राज ठाकरे का BJP पर तीखा वार: गोकुल डेयरी विवाद में 'लोकतंत्र बचाओ' मार्च को बताया पाखंड
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे ने 6 नवंबर 2026 को भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि सत्ता में रहते हुए 'लोकतंत्र बचाओ' मार्च निकालना विरोधाभास की पराकाष्ठा है। उन्होंने गोकुल डेयरी बोर्ड चुनावों में राज्य सरकार के हस्तक्षेप का हवाला देते हुए BJP पर 'लोकतांत्रिक जनादेश को दरकिनार करने' का आरोप लगाया। ठाकरे के अनुसार, यह कदम उस पार्टी के असली चरित्र को उजागर करता है जो एक ओर संविधान की दुहाई देती है और दूसरी ओर चुनावी नतीजे पलटने की कोशिश करती है।
मुख्य आरोप और बयान
ठाकरे ने कहा, 'भारतीय जनता पार्टी सचमुच एक अजीब पार्टी है। सत्ता में पूरी तरह से काबिज होने के बावजूद 'लोकतंत्र बचाने' के लिए मार्च निकाल रही है। शायद दुनिया में यह इकलौता ऐसा उदाहरण होगा, जहाँ सत्ताधारी पार्टी ही विपक्ष के खिलाफ मार्च निकाल रही है।' उन्होंने BJP की इस भूमिका की तुलना 'मुर्गियों को बचाने के लिए अभियान चलाने वाले KFC के मशहूर लोगो' से की — एक ऐसी विडंबना जो उनके भाषण का सबसे चर्चित हिस्सा बनी।
गोकुल डेयरी विवाद: क्या हुआ
कोल्हापुर जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ (गोकुल डेयरी) के बोर्ड चुनावों में कांग्रेस नेता सत्यजीत पाटिल के नेतृत्व वाले विपक्षी पैनल ने 25 में से 13 सीटें जीतीं, जबकि BJP समर्थित पैनल को 12 सीटें मिलीं। चुनावी हार के बाद महाराष्ट्र सरकार ने वोटिंग अधिकारों सहित 5 सरकारी निदेशक नामित कर दिए। आलोचकों का कहना है कि इस कदम का मकसद बहुमत को पलटना था।
ठाकरे ने सरकार पर सीधा सवाल दागा: 'अगर सच में आपके अंदर लोकतंत्र की जड़ों को बचाने की इतनी तीव्र इच्छा है, तो गोकुल डेयरी के मामले में, जहाँ भाजपा पैनल के 12 सदस्यों के मुकाबले सत्यजीत पाटिल के पैनल के 13 सदस्य चुने गए, आपने तुरंत सरकार की ओर से 5 निदेशक क्यों नियुक्त किए और उन्हें वोटिंग अधिकार क्यों दे दिए?'
BJP की 'विरोध संस्कृति' पर कटाक्ष
ठाकरे ने आरोप लगाया कि BJP प्रशासनिक विफलताओं से ध्यान भटकाने के लिए नियमित रूप से विरोध प्रदर्शनों का सहारा लेती है। उनके अनुसार, 'जब भाजपा के कार्यकाल में सुरक्षा में लापरवाही होती है, तो वह देश को आतंकवाद से बचाने के लिए मार्च निकालती है; जब वह खुद आर्थिक विकास को अस्थिर कर देती है, तो अर्थव्यवस्था बचाने के लिए मार्च निकालने लगती है।' यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में पानी के गंभीर संकट की भी चर्चा है।
सियासी संदर्भ और आगे की राह
गौरतलब है कि MNS और BJP के बीच संबंध पहले से ही जटिल रहे हैं। ठाकरे का यह हमला ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति में सहकारी संस्थाओं पर नियंत्रण को लेकर तनाव बढ़ रहा है। ठाकरे ने BJP को सलाह दी कि वह चुनावी हार को शालीनता से स्वीकार करे और कहा, 'जिस तरीके से उन्होंने बहुमत हासिल किया था, उसे सभी विपक्षी दलों ने 12 साल तक झेला है। अगर अब देश की जनता विपक्षी दलों की ओर झुक रही है, तो भाजपा को भी इसे बर्दाश्त करना सीखना चाहिए।' यह विवाद आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की सहकारी राजनीति में और नए मोड़ ला सकता है।