5 नवंबर 2026
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गोकुल डेयरी विवाद: कांग्रेस एमएलसी सतेज पाटिल का महायुति पर हमला, 9 नवंबर को कोल्हापुर में विरोध मार्च

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गोकुल डेयरी विवाद: कांग्रेस एमएलसी सतेज पाटिल का महायुति पर हमला, 9 नवंबर को कोल्हापुर में विरोध मार्च

सारांश

गोकुल डेयरी बोर्ड में राज्य द्वारा नामित चार निदेशकों को वोट देने का अधिकार देने के महायुति सरकार के फैसले ने महाराष्ट्र में सियासी भूचाल ला दिया है। कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव हारने के बाद नियम बदले जा रहे हैं और दुग्ध उत्पादकों का जनादेश चुराया जा रहा है। विरोध मार्च और सुप्रीम कोर्ट — दोनों मोर्चों पर लड़ाई तेज होने वाली है।

मुख्य बातें

कांग्रेस एमएलसी सतेज पाटिल ने 5 नवंबर 2026 को महायुति सरकार के उस फैसले की निंदा की जिसमें गोकुल मिल्क यूनियन बोर्ड में 4 नामित निदेशकों को मतदान का अधिकार देने का प्रस्ताव है।
19 अक्टूबर के चुनाव में कांग्रेस नेतृत्व वाले पैनल ने 25 में से 13 सीटें जीती थीं; महायुति को 12 सीटें मिली थीं।
नए नामितों के जुड़ने से महायुति की संख्या 12 से 16 हो जाएगी, जो बहुमत के लिए जरूरी 14 से अधिक है।
प्रस्ताव की फाइल राज्यपाल के पास भेजी गई; गजट अधिसूचना शीघ्र जारी होने की उम्मीद।
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने की घोषणा की।
पाटिल ने 9 नवंबर को दशहरा चौक से कोल्हापुर जिला कलेक्ट्रेट तक विरोध मार्च की घोषणा की।

कांग्रेस एमएलसी सतेज पाटिल ने 5 नवंबर 2026 को मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान महाराष्ट्र की महायुति सरकार पर तीखा हमला बोला। यह विवाद गोकुल मिल्क यूनियन के बोर्ड में राज्य द्वारा नामित चार गैर-सरकारी निदेशकों को मतदान का अधिकार देने के कैबिनेट के फैसले से उपजा है। पाटिल ने 9 नवंबर को दशहरा चौक से कोल्हापुर जिला कलेक्ट्रेट तक बड़े विरोध मार्च की घोषणा की है।

चुनावी समीकरण और विवाद की जड़

गोकुल के बोर्ड की कुल 25 सीटों में से 13 सीटें सतेज पाटिल के नेतृत्व वाले 'समविचारी अघाड़ी' के पास हैं, जबकि महायुति के पास 12 सीटें हैं। अध्यक्ष के चुनाव के लिए 14 निदेशकों का कोरम आवश्यक है, जो अकेले किसी भी पक्ष के पास नहीं है। यह चुनाव 19 अक्टूबर को हुए थे, जिनमें कांग्रेस नेतृत्व वाले पैनल ने बहुमत हासिल किया था।

महायुति समर्थित निदेशकों के अनुपस्थित रहने के कारण अध्यक्ष का चुनाव अटक गया, जिसके बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने 10 नवंबर को पुनः चुनाव कराने का निर्देश दिया। इसी बीच राज्य कैबिनेट ने वोटिंग अधिकार सहित चार सरकारी निदेशकों को नामित करने का प्रस्ताव मंजूर किया, जिससे महायुति की संख्या 12 से 16 हो जाएगी।

सतेज पाटिल के आरोप

पाटिल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सरकार पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव के नतीजे पक्ष में न आने पर कानून बदला जा रहा है। उन्होंने कहा, 'अगर कानून में बदलाव करना ही था तो चुनाव से पहले किया जाना चाहिए था।' पाटिल ने यह भी आरोप लगाया कि जिन लोगों को 'विशेषज्ञ' निदेशक बताया जा रहा है, उन्हें मतदाता पहले ही नकार चुके हैं।

पाटिल ने इस कदम को गोकुल को अमूल को सौंपने की 'सोची-समझी साजिश' बताया। उन्होंने अमूल में हुई इसी प्रकार की नियुक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि हाई कोर्ट ने उस फैसले को खारिज कर दिया था। उन्होंने मंत्री हसन मुश्रीफ पर भी 'पिछले दरवाजे' से आने का आरोप लगाया।

राहुल गांधी और कांग्रेस की प्रतिक्रिया

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि गोकुल और दुग्ध उत्पादकों ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) को हरा दिया, इसलिए BJP ने चुनाव के बाद नियम बदल दिए। उन्होंने इसे 'दुग्ध उत्पादकों के वोटों की चोरी' और 'जनादेश में मिलावट' बताया।

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने घोषणा की कि पार्टी इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देगी। खेड़ा ने कहा कि वे 'लोकतांत्रिक जनादेश और सहकारी संस्थाओं की स्वायत्तता की रक्षा' के लिए यह कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।

प्रस्ताव की स्थिति और आगे की प्रक्रिया

इस प्रस्ताव की फाइल हस्ताक्षर के लिए राज्यपाल के पास भेज दी गई है और जल्द ही गजट नोटिफिकेशन जारी होने की उम्मीद है। गजट अधिसूचना जारी होते ही नामित निदेशकों को वोट देने का अधिकार मिल जाएगा, जिससे महायुति बोर्ड पर बहुमत हासिल कर लेगी।

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब महाराष्ट्र में सहकारी संस्थाओं पर राजनीतिक नियंत्रण को लेकर लंबे समय से तनाव बना हुआ है। गौरतलब है कि सहकारी डेयरी क्षेत्र पर पकड़ महाराष्ट्र की राजनीति में हमेशा से अहम रही है, और यह टकराव उसी व्यापक संघर्ष का हिस्सा है। आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट और सड़क दोनों मोर्चों पर यह लड़ाई तेज होने के आसार हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि असल दांव यह है कि अगर यह मिसाल कायम हो गई तो नगर निगमों से लेकर अन्य सहकारी संस्थाओं तक हर जगह इसी फार्मूले का इस्तेमाल हो सकता है। सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई ही तय करेगी कि जनादेश और नामांकन के बीच की यह रेखा कहाँ खिंचती है।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोकुल डेयरी चुनाव विवाद क्या है?
गोकुल मिल्क यूनियन के 25 सदस्यीय बोर्ड के लिए 19 अक्टूबर 2026 को चुनाव हुए, जिनमें कांग्रेस नेतृत्व वाले पैनल ने 13 और महायुति ने 12 सीटें जीतीं। अध्यक्ष चुनाव के लिए 14 का कोरम चाहिए, जो किसी के पास नहीं था। महायुति सरकार ने अब 4 नामित निदेशकों को वोटिंग अधिकार देने का प्रस्ताव पारित किया, जिसे विपक्ष 'जनादेश की चोरी' बता रहा है।
सतेज पाटिल कौन हैं और वे किस बात का विरोध कर रहे हैं?
सतेज पाटिल महाराष्ट्र विधान परिषद में कांग्रेस के एमएलसी हैं और 'समविचारी अघाड़ी' का नेतृत्व करते हैं। वे महायुति सरकार के उस कदम का विरोध कर रहे हैं जिसके तहत राज्य द्वारा नामित 4 निदेशकों को गोकुल बोर्ड में मतदान का अधिकार दिया जाएगा, जिससे महायुति बहुमत में आ जाएगी।
9 नवंबर का विरोध मार्च क्यों और कहाँ होगा?
कांग्रेस एमएलसी सतेज पाटिल ने 9 नवंबर 2026 को कोल्हापुर के दशहरा चौक से जिला कलेक्ट्रेट तक विरोध मार्च की घोषणा की है। यह मार्च महायुति सरकार के गोकुल बोर्ड में नामित निदेशकों को वोटिंग अधिकार देने के फैसले के खिलाफ होगा।
क्या इस फैसले को कानूनी चुनौती दी जाएगी?
हाँ, कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने की घोषणा की है। गौरतलब है कि बॉम्बे हाई कोर्ट पहले अमूल में इसी प्रकार की नियुक्तियों को खारिज कर चुका है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने गोकुल के अध्यक्ष चुनाव के लिए 10 नवंबर की तारीख भी निर्धारित की है।
राहुल गांधी ने गोकुल विवाद पर क्या कहा?
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि दुग्ध उत्पादकों ने BJP को हराया, इसलिए BJP ने चुनाव के बाद नियम बदल दिए — 4 नए निदेशक ला कर 12 को 16 बना दिया और बहुमत 'चुरा लिया'। उन्होंने इसे 'दुग्ध उत्पादकों के वोटों की चोरी' और 'जनादेश में मिलावट' करार दिया।
राष्ट्र प्रेस
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