गुज़र रहे हैं, तो लोग उन्हें जज करेंगे या गलत समझेंगे।' उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इस सोच से बाहर निकलकर अपनी भावनाओं को स्वीकार करना ही बेहतर महसूस करने की पहली सीढ़ी है।
गौरतलब है कि वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे हर वर्ष 10 अक्टूबर को मनाया जाता है, और इस अवसर पर सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों का मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बोलना समाज में जागरूकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है।
बाहरी कमेंट्स और आत्म-पहचान
पब्लिक लाइफ में मिलने वाली आलोचना और टिप्पणियों पर अद्रिजा ने कहा, 'हर बात को दिल पर लेना सही नहीं है। हर व्यक्ति की आपके बारे में अपनी राय हो सकती है, लेकिन खुद को आपसे बेहतर कोई नहीं जानता।' उन्होंने बताया कि वे हमेशा अपना ध्यान उन्हीं लोगों और चीज़ों पर केंद्रित रखती हैं जो वास्तव में उनके लिए मायने रखते हैं, और बाहरी राय को अपनी मानसिक शांति पर हावी नहीं होने देतीं।
यह ऐसे समय में आया है जब सोशल मीडिया और ऑनलाइन ट्रोलिंग के कारण मनोरंजन जगत के पेशेवरों में मानसिक दबाव तेज़ी से बढ़ रहा है। कई अध्ययनों में सामने आया है कि सार्वजनिक जीवन में सक्रिय लोग नकारात्मक टिप्पणियों के कारण चिंता और अवसाद के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
थकान और ब्रेक की ज़रूरत
अद्रिजा ने कहा, 'जब इंसान शारीरिक और मानसिक रूप से इतना थक जाए कि हर काम बोझ जैसा लगने लगे, तब रुककर खुद को समय देना ज़रूरी है। कुछ समय के लिए ब्रेक लेना आलस नहीं है।' उनका मानना है कि लगातार काम करते रहने को मज़बूती समझना भ्रामक है — शरीर और दिमाग दोनों को आराम उतना ही ज़रूरी है जितना मेहनत।
उन्होंने यह भी जोड़ा, 'कई बार खुद को थोड़ा धीमा करना इसलिए ज़रूरी होता है ताकि इंसान दोबारा पूरी ताकत के साथ वापस आ सके।'
सीमाएं तय करना और 'नहीं' कहने की हिम्मत
दूसरों की अपेक्षाओं के बोझ पर बात करते हुए अद्रिजा ने कहा, 'दूसरों की उम्मीदों का बोझ इस कीमत पर मत उठाओ कि वह आपकी मानसिक शांति पर ही असर डाल दें। मैंने धीरे-धीरे अपनी सीमाएं तय करना और ज़रूरत पड़ने पर नहीं कहना सीखा है।' उन्होंने स्वीकार किया कि शुरुआत में यह आसान नहीं था, लेकिन समय के साथ उन्हें समझ आया कि अपनी शांति को बचाना स्वार्थी होना नहीं है।
सोशल मीडिया की तुलना से बचें
सोशल मीडिया के दौर में अपनी तुलना दूसरों से करने की प्रवृत्ति पर अद्रिजा ने कहा, 'सोशल मीडिया पर लोग अक्सर अपनी ज़िंदगी का सिर्फ वही हिस्सा दिखाते हैं जिसे वे दूसरों के सामने रखना चाहते हैं। ऐसे में किसी और की परफेक्ट दिखने वाली ज़िंदगी से अपनी तुलना करना सही नहीं है।' उनका संदेश था कि असल ज़िंदगी में अपने करीबियों और खुद से जुड़े रहना कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण है।
अद्रिजा ने यह भी कहा कि जीवन का हर कठिन दौर गुज़र जाता है और वक़्त के साथ चीज़ें बदलती हैं — ऐसे समय में खुद पर भरोसा रखना और अपने आप को समय देना ही सबसे बड़ी ताकत है। आने वाले वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे पर उनका यह संदेश न केवल उनके प्रशंसकों के लिए, बल्कि हर उस इंसान के लिए प्रासंगिक है जो मानसिक दबाव से जूझ रहा है।