28 जून 2026
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भारत-अमेरिका टेक साझेदारी: सेमीकंडक्टर, एआई और क्वांटम में भरोसेमंद सप्लाई चेन का खाका तैयार

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भारत-अमेरिका टेक साझेदारी: सेमीकंडक्टर, एआई और क्वांटम में भरोसेमंद सप्लाई चेन का खाका तैयार

सारांश

वाशिंगटन में हुई उच्चस्तरीय बैठक में भारत और अमेरिका ने सेमीकंडक्टर, एआई और क्वांटम टेक्नोलॉजी में केवल नीतिगत सहमति नहीं, बल्कि ठोस परियोजनाओं की दिशा में काम करने का संकल्प लिया। राजदूत विनय क्वात्रा से लेकर USISPF के मुकेश अघी तक — सभी ने माना कि असली परीक्षा अब क्रियान्वयन की है।

मुख्य बातें

28 जून 2026 को वाशिंगटन में भारत-अमेरिका उच्चस्तरीय राउंडटेबल आयोजित हुई, जिसमें सेमीकंडक्टर, एआई, क्वांटम टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल मिनरल्स पर फोकस रहा।
राजदूत विनय क्वात्रा ने कहा कि दोनों देश चिप्स से लेकर न्यूरल नेटवर्क तक मिलकर काम करने की स्थिति में हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस.
कृष्णन ने सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन को अब 'हकीकत' बताया और मिशन के अगले चरण का संकेत दिया।
USISPF के सीईओ मुकेश अघी के अनुसार, सरकारें ढाँचा तैयार करती हैं लेकिन असली क्रियान्वयन की ज़िम्मेदारी उद्योग जगत की होगी।
राउंडटेबल का आयोजन USISPF , भारतीय दूतावास और सिल्वराडो पॉलिसी एक्सेलेरेटर ने मिलकर किया।

भारत और अमेरिका ने 28 जून 2026 को वाशिंगटन में एक उच्चस्तरीय राउंडटेबल बैठक के दौरान सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्वांटम टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में एक भरोसेमंद तकनीकी सप्लाई चेन निर्मित करने की दिशा में ठोस कदम उठाने का संकल्प व्यक्त किया। दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, यह रणनीतिक सहयोग अब केवल नीतिगत दस्तावेज़ों तक सीमित नहीं रहा — बल्कि वास्तविक परियोजनाओं के क्रियान्वयन की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है।

राउंडटेबल में क्या हुआ

यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) द्वारा वाशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास और सिल्वराडो पॉलिसी एक्सेलेरेटर के सहयोग से आयोजित इस राउंडटेबल में राजनयिकों, नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों ने भाग लिया। चर्चा का केंद्र सेमीकंडक्टर, एआई इनोवेशन, क्वांटम टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल मिनरल्स की आपूर्ति शृंखला को मज़बूत करने पर रहा।

कार्यक्रम में अमेरिकी वाणिज्य विभाग के डिप्टी अंडर सेक्रेटरी फॉर इनोवेशन एंड एंगेजमेंट बिल गुइडेरा और अमेरिकी ऊर्जा विभाग के ऑफिस ऑफ क्रिटिकल मिनरल्स, मैटेरियल्स एंड मैन्युफैक्चरिंग के डिप्टी असिस्टेंट सेक्रेटरी क्रिस्टोफर साल्डाना भी शामिल हुए।

राजदूत विनय क्वात्रा का बयान

अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने कहा कि दोनों देश एक-दूसरे के पूरक हैं और उभरती तकनीकों में सहयोग की अपार संभावनाएँ हैं। उन्होंने कहा, 'अमेरिका और भारत के सामने चिप्स से लेकर न्यूरल नेटवर्क तक साथ मिलकर काम करने का बड़ा अवसर है। सेमीकंडक्टर, एआई और क्वांटम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत का मिशन-आधारित दृष्टिकोण और अमेरिका का मज़बूत इनोवेशन इकोसिस्टम मिलकर शानदार सहयोग का रास्ता तैयार करते हैं।'

क्वात्रा ने यह भी कहा कि दोनों देश मिलकर भरोसेमंद तकनीकी इकोसिस्टम तैयार कर सकते हैं और भविष्य की उभरती तकनीकों को शक्ति देने वाले महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर तक सुरक्षित पहुँच सुनिश्चित कर सकते हैं।

भारत सरकार की रणनीति और सेमीकंडक्टर मिशन

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि भारत तेज़ी से वैश्विक तकनीकी सप्लाई चेन का एक भरोसेमंद साझेदार बनकर उभर रहा है। उनके अनुसार, 'भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम तेज़ी से बढ़ा है और अब सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन भी हकीकत बनता जा रहा है। हमारी सेमीकंडक्टर मिशन की अगले चरण की योजना इसी गति को आगे बढ़ाएगी।'

कृष्णन ने रेखांकित किया कि भारत की प्रतिभा, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और एआई क्षमताओं के समन्वय से ऐसे समाधान विकसित किए जा सकते हैं जो वैश्विक स्तर पर उपयोगी साबित होंगे।

विदेश मंत्रालय और USISPF की भूमिका

विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव (अमेरिका) के. नागराज नायडू ने कहा कि भारत-अमेरिका संबंध अब 21वीं सदी की ज़रूरतों के अनुरूप एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी का रूप ले चुके हैं। उन्होंने कहा, 'एआई, क्वांटम टेक्नोलॉजी, क्रिटिकल मिनरल्स, एडवांस्ड एनर्जी और भरोसेमंद सप्लाई चेन जैसी पहलों के ज़रिए अब हम सिद्धांतों से आगे बढ़कर वास्तविक परियोजनाओं की दिशा में काम कर रहे हैं। इन योजनाओं को ज़मीन पर उतारने में निजी क्षेत्र की भूमिका सबसे अहम होगी।'

USISPF के अध्यक्ष और सीईओ मुकेश अघी ने कहा कि आने वाले समय में माइक्रोचिप्स और क्रिटिकल मिनरल्स वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा तय करेंगे। उनके अनुसार, 'अमेरिका और भारत 21वीं सदी की सबसे भरोसेमंद तकनीकी साझेदारी बनाने की मज़बूत स्थिति में हैं। सरकारें सहयोग का ढाँचा तैयार कर सकती हैं, लेकिन असली क्रियान्वयन, नवाचार और निवेश की ज़िम्मेदारी उद्योग जगत निभाएगा।'

आगे क्या होगा

यह राउंडटेबल ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखला को लेकर अमेरिका, यूरोप और एशियाई देशों के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज़ हो रही है। गौरतलब है कि भारत ने हाल के वर्षों में सेमीकंडक्टर मिशन के तहत कई फैब्रिकेशन इकाइयों को मंज़ूरी दी है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत-अमेरिका तकनीकी साझेदारी का अगला दौर इस बात पर निर्भर करेगा कि निजी क्षेत्र कितनी तेज़ी से निवेश और क्रियान्वयन को ज़मीन पर उतारता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 'सिद्धांतों से परियोजनाओं की ओर' का यह सफर कितना ठोस है। भारत के सेमीकंडक्टर मिशन को मंज़ूरियाँ मिली हैं, पर फैब्रिकेशन से उत्पादन तक की दूरी अभी बाकी है। यह ऐसे समय में आया है जब चीन के साथ तकनीकी प्रतिस्पर्धा में अमेरिका को एक विश्वसनीय विकल्प की सख्त ज़रूरत है — और भारत उस भूमिका के लिए खुद को प्रस्तुत कर रहा है। आलोचकों का कहना है कि जब तक निजी क्षेत्र के निवेश और सरकारी प्रोत्साहन के बीच जवाबदेही का स्पष्ट ढाँचा नहीं बनता, ये बैठकें महत्वाकांक्षी घोषणापत्र से आगे नहीं बढ़ेंगी।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-अमेरिका तकनीकी सप्लाई चेन साझेदारी क्या है?
यह दोनों देशों के बीच सेमीकंडक्टर, एआई, क्वांटम टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में एक भरोसेमंद और मज़बूत तकनीकी आपूर्ति शृंखला निर्मित करने की रणनीतिक पहल है। 28 जून 2026 को वाशिंगटन में हुई उच्चस्तरीय राउंडटेबल में इस पर विस्तृत चर्चा हुई।
इस राउंडटेबल में कौन-कौन शामिल हुए?
बैठक में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन, विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव के. नागराज नायडू, USISPF के सीईओ मुकेश अघी, अमेरिकी वाणिज्य विभाग के बिल गुइडेरा और ऊर्जा विभाग के क्रिस्टोफर साल्डाना शामिल हुए।
भारत का सेमीकंडक्टर मिशन अब किस चरण में है?
एस. कृष्णन के अनुसार, भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम तेज़ी से बढ़ा है और सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन अब 'हकीकत बनता जा रहा है।' मिशन के अगले चरण की योजना इसी गति को आगे बढ़ाएगी, हालाँकि विस्तृत समयसीमा अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
इस साझेदारी में निजी क्षेत्र की क्या भूमिका होगी?
के. नागराज नायडू और मुकेश अघी दोनों ने स्पष्ट किया कि सरकारें सहयोग का ढाँचा तैयार करती हैं, लेकिन वास्तविक क्रियान्वयन, नवाचार और निवेश की ज़िम्मेदारी निजी क्षेत्र की होगी। उद्योग जगत को इन योजनाओं को ज़मीन पर उतारने में अग्रणी भूमिका निभानी होगी।
क्रिटिकल मिनरल्स इस साझेदारी में क्यों महत्वपूर्ण हैं?
USISPF के मुकेश अघी के अनुसार, माइक्रोचिप्स और क्रिटिकल मिनरल्स आने वाले दशकों में वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा तय करेंगे। इन खनिजों की आपूर्ति शृंखला पर नियंत्रण रणनीतिक महत्व रखता है, और भारत-अमेरिका साझेदारी इस क्षेत्र में एक विश्वसनीय विकल्प तैयार करने का प्रयास है।
राष्ट्र प्रेस
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