पीएम विश्वकर्मा योजना: चमोली के गोपेश्वर में लाभार्थियों को एआई और डिजिटल मार्केटिंग का प्रशिक्षण
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड के चमोली जिले के गोपेश्वर में 19 अगस्त 2026 को पीएम विश्वकर्मा योजना के पंजीकृत लाभार्थियों के लिए ब्रांडिंग, मार्केटिंग और डिजिटल तकनीक पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्रालय के विकास कार्यालय, देहरादून द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में जिलेभर के कारीगरों और शिल्पकारों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
कार्यशाला का आयोजन और विशेषज्ञों की भागीदारी
गढ़वाल होटल, गोपेश्वर में आयोजित इस कार्यशाला का शुभारंभ विकास कार्यालय देहरादून के उप निदेशक एससी कांडपाल ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए किया। उन्होंने MSME मंत्रालय की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी। देहरादून से आए विशेषज्ञ अंकित द्विवेदी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के माध्यम से व्यवसाय संचालन और उत्पादों की मार्केटिंग को बढ़ावा देने के व्यावहारिक तरीकों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के गजेंद्र प्रसाद गैरोला ने वित्तीय साक्षरता और बैंकिंग योजनाओं पर प्रकाश डाला, जबकि जिला उद्योग केंद्र चमोली की महाप्रबंधक अंजलि रमन ने विभागीय योजनाओं की जानकारी साझा की। इंडिया पोस्ट के प्रबंधन से जुड़े संदीप जुयाल ने क्यूआर कोड जनरेशन की प्रक्रिया समझाई, और प्रमुख उद्यमी गिरीश जोशी ने लाभार्थियों को उद्यमिता अपनाने और अपने उत्पादों के लिए बेहतर बाज़ार तलाशने के लिए प्रेरित किया।
अधिकारियों ने क्या कहा
विकास कार्यालय के उप निदेशक एसपी कांडपाल ने कहा, 'प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यशाला में मार्केटिंग और आधुनिक तकनीक के बारे में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें एआई, क्यूआर कोड जनरेशन और बैंकों की स्कीम के बारे में प्रतिभागियों को जानकारी दी गई। हमारा प्रयास काश्तकारों को उद्यमी बनाना है।'
जिला उद्योग केंद्र की महाप्रबंधक अंजलि रमन ने बताया, 'इच्छुक लोगों को पीएम विश्वकर्मा योजना के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर पंजीकृत करना होगा। इस योजना में पंजीकृत कारीगर को प्रशिक्षण के साथ टूल किट और ऋण भी उपलब्ध कराया जाता है।'
लाभार्थियों की आवाज़
कार्यशाला में शामिल पीएम विश्वकर्मा लाभार्थी नंदी राणा ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, 'मैंने दो साल पहले इस योजना के तहत प्रशिक्षण लिया था। जितने लोगों ने प्रशिक्षण लिया है, उन्हें ₹15,000 का टूल किट मिला है। इसके अलावा मानदेय भी मिला है। सिलाई का प्रशिक्षण अधिकतर लोगों को दिया गया था। अब हमें चिंता थी कि मार्केटिंग कैसे हो — इसका समाधान आज की कार्यशाला से मिला। कार्यशाला में बताया गया कि ऑनलाइन अपने उत्पाद बेच सकते हैं। अब मैं भी अपने उत्पादों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के ज़रिए बेचूंगी।'
कार्यशाला का उद्देश्य और समापन
कार्यक्रम के अंत में डीपीएमयू के सौरभ चंद्र सानू ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। इस कार्यशाला का मूल उद्देश्य पीएम विश्वकर्मा योजना के लाभार्थियों को ब्रांडिंग, डिजिटल मार्केटिंग, एआई-आधारित उपकरणों और वित्तीय प्रबंधन की व्यावहारिक जानकारी देकर उनके कारोबार को सुदृढ़ बनाना रहा। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार पारंपरिक कारीगरों को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ने पर विशेष ज़ोर दे रही है।