गुवाहाटी होटल गोलीबारी: मुख्य आरोपी घनकांत गोगोई का शव तीन घंटे के पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपा
सारांश
मुख्य बातें
गुवाहाटी होटल गोलीबारी मामले के मुख्य आरोपी घनकांत गोगोई का शव 6 नवंबर 2026 को तीन घंटे से अधिक समय तक चले पोस्टमार्टम के बाद उसके परिजनों को सौंप दिया गया। 34 वर्षीय गोगोई बुधवार तड़के असम के शिवसागर जिले में एक पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था, जिसके बाद शव सुपुर्दगी की प्रक्रिया पर सभी की नज़रें टिकी थीं।
पोस्टमार्टम की प्रक्रिया
पुलिस हिरासत में हुई मौतों के लिए निर्धारित मानक प्रक्रियाओं के तहत यह पोस्टमार्टम तीन अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों के फोरेंसिक विशेषज्ञों की मौजूदगी में कराया गया। असम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (AMCH) के एक अधिकारी ने बताया कि तीनों संस्थानों के विशेषज्ञों की उपस्थिति सुनिश्चित करने में लगे समय के कारण पोस्टमार्टम में देरी हुई। फोरेंसिक मेडिसिन विभाग में यह पूरी प्रक्रिया तीन घंटे से अधिक चली और शव को शाम करीब 7:10 बजे गोगोई के परिवार को सौंपा गया, जिसके बाद परिवार शव लेकर अपने घर के लिए रवाना हो गया।
मुठभेड़ की परिस्थितियाँ
पुलिस के अनुसार, बुधवार तड़के करीब 3:10 बजे गौरीसागर इलाके में यह मुठभेड़ हुई। पुलिस का दावा है कि गोगोई को 2024 में दर्ज एक बैंक धोखाधड़ी मामले के सिलसिले में गुवाहाटी सेंट्रल जेल से शिवसागर ले जाया जा रहा था, तभी उसने कथित तौर पर हिरासत से भागने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस को गोली चलानी पड़ी। गौरतलब है कि इससे महज कुछ घंटे पहले ही मंगलवार को एक स्थानीय अदालत ने उसे होटल गोलीबारी मामले में न्यायिक हिरासत में भेजा था।
होटल गोलीबारी की पृष्ठभूमि
गोगोई को 26 अक्टूबर 2026 को गुवाहाटी के बोरा सर्विस इलाके में जीएस रोड स्थित होटल 'बिलास इन' में हुई गोलीबारी के बाद गिरफ्तार किया गया था। इस वारदात में भारली परिवार के पाँच सदस्यों और एक होटल कर्मचारी की मौत हो गई थी, जबकि परिवार का ड्राइवर घायल हो गया था। पुलिस का आरोप है कि होटल के लीजधारक गोगोई और भारली परिवार के बीच संपत्ति के प्रबंधन और उपयोग को लेकर विवाद था। पुलिस के अनुसार, गोगोई द्वारा संपत्ति का नवीनीकरण कराए जाने के बाद यह विवाद और गहरा हो गया था।
बैठक से हिंसा तक
कथित तौर पर 26 अक्टूबर को विवाद सुलझाने के उद्देश्य से एक बैठक बुलाई गई थी, लेकिन बहस हिंसक हो गई और गोगोई ने गोली चला दी। पीड़ित परिवार ने इस हमले को पहले से सोची-समझी साज़िश करार दिया है और दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की माँग की है। असम पुलिस ने इन हत्याओं की जाँच के लिए छह सदस्यीय विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया था।
आगे क्या
SIT की जाँच जारी है और मामले में अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। पुलिस मुठभेड़ की परिस्थितियों की भी स्वतंत्र जाँच होने की संभावना है, क्योंकि हिरासत में हुई मौतों के मामलों में मानवाधिकार संगठन सदैव पारदर्शिता की माँग करते हैं।