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झारखंड छात्र आंदोलन: सरकार से वार्ता के लिए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल घोषित, 8 छात्र व 2 पत्रकार शामिल

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झारखंड छात्र आंदोलन: सरकार से वार्ता के लिए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल घोषित, 8 छात्र व 2 पत्रकार शामिल

सारांश

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ 13 दिनों से धरने पर बैठे छात्रों ने सरकार से वार्ता के लिए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल घोषित किया। 8 छात्र, 2 पत्रकार और 1 अधिवक्ता शामिल — लेकिन मांगें केवल छात्र ही रखेंगे।

मुख्य बातें

6 अगस्त को रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलनरत छात्रों ने 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल घोषित किया।
प्रतिनिधिमंडल में 8 छात्र , 2 पत्रकार ( शंभूनाथ चौधरी व विकास वर्मा ) और अधिवक्ता अजीत कुमार शामिल हैं।
वार्ता में सरकार के समक्ष मांगें केवल छात्र प्रतिनिधि रखेंगे; पत्रकार व अधिवक्ता मार्गदर्शक भूमिका में रहेंगे।
पत्रकारों को बैठक स्थल पर रिकॉर्डिंग उपकरण ले जाने की अनुमति नहीं होगी।
छात्र जेपीएससी-जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
आंदोलन 13 दिनों से जारी है; यह पहला आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल है।

झारखंड की राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जेपीएससी और जेएसएससी समेत विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में चल रहे छात्र आंदोलन के 13वें दिन, गुरुवार, 6 अगस्त को आंदोलनकारियों ने राज्य सरकार के साथ प्रस्तावित वार्ता के लिए 11 सदस्यीय आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल की घोषणा की। यह पहली बार है जब राज्य सरकार के बातचीत के प्रस्ताव के बाद आंदोलनकारियों ने औपचारिक रूप से अपना प्रतिनिधिमंडल सामने रखा है।

प्रतिनिधिमंडल की संरचना

घोषित 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में 8 छात्र प्रतिनिधि, 2 पत्रकार और 1 अधिवक्ता शामिल हैं। छात्र प्रतिनिधियों में रविन्द्र पासवान, पीयूष कुमार सिंह, रविन्द्र कुमार रवि, राजेश प्रसाद, नीतू कुजूर, कार्तिक सोरेन, संदीप कुमार और शालू सिंह के नाम शामिल हैं। पत्रकारों में शंभूनाथ चौधरी और विकास वर्मा को, तथा अधिवक्ता के रूप में अजीत कुमार को प्रतिनिधिमंडल में रखा गया है।

वार्ता में भूमिकाओं का स्पष्ट विभाजन

आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि सरकार के समक्ष मांगें और तथ्य प्रस्तुत करने का अधिकार केवल छात्र प्रतिनिधियों को होगा। पत्रकार और अधिवक्ता प्रतिनिधिमंडल में केवल अभिभावक एवं मार्गदर्शक की भूमिका में रहेंगे और वार्ता के दौरान अपनी ओर से कोई बयान या पक्ष प्रस्तुत नहीं करेंगे।

यह भी तय किया गया है कि प्रतिनिधिमंडल में शामिल पत्रकार बैठक स्थल के भीतर माइक, कैमरा, रिकॉर्डिंग डिवाइस या अन्य किसी प्रसारण उपकरण के साथ प्रवेश नहीं करेंगे। आंदोलनकारियों के अनुसार, यह निर्णय वार्ता को शांतिपूर्ण, व्यवस्थित और पारदर्शी ढंग से संपन्न कराने के उद्देश्य से लिया गया है।

आंदोलन की पृष्ठभूमि और मांगें

छात्र पिछले 13 दिनों से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में डेरा डाले हुए हैं। उनकी प्रमुख मांगों में जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की सीबीआई जांच, दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना शामिल है। गौरतलब है कि यह आंदोलन झारखंड में सरकारी नौकरियों की पारदर्शी भर्ती को लेकर युवाओं की बढ़ती बेचैनी का प्रतीक बन चुका है।

आगे क्या होगा

राज्य सरकार की ओर से बातचीत का प्रस्ताव मिलने के बाद आंदोलनकारियों द्वारा प्रतिनिधिमंडल घोषित किए जाने से वार्ता की राह खुलती दिख रही है। अब सभी की निगाहें इस प्रस्तावित बैठक के परिणाम पर टिकी हैं — क्या सरकार छात्रों की मांगों पर कोई ठोस आश्वासन देगी, यह देखना बाकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो अपने आप में एक परिपक्व आंदोलन की निशानी है। लेकिन असली सवाल यह है कि झारखंड सरकार सीबीआई जांच की मांग पर क्या रुख अपनाती है — यह मांग राज्य की जांच एजेंसियों पर अविश्वास का सीधा संकेत है। पिछले वर्षों में देश के कई राज्यों में भर्ती परीक्षा घोटालों के बाद उठे आंदोलनों का हश्र प्रायः आश्वासनों में सिमटा है। झारखंड में भी बिना ठोस समयसीमा और जवाबदेही तंत्र के, यह वार्ता महज एक विराम बनकर रह सकती है।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड छात्र आंदोलन किस मुद्दे पर हो रहा है?
छात्र जेपीएससी, जेएसएससी और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में 13 दिनों से धरने पर बैठे हैं। उनकी मुख्य मांगें हैं — सीबीआई जांच, दोषियों पर कार्रवाई और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता।
11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन शामिल है?
प्रतिनिधिमंडल में 8 छात्र प्रतिनिधि — रविन्द्र पासवान, पीयूष कुमार सिंह, रविन्द्र कुमार रवि, राजेश प्रसाद, नीतू कुजूर, कार्तिक सोरेन, संदीप कुमार और शालू सिंह — के अलावा पत्रकार शंभूनाथ चौधरी, विकास वर्मा और अधिवक्ता अजीत कुमार शामिल हैं।
वार्ता में पत्रकारों और अधिवक्ता की क्या भूमिका होगी?
पत्रकार और अधिवक्ता केवल अभिभावक एवं मार्गदर्शक की भूमिका में रहेंगे। वे सरकार के समक्ष कोई मांग या बयान प्रस्तुत नहीं करेंगे और बैठक स्थल पर रिकॉर्डिंग उपकरण भी नहीं ले जा सकेंगे।
छात्र सीबीआई जांच की मांग क्यों कर रहे हैं?
आंदोलनकारियों का कहना है कि जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच के लिए राज्य एजेंसियों पर भरोसा नहीं किया जा सकता। इसलिए वे केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं।
अब आगे क्या होने की संभावना है?
राज्य सरकार के बातचीत के प्रस्ताव के बाद आंदोलनकारियों ने पहली बार आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल घोषित किया है। अब प्रस्तावित वार्ता की तिथि और सरकार के रुख पर सभी की नज़रें टिकी हैं; वार्ता के परिणाम से आंदोलन की अगली दिशा तय होगी।
राष्ट्र प्रेस
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