नीट विरोध से पहले कर्नाटक युवा कांग्रेस में फूट, KPCC कार्यालय में गुटों के बीच हाथापाई
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक युवा कांग्रेस में आंतरिक गुटबाजी 18 मई 2025 को उस समय खुलकर सामने आ गई, जब बेंगलुरु स्थित कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) कार्यालय में आयोजित एक तैयारी बैठक के दौरान प्रतिद्वंद्वी गुटों के कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस, धक्का-मुक्की और हाथापाई हो गई। यह बैठक 21 मई को प्रस्तावित नीट विरोध प्रदर्शन की रणनीति तय करने के लिए बुलाई गई थी।
झड़प की वजह क्या रही
पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह टकराव राष्ट्रीय युवा कांग्रेस नेतृत्व द्वारा दीपिका रेड्डी को युवा कांग्रेस उपाध्यक्ष पद से हटाए जाने के हालिया फैसले के बाद उपजे असंतोष से जुड़ा है। जब बैठक शुरू हुई, तो दीपिका रेड्डी के समर्थकों ने कथित तौर पर उनके पद से हटाए जाने की निंदा करते हुए नारे लगाने शुरू कर दिए।
कर्नाटक युवा कांग्रेस अध्यक्ष एचएस मंजुनाथ गौड़ा के समर्थकों ने इसका विरोध किया और कथित तौर पर बैठक में बाधा न डालने की चेतावनी दी। इसके बाद मौखिक बहस तेज़ी से शारीरिक टकराव में बदल गई।
गुटबाजी की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि मंजुनाथ गौड़ा उपमुख्यमंत्री एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार के करीबी माने जाते हैं। इस घटना में कथित तौर पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री शिवकुमार के समर्थक आमने-सामने थे — जो कर्नाटक कांग्रेस में लंबे समय से चली आ रही शीर्ष नेतृत्व की अंदरूनी प्रतिस्पर्धा का प्रतिबिंब है।
यह ऐसे समय में आया है जब पार्टी राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में कथित अनियमितताओं के खिलाफ एकजुट विरोध की तैयारी में थी — एक ऐसा मुद्दा जिस पर कांग्रेस केंद्र सरकार को घेरना चाहती है।
वरिष्ठ नेताओं का हस्तक्षेप
स्थिति के नियंत्रण से बाहर होने पर KPCC के वरिष्ठ नेताओं ने बीच-बचाव किया और दोनों गुटों को शांत कराया। इसके बाद बैठक आगे बढ़ी, हालाँकि घटना ने पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए।
नीट विरोध पर असर
21 मई को प्रस्तावित नीट विरोध प्रदर्शन कर्नाटक युवा कांग्रेस के लिए एक बड़ा राजनीतिक अवसर माना जा रहा था। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की आंतरिक झड़पें विपक्षी एजेंडे को कमज़ोर करती हैं और सत्ताधारी दल को राजनीतिक लाभ देती हैं। पार्टी नेतृत्व अब दोनों गुटों के बीच समन्वय बनाए रखने की चुनौती का सामना कर रहा है।