गर्भाशय की सेहत के लिए अपनाएं 4 सरल तरीके, प्रजनन क्षमता में होगी वृद्धि
सारांश
Key Takeaways
- गर्भाशय की देखभाल से हार्मोन संतुलन में मदद मिलती है।
- सोने से पहले का शांत वातावरण महत्वपूर्ण है।
- गर्म पानी की बोतल से सिकाई से राहत मिलती है।
- खाने के बाद व्रजासन में बैठना लाभकारी है।
- पीठ और पेल्विक एरिया की मसाज से रक्त संचार में सुधार होता है।
नई दिल्ली, 26 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। गर्भाशय किसी महिला के शरीर का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो हार्मोन का निर्माण और संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। यदि गर्भाशय में कोई समस्या आती है, तो सबसे पहले महिला की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है। आयुर्वेद से लेकर विज्ञान तक, गर्भाशय की देखभाल के अनेक तरीके बताए गए हैं।
गर्भाशय में किसी भी प्रकार की समस्या होने पर थायरायड, मोटापे के साथ-साथ महिलाओं को सिस्ट, मासिक चक्र में बदलाव और प्रजनन क्षमता में कमी का सामना करना पड़ता है। इसलिए हर महिला को गर्भाशय की उचित देखभाल करनी चाहिए।
पहला उपाय है सोने से पहले शांति और हल्की गर्मी का वातावरण बनाना। सोने से पहले चारों ओर का माहौल शांत करें और हल्की रोशनी में अपने मन और शरीर को संतुलित करने का प्रयास करें। रात के समय शरीर स्वयं को पुनर्स्थापित करने का कार्य करता है और टॉक्सिन को बाहर निकालता है। इस प्रक्रिया में गर्भाशय का आराम भी शुरू हो जाता है।
दूसरा उपाय है गर्माहट प्रदान करना। मासिक चक्र के दौरान गर्भाशय में संकुचन तेजी से होता है जिससे हल्का दर्द और सूजन महसूस होता है। ऐसे में सप्ताह में कम से कम दो बार गर्भाशय पर गर्म पानी की बोतल से सिकाई करें। इससे गर्भाशय की मांसपेशियों को आराम मिलता है और ऐंठन कम होती है।
तीसरा उपाय है खाना खाने के बाद खुद को शांत रखना। खाने के बाद शरीर की ऊर्जा को पाचन तंत्र और गर्भाशय की ओर भेजने का प्रयास करें। इससे यूट्रस में जमा गंदगी बाहर निकलती है और रक्त का प्रवाह भी बेहतर होता है। इसके लिए व्रजासन में बैठना फायदेमंद है।
चौथा उपाय है पीठ के निचले हिस्से और पेल्विक एरिया की मसाज करना। मसाज के लिए आप बादाम या जैतून का तेल उपयोग कर सकते हैं। रोजाना रात को हल्के हाथों से पीठ के निचले हिस्से और पेल्विक एरिया में मसाज करें। इससे रक्त संचार में सुधार होगा और मांसपेशियों को आराम मिलेगा।