दीपावली पर डायबिटीज मरीज भी खाएं मिठाई — डॉक्टरों की 6 ज़रूरी सलाह
सारांश
मुख्य बातें
दीपावली के त्योहार पर डायबिटीज के मरीजों के लिए मिठाई का आनंद लेना असंभव नहीं, बस इसके लिए सही चुनाव और सावधानी ज़रूरी है। नई दिल्ली में स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, ब्लड शुगर को नियंत्रित रखते हुए भी त्योहार का स्वाद लिया जा सकता है — बशर्ते मिठाई की मात्रा, सामग्री और खाने का तरीका सोच-समझकर तय किया जाए। डायबिटीज होने का यह मतलब कतई नहीं कि मीठे से पूरी तरह दूरी बना ली जाए।
कौन-सी मिठाइयाँ हो सकती हैं बेहतर विकल्प
विशेषज्ञों का सुझाव है कि डायबिटीज के मरीज बादाम, अखरोट और पिस्ता से बनी मिठाइयाँ चुनें। बादाम कतली, पिस्ता रोल और कम चीनी में तैयार नट्स की मिठाइयाँ पारंपरिक विकल्पों की तुलना में अपेक्षाकृत सुरक्षित मानी जाती हैं। इन मेवों में फाइबर, प्रोटीन और हेल्दी फैट्स पाए जाते हैं, जो पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाते हैं और रक्त शर्करा में अचानक उछाल की संभावना को कम करते हैं।
घर पर बनाएं मिठाई — नियंत्रण रहे आपके हाथ में
डायटिशियन घर पर मिठाई तैयार करने को एक व्यावहारिक विकल्प मानते हैं, क्योंकि इससे चीनी, घी और अन्य सामग्री की मात्रा पर पूरा नियंत्रण रहता है। घर पर बादाम की मिठाई, नारियल के लड्डू या कम मीठा सूजी का हलवा बनाया जा सकता है। चीनी के स्थान पर स्टीविया जैसे प्राकृतिक स्वीटनर का उपयोग किया जा सकता है, हालाँकि इसके लिए पहले डॉक्टर या डायटिशियन की सलाह लेना आवश्यक है।
खाने का तरीका उतना ही ज़रूरी है जितना चुनाव
विशेषज्ञों के अनुसार, खाली पेट मिठाई खाने से बचना चाहिए। संतुलित भोजन के साथ थोड़ी मात्रा में मीठा लेना अधिक सुरक्षित रहता है। खाने की थाली में दाल, हरी सब्जियाँ, सलाद और प्रोटीन युक्त चीजें शामिल करें ताकि पोषक तत्वों का संतुलन बना रहे। एक बार में मिठाई का छोटा हिस्सा लें और दिनभर में दोबारा मीठा खाने की मात्रा सीमित रखें।
'शुगर फ्री' लेबल से न हो भ्रम
बाज़ार में उपलब्ध शुगर फ्री मिठाइयों को लेकर सतर्क रहना ज़रूरी है। इनमें चीनी की जगह दूसरे स्वीटनर तो होते हैं, लेकिन मैदा, सूजी, खोया और अन्य कार्बोहाइड्रेट युक्त सामग्री भी मौजूद हो सकती है, जो ब्लड शुगर को प्रभावित कर सकती है। इसलिए कोई भी उत्पाद खरीदने से पहले पैकेट पर दी गई पोषण संबंधी जानकारी (न्यूट्रिशन लेबल) को ध्यान से पढ़ना चाहिए।
दवाएं और जाँच — त्योहार में भी न करें नज़रअंदाज़
त्योहार की व्यस्तता में डायबिटीज के मरीज अक्सर दवा लेने का समय, इंसुलिन की खुराक और ब्लड शुगर की नियमित जाँच भूल जाते हैं — यह गंभीर भूल हो सकती है। डॉक्टर द्वारा निर्धारित समय पर दवा और इंसुलिन लेना अनिवार्य है। भोजन के बाद 10 से 15 मिनट की हल्की सैर भी रक्त शर्करा को नियंत्रित रखने में सहायक हो सकती है। यह दीपावली स्वस्थ और आनंददायक तभी होगी जब सेहत के प्रति सचेतता भी उत्सव का हिस्सा बने।