12 अगस्त 2026
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प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना: चमोली में सिलाई-बुनाई प्रशिक्षण से स्वरोजगार की नई राह

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प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना: चमोली में सिलाई-बुनाई प्रशिक्षण से स्वरोजगार की नई राह

सारांश

चमोली के दूरदराज़ इलाकों में प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना पारंपरिक कारीगरों के लिए उम्मीद की किरण बन रही है। निःशुल्क प्रशिक्षण, टूल किट और ऋण सुविधा के ज़रिये यह योजना पलायन-प्रभावित पर्वतीय जनपद में स्थानीय स्तर पर आजीविका के नए अवसर खोल रही है।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत उत्तराखंड के चमोली जनपद में सिलाई-बुनाई का निःशुल्क आवासीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
प्रशिक्षण एसबीआई ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान, गोपेश्वर में संचालित हो रहा है।
प्रशिक्षण पूर्ण होने पर लाभार्थियों को निःशुल्क टूल किट और स्वरोजगार के लिए ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
लाभार्थी उषा ने बताया कि प्रशिक्षण से उनके हुनर में सुधार हो रहा है और स्वरोजगार शुरू करने में मदद मिलेगी।
जिला समन्वयक सौरभ चंद्र सानू ने योजना को पारंपरिक कारीगरी को आय के साधन में बदलने का अवसर बताया।

केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना उत्तराखंड के सीमांत जनपद चमोली में पारंपरिक हुनरमंद लोगों और युवाओं के लिए स्वरोजगार का नया द्वार खोल रही है। 12 अगस्त 2026 को प्राप्त जानकारी के अनुसार, योजना के तहत लाभार्थियों को निःशुल्क आवासीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे अपने परंपरागत कौशल को आधुनिक बाज़ार की ज़रूरतों के अनुरूप ढाल सकें। इन दिनों सिलाई-बुनाई प्रशिक्षण को लेकर प्रशिक्षणार्थियों में उल्लेखनीय उत्साह देखा जा रहा है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम का स्वरूप

चमोली जनपद में एसबीआई ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान, गोपेश्वर में विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। फिलहाल सिलाई-बुनाई से संबंधित प्रशिक्षण चल रहा है, जिसमें लाभार्थियों को बुनियादी तकनीकों से लेकर बाज़ार की माँग के अनुरूप काम करने की बारीकियाँ सिखाई जा रही हैं। प्रशिक्षण का उद्देश्य पारंपरिक हुनर को नई तकनीक से जोड़कर उसे आय के एक स्थायी साधन में बदलना है।

लाभार्थियों की आवाज़

योजना की लाभार्थी उषा ने बताया कि निःशुल्क प्रशिक्षण के ज़रिये उन्हें सिलाई-बुनाई की बारीकियाँ सीखने का अवसर मिल रहा है, जिससे उनके हुनर में स्पष्ट सुधार आ रहा है। उन्होंने कहा, 'इस प्रशिक्षण से आगे स्वरोजगार शुरू करने में मदद मिलेगी।' उषा ने इस पहल के लिए केंद्र सरकार का आभार भी जताया।

ज़िला समन्वयक का बयान

पीएम विश्वकर्मा योजना के चमोली जिले के जिला समन्वयक सौरभ चंद्र सानू ने बताया कि प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद लाभार्थियों को निःशुल्क टूल किट भी उपलब्ध कराई जाती है, ताकि वे सीखे गए हुनर को तुरंत काम में ला सकें। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि योजना के अंतर्गत स्वरोजगार शुरू करने के लिए ऋण की व्यवस्था भी की गई है। सानू ने कहा कि यह एक बेहद उपयोगी योजना है और पात्र लोगों को इसका लाभ उठाना चाहिए।

योजना का व्यापक महत्व

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड के पर्वतीय जनपदों में पलायन एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। गौरतलब है कि चमोली जैसे सीमांत क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सीमित हैं, और इस योजना के ज़रिये युवाओं को अपने गाँव में ही आजीविका के साधन विकसित करने का मौका मिल रहा है। निःशुल्क प्रशिक्षण, टूल किट और ऋण सुविधा का यह त्रिस्तरीय ढाँचा स्वरोजगार की राह को व्यावहारिक बनाने की कोशिश करता है।

आगे की राह

जिला प्रशासन के अनुसार, चमोली में विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण कार्यक्रम आगे भी जारी रहेंगे। अधिकारियों का कहना है कि अधिक से अधिक पात्र लाभार्थियों को योजना से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि पारंपरिक कारीगरी को एक संगठित और आत्मनिर्भर उद्यम का रूप दिया जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

टूल किट और ऋण — कागज़ पर व्यापक दिखता है, लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या प्रशिक्षण के बाद लाभार्थी वास्तव में टिकाऊ आजीविका बना पाते हैं। चमोली जैसे पर्वतीय जनपदों में बाज़ार तक पहुँच, कच्चे माल की उपलब्धता और डिजिटल मार्केटिंग की जानकारी के बिना केवल कौशल प्रशिक्षण अधूरा साबित हो सकता है। पलायन की समस्या से जूझ रहे इस क्षेत्र में योजना की दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रशिक्षित कारीगरों को स्थानीय और राष्ट्रीय बाज़ार से जोड़ने के लिए क्या ठोस तंत्र बनाया जाता है।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना क्या है और इसका लाभ किसे मिलता है?
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जो पारंपरिक कारीगरों और हुनरमंद लोगों को निःशुल्क प्रशिक्षण, टूल किट और स्वरोजगार ऋण के ज़रिये आत्मनिर्भर बनाने के लिए बनाई गई है। सिलाई-बुनाई, बढ़ईगीरी जैसे पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े पात्र लाभार्थी इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।
चमोली में विश्वकर्मा योजना के तहत कौन-सा प्रशिक्षण दिया जा रहा है?
चमोली जनपद में फिलहाल एसबीआई ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान, गोपेश्वर में सिलाई-बुनाई का निःशुल्क आवासीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें बुनियादी तकनीक से लेकर बाज़ार की ज़रूरत के अनुरूप काम करने की बारीकियाँ सिखाई जाती हैं।
प्रशिक्षण पूरा करने के बाद लाभार्थियों को क्या मिलता है?
प्रशिक्षण पूर्ण होने पर लाभार्थियों को निःशुल्क टूल किट प्रदान की जाती है, ताकि वे सीखे गए हुनर को तुरंत उपयोग में ला सकें। इसके अलावा, स्वरोजगार शुरू करने के लिए ऋण सुविधा भी योजना के अंतर्गत उपलब्ध है।
चमोली जैसे सीमांत जनपद के लिए यह योजना क्यों महत्वपूर्ण है?
चमोली उत्तराखंड का एक पर्वतीय सीमांत जनपद है जहाँ स्थानीय रोजगार के अवसर सीमित हैं और पलायन एक बड़ी चुनौती है। यह योजना स्थानीय स्तर पर आजीविका के साधन विकसित करने का अवसर देती है, जिससे युवाओं को अपने गाँव में ही काम मिल सके।
योजना का लाभ उठाने के लिए क्या करना होगा?
पात्र लाभार्थियों को जिला समन्वयक कार्यालय या संबंधित प्रशिक्षण संस्थान से संपर्क कर पंजीकरण कराना होता है। जिला समन्वयक सौरभ चंद्र सानू के अनुसार, अधिक से अधिक पात्र लोगों को योजना से जोड़ने के प्रयास जारी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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