शेयर बाजार आउटलुक: कच्चा तेल $100 पार, अमेरिका-ईरान तनाव और PMI डेटा से तय होगी अगले हफ्ते की चाल
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय शेयर बाजार के लिए 29 सितंबर से 3 अक्टूबर 2026 का सप्ताह कई अहम कारकों के दबाव में गुजरेगा। कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं, मध्य पूर्व में अमेरिका-ईरान युद्ध का तनाव जारी है, और घरेलू मोर्चे पर ऑटो सेल्स, PMI, राजकोषीय घाटा तथा विदेशी मुद्रा भंडार जैसे महत्वपूर्ण आँकड़े बाजार की दिशा तय करेंगे। उल्लेखनीय है कि 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर बाजार बंद रहेगा, इसलिए यह एक चार सत्रीय कारोबारी सप्ताह होगा।
बीते सप्ताह का प्रदर्शन
बीता सप्ताह (21-25 सितंबर) भारतीय शेयर बाजार के लिए नकारात्मक रहा। सेंसेक्स 399.22 अंक यानी 0.54 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,895.74 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 205.90 अंक यानी 0.88 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 23,140.50 पर बंद हुआ।
व्यापक बाजार में भी दबाव देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1,285.25 अंक यानी 2.07 प्रतिशत टूटकर 60,906 पर आ गया, और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 160.45 अंक यानी 0.81 प्रतिशत की गिरावट के साथ 19,715.25 पर बंद हुआ।
किन सेक्टरों में तेजी, किनमें गिरावट
बीते सप्ताह सेक्टोरल प्रदर्शन मिला-जुला रहा। निफ्टी रियल्टी ने 2.98 प्रतिशत की सबसे मजबूत बढ़त दर्ज की, इसके बाद निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (1.14 प्रतिशत), निफ्टी फार्मा (1.10 प्रतिशत), निफ्टी FMCG (1.04 प्रतिशत), निफ्टी इंडिया डिफेंस (0.53 प्रतिशत) और निफ्टी हेल्थकेयर (0.39 प्रतिशत) हरे निशान में रहे।
दूसरी ओर, निफ्टी IT 2.40 प्रतिशत की सबसे बड़ी गिरावट के साथ फिसला। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज (1.63 प्रतिशत), निफ्टी सर्विसेज (1.53 प्रतिशत), निफ्टी प्राइवेट बैंक (1.49 प्रतिशत), निफ्टी इन्फ्रा (1.26 प्रतिशत) और निफ्टी एनर्जी (0.88 प्रतिशत) लाल निशान में बंद हुए।
भू-राजनीतिक तनाव का असर
मध्य पूर्व में जारी अमेरिका-ईरान संघर्ष वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए सबसे बड़ी अनिश्चितता बना हुआ है। कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल से ऊपर टिकी हैं, जो भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश के लिए चालू खाता घाटे और मुद्रास्फीति दोनों पर दबाव बना सकती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब घरेलू मुद्रास्फीति पर भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की पैनी नज़र बनी हुई है।
विश्लेषकों के अनुसार, यदि इस मोर्चे पर तनाव में कमी के संकेत मिलते हैं, तो बाजार में राहत की लहर आ सकती है। इसके विपरीत, तनाव बढ़ने की स्थिति में निवेशकों की धारणा और कमजोर हो सकती है।
अगले हफ्ते के अहम आँकड़े और ट्रिगर
घरेलू मोर्चे पर अगले सप्ताह कई प्रमुख आर्थिक आँकड़े जारी होने वाले हैं। इनमें ऑटो सेल्स डेटा, जीएसटी संग्रह, इंडस्ट्रियल और मैन्युफैक्चरिंग PMI, राजकोषीय घाटे के आँकड़े और विदेशी मुद्रा भंडार शामिल हैं। इनमें से PMI और राजकोषीय घाटे के आँकड़े बाजार की धारणा पर सबसे सीधा असर डाल सकते हैं।
गौरतलब है कि 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के चलते बाजार बंद रहने से कारोबारी सत्रों की संख्या घटकर चार रह जाएगी, जिससे प्रत्येक सत्र में अस्थिरता अपेक्षाकृत अधिक हो सकती है। आने वाले दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का रुख और वैश्विक बाजारों के संकेत भी अहम भूमिका निभाएंगे।