भारत-अमेरिका वार्ता: सेमीकंडक्टर, एआई और क्रिटिकल मिनरल में द्विपक्षीय सहयोग को नई दिशा
सारांश
मुख्य बातें
भारत और अमेरिका ने 25 जून 2026 को वाशिंगटन में उच्च स्तरीय बैठक के दौरान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), आपूर्ति श्रृंखला और क्रिटिकल मिनरल के क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और गहरा करने पर विस्तृत चर्चा की। वाशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट के ज़रिए इस बैठक की जानकारी साझा की।
बैठक में कौन शामिल हुए
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने अमेरिकी अंडर सेक्रेटरी ऑफ स्टेट जैकब एस. हेलबर्ग से मुलाकात की। भारतीय दूतावास ने अपनी पोस्ट में कहा, "इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय सचिव एस. कृष्णन ने द्विपक्षीय टेक्नोलॉजी सहयोग को और मजबूत करने के लिए अमेरिकी अंडर सेक्रेटरी ऑफ स्टेट जैकब एस. हेलबर्ग से मुलाकात की।"
मुख्य घटनाक्रम
दोनों पक्षों ने विविधतापूर्ण और भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखला निर्मित करने पर ज़ोर दिया — विशेष रूप से सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और एआई को अपनाने के संदर्भ में। इसके साथ ही, उन्नत मैन्युफैक्चरिंग, स्वच्छ ऊर्जा तकनीक और अन्य रणनीतिक उद्योगों के लिए आवश्यक क्रिटिकल मिनरल तक निर्बाध पहुँच सुनिश्चित करने के उपायों पर भी विचार-विमर्श हुआ।
वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में भारत की भूमिका
यह बैठक ऐसे समय में हुई जब भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में अपनी स्थिति मज़बूत करने की दिशा में सक्रिय है। इस महीने की शुरुआत में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा था कि वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में लगभग 10 लाख कुशल पेशेवरों की कमी है — और यह भारत के लिए इस क्षेत्र में प्रमुख प्रतिभा-आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरने का बड़ा अवसर है।
वैष्णव ने यह भी कहा था, "2032 तक, दुनिया भर में सेमीकंडक्टर सेक्टर में लगभग 10 लाख नौकरियाँ पैदा होने की उम्मीद है। साथ ही, इस उद्योग में लगभग 10 लाख कुशल पेशेवरों की कमी भी है।" आँकड़ों के अनुसार, वर्तमान में वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग का मूल्य लगभग 800 अरब डॉलर है और अनुमान है कि यह एक वर्ष के भीतर 1 ट्रिलियन डॉलर का आँकड़ा पार कर लेगा।
व्यापक रणनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि यह वार्ता भारत-अमेरिका के बीच महत्त्वपूर्ण एवं उभरती हुई प्रौद्योगिकियों (iCET) के क्षेत्र में बढ़ते सहयोग की कड़ी में एक और अहम कदम है। दोनों देश आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करने और रणनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में एकल-स्रोत निर्भरता घटाने के साझा लक्ष्य पर काम कर रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब चीन के साथ तकनीकी प्रतिस्पर्धा को देखते हुए अमेरिका भरोसेमंद साझेदारों के साथ वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखला बनाने को प्राथमिकता दे रहा है।
आगे क्या
इस उच्च स्तरीय बैठक के बाद दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग के नए अध्याय खुलने की संभावना है। सेमीकंडक्टर और एआई जैसे क्षेत्रों में ठोस समझौतों और साझा परियोजनाओं की दिशा में आगे की बातचीत अपेक्षित है।