भारत-अमेरिका टेक साझेदारी: सेमीकंडक्टर, एआई और क्वांटम में भरोसेमंद सप्लाई चेन का खाका तैयार
सारांश
मुख्य बातें
भारत और अमेरिका ने 28 जून 2026 को वाशिंगटन में एक उच्चस्तरीय राउंडटेबल बैठक के दौरान सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्वांटम टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में एक भरोसेमंद तकनीकी सप्लाई चेन निर्मित करने की दिशा में ठोस कदम उठाने का संकल्प व्यक्त किया। दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, यह रणनीतिक सहयोग अब केवल नीतिगत दस्तावेज़ों तक सीमित नहीं रहा — बल्कि वास्तविक परियोजनाओं के क्रियान्वयन की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है।
राउंडटेबल में क्या हुआ
यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) द्वारा वाशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास और सिल्वराडो पॉलिसी एक्सेलेरेटर के सहयोग से आयोजित इस राउंडटेबल में राजनयिकों, नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों ने भाग लिया। चर्चा का केंद्र सेमीकंडक्टर, एआई इनोवेशन, क्वांटम टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल मिनरल्स की आपूर्ति शृंखला को मज़बूत करने पर रहा।
कार्यक्रम में अमेरिकी वाणिज्य विभाग के डिप्टी अंडर सेक्रेटरी फॉर इनोवेशन एंड एंगेजमेंट बिल गुइडेरा और अमेरिकी ऊर्जा विभाग के ऑफिस ऑफ क्रिटिकल मिनरल्स, मैटेरियल्स एंड मैन्युफैक्चरिंग के डिप्टी असिस्टेंट सेक्रेटरी क्रिस्टोफर साल्डाना भी शामिल हुए।
राजदूत विनय क्वात्रा का बयान
अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने कहा कि दोनों देश एक-दूसरे के पूरक हैं और उभरती तकनीकों में सहयोग की अपार संभावनाएँ हैं। उन्होंने कहा, 'अमेरिका और भारत के सामने चिप्स से लेकर न्यूरल नेटवर्क तक साथ मिलकर काम करने का बड़ा अवसर है। सेमीकंडक्टर, एआई और क्वांटम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत का मिशन-आधारित दृष्टिकोण और अमेरिका का मज़बूत इनोवेशन इकोसिस्टम मिलकर शानदार सहयोग का रास्ता तैयार करते हैं।'
क्वात्रा ने यह भी कहा कि दोनों देश मिलकर भरोसेमंद तकनीकी इकोसिस्टम तैयार कर सकते हैं और भविष्य की उभरती तकनीकों को शक्ति देने वाले महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर तक सुरक्षित पहुँच सुनिश्चित कर सकते हैं।
भारत सरकार की रणनीति और सेमीकंडक्टर मिशन
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि भारत तेज़ी से वैश्विक तकनीकी सप्लाई चेन का एक भरोसेमंद साझेदार बनकर उभर रहा है। उनके अनुसार, 'भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम तेज़ी से बढ़ा है और अब सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन भी हकीकत बनता जा रहा है। हमारी सेमीकंडक्टर मिशन की अगले चरण की योजना इसी गति को आगे बढ़ाएगी।'
कृष्णन ने रेखांकित किया कि भारत की प्रतिभा, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और एआई क्षमताओं के समन्वय से ऐसे समाधान विकसित किए जा सकते हैं जो वैश्विक स्तर पर उपयोगी साबित होंगे।
विदेश मंत्रालय और USISPF की भूमिका
विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव (अमेरिका) के. नागराज नायडू ने कहा कि भारत-अमेरिका संबंध अब 21वीं सदी की ज़रूरतों के अनुरूप एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी का रूप ले चुके हैं। उन्होंने कहा, 'एआई, क्वांटम टेक्नोलॉजी, क्रिटिकल मिनरल्स, एडवांस्ड एनर्जी और भरोसेमंद सप्लाई चेन जैसी पहलों के ज़रिए अब हम सिद्धांतों से आगे बढ़कर वास्तविक परियोजनाओं की दिशा में काम कर रहे हैं। इन योजनाओं को ज़मीन पर उतारने में निजी क्षेत्र की भूमिका सबसे अहम होगी।'
USISPF के अध्यक्ष और सीईओ मुकेश अघी ने कहा कि आने वाले समय में माइक्रोचिप्स और क्रिटिकल मिनरल्स वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा तय करेंगे। उनके अनुसार, 'अमेरिका और भारत 21वीं सदी की सबसे भरोसेमंद तकनीकी साझेदारी बनाने की मज़बूत स्थिति में हैं। सरकारें सहयोग का ढाँचा तैयार कर सकती हैं, लेकिन असली क्रियान्वयन, नवाचार और निवेश की ज़िम्मेदारी उद्योग जगत निभाएगा।'
आगे क्या होगा
यह राउंडटेबल ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखला को लेकर अमेरिका, यूरोप और एशियाई देशों के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज़ हो रही है। गौरतलब है कि भारत ने हाल के वर्षों में सेमीकंडक्टर मिशन के तहत कई फैब्रिकेशन इकाइयों को मंज़ूरी दी है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत-अमेरिका तकनीकी साझेदारी का अगला दौर इस बात पर निर्भर करेगा कि निजी क्षेत्र कितनी तेज़ी से निवेश और क्रियान्वयन को ज़मीन पर उतारता है।