19 अगस्त 2026
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पीएम विश्वकर्मा योजना: चमोली के गोपेश्वर में लाभार्थियों को एआई और डिजिटल मार्केटिंग का प्रशिक्षण

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पीएम विश्वकर्मा योजना: चमोली के गोपेश्वर में लाभार्थियों को एआई और डिजिटल मार्केटिंग का प्रशिक्षण

सारांश

चमोली के गोपेश्वर में पीएम विश्वकर्मा योजना के लाभार्थियों को पहली बार एआई, क्यूआर कोड और ऑनलाइन बिक्री का व्यावहारिक प्रशिक्षण मिला। यह कदम पारंपरिक कारीगरों को डिजिटल बाज़ार से जोड़ने की केंद्र सरकार की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

मुख्य बातें

19 अगस्त 2026 को गोपेश्वर, चमोली में पीएम विश्वकर्मा योजना के लाभार्थियों के लिए एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यशाला में एआई , क्यूआर कोड जनरेशन , डिजिटल मार्केटिंग और वित्तीय साक्षरता पर प्रशिक्षण दिया गया।
योजना के तहत पंजीकृत कारीगरों को प्रशिक्षण के साथ ₹15,000 का टूल किट और ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
आयोजन MSME मंत्रालय के विकास कार्यालय, देहरादून द्वारा किया गया; SBI और इंडिया पोस्ट के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।
लाभार्थी नंदी राणा ने बताया कि कार्यशाला के बाद वे अपने उत्पाद ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के ज़रिए बेचेंगी।

उत्तराखंड के चमोली जिले के गोपेश्वर में 19 अगस्त 2026 को पीएम विश्वकर्मा योजना के पंजीकृत लाभार्थियों के लिए ब्रांडिंग, मार्केटिंग और डिजिटल तकनीक पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्रालय के विकास कार्यालय, देहरादून द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में जिलेभर के कारीगरों और शिल्पकारों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

कार्यशाला का आयोजन और विशेषज्ञों की भागीदारी

गढ़वाल होटल, गोपेश्वर में आयोजित इस कार्यशाला का शुभारंभ विकास कार्यालय देहरादून के उप निदेशक एससी कांडपाल ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए किया। उन्होंने MSME मंत्रालय की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी। देहरादून से आए विशेषज्ञ अंकित द्विवेदी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के माध्यम से व्यवसाय संचालन और उत्पादों की मार्केटिंग को बढ़ावा देने के व्यावहारिक तरीकों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के गजेंद्र प्रसाद गैरोला ने वित्तीय साक्षरता और बैंकिंग योजनाओं पर प्रकाश डाला, जबकि जिला उद्योग केंद्र चमोली की महाप्रबंधक अंजलि रमन ने विभागीय योजनाओं की जानकारी साझा की। इंडिया पोस्ट के प्रबंधन से जुड़े संदीप जुयाल ने क्यूआर कोड जनरेशन की प्रक्रिया समझाई, और प्रमुख उद्यमी गिरीश जोशी ने लाभार्थियों को उद्यमिता अपनाने और अपने उत्पादों के लिए बेहतर बाज़ार तलाशने के लिए प्रेरित किया।

अधिकारियों ने क्या कहा

विकास कार्यालय के उप निदेशक एसपी कांडपाल ने कहा, 'प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यशाला में मार्केटिंग और आधुनिक तकनीक के बारे में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें एआई, क्यूआर कोड जनरेशन और बैंकों की स्कीम के बारे में प्रतिभागियों को जानकारी दी गई। हमारा प्रयास काश्तकारों को उद्यमी बनाना है।'

जिला उद्योग केंद्र की महाप्रबंधक अंजलि रमन ने बताया, 'इच्छुक लोगों को पीएम विश्वकर्मा योजना के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर पंजीकृत करना होगा। इस योजना में पंजीकृत कारीगर को प्रशिक्षण के साथ टूल किट और ऋण भी उपलब्ध कराया जाता है।'

लाभार्थियों की आवाज़

कार्यशाला में शामिल पीएम विश्वकर्मा लाभार्थी नंदी राणा ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, 'मैंने दो साल पहले इस योजना के तहत प्रशिक्षण लिया था। जितने लोगों ने प्रशिक्षण लिया है, उन्हें ₹15,000 का टूल किट मिला है। इसके अलावा मानदेय भी मिला है। सिलाई का प्रशिक्षण अधिकतर लोगों को दिया गया था। अब हमें चिंता थी कि मार्केटिंग कैसे हो — इसका समाधान आज की कार्यशाला से मिला। कार्यशाला में बताया गया कि ऑनलाइन अपने उत्पाद बेच सकते हैं। अब मैं भी अपने उत्पादों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के ज़रिए बेचूंगी।'

कार्यशाला का उद्देश्य और समापन

कार्यक्रम के अंत में डीपीएमयू के सौरभ चंद्र सानू ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। इस कार्यशाला का मूल उद्देश्य पीएम विश्वकर्मा योजना के लाभार्थियों को ब्रांडिंग, डिजिटल मार्केटिंग, एआई-आधारित उपकरणों और वित्तीय प्रबंधन की व्यावहारिक जानकारी देकर उनके कारोबार को सुदृढ़ बनाना रहा। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार पारंपरिक कारीगरों को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ने पर विशेष ज़ोर दे रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि एक दिन के प्रशिक्षण से पहाड़ी जिलों के कारीगर वास्तव में ऑनलाइन बाज़ार में कितनी सफलता पा सकते हैं, जहाँ इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल साक्षरता अभी भी बड़ी चुनौती है। ₹15,000 का टूल किट और एकल प्रशिक्षण सत्र तब तक पर्याप्त नहीं होगा जब तक अनुवर्ती मेंटरशिप और बाज़ार लिंकेज की व्यवस्था न हो। गौरतलब है कि उत्तराखंड के दूरदराज़ जिलों में ई-कॉमर्स अपनाने की दर राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे है। योजना की सफलता का मापदंड प्रशिक्षण में भागीदारी नहीं, बल्कि लाभार्थियों की वास्तविक आय में वृद्धि होनी चाहिए।
RashtraPress
19 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम विश्वकर्मा योजना क्या है और इसके क्या लाभ हैं?
पीएम विश्वकर्मा योजना केंद्र सरकार की एक पहल है जो पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को प्रशिक्षण, ₹15,000 का टूल किट और ऋण सुविधा प्रदान करती है। इच्छुक लाभार्थियों को योजना की आधिकारिक वेबसाइट पर पंजीकरण कराना होता है।
चमोली में आयोजित कार्यशाला में क्या सिखाया गया?
19 अगस्त 2026 को गोपेश्वर में आयोजित कार्यशाला में लाभार्थियों को एआई-आधारित मार्केटिंग, क्यूआर कोड जनरेशन, ऑनलाइन उत्पाद बिक्री और वित्तीय साक्षरता का प्रशिक्षण दिया गया। SBI और इंडिया पोस्ट के प्रतिनिधियों ने भी बैंकिंग और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं की जानकारी दी।
पीएम विश्वकर्मा योजना में पंजीकरण कैसे करें?
जिला उद्योग केंद्र चमोली की महाप्रबंधक अंजलि रमन के अनुसार, इच्छुक कारीगरों को योजना की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा। पंजीकरण के बाद प्रशिक्षण, टूल किट और ऋण सुविधा का लाभ मिलता है।
इस कार्यशाला का आयोजन किसने किया और इसमें कौन शामिल हुए?
कार्यशाला का आयोजन MSME मंत्रालय के विकास कार्यालय, देहरादून ने किया। इसमें विकास कार्यालय के उप निदेशक एससी कांडपाल, SBI के गजेंद्र प्रसाद गैरोला, इंडिया पोस्ट के संदीप जुयाल और उद्यमी गिरीश जोशी सहित जिलेभर के पंजीकृत विश्वकर्मा लाभार्थियों ने भाग लिया।
क्या पीएम विश्वकर्मा योजना के लाभार्थी ऑनलाइन उत्पाद बेच सकते हैं?
हाँ, इस कार्यशाला का एक प्रमुख उद्देश्य लाभार्थियों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से उत्पाद बेचने के तरीके सिखाना था। लाभार्थी नंदी राणा ने बताया कि कार्यशाला के बाद वे अपने उत्पाद ऑनलाइन बेचने की योजना बना रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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