बुरहानपुर में PM विश्वकर्मा योजना: 3,207 कारीगरों को AI और डिजिटल कारोबार का प्रशिक्षण
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में 17 जुलाई को प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के लिए एक दिवसीय जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल मार्केटिंग और ई-कॉमर्स जैसे आधुनिक विषयों पर विशेष जोर दिया गया। लालबाग हायर सेकेंडरी स्कूल में आयोजित इस कार्यक्रम का संचालन सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्रालय और जिला प्रशासन बुरहानपुर के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
कार्यक्रम में क्या-क्या हुआ
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में योजना के लाभार्थियों और स्थानीय कारीगरों ने भाग लिया। उन्हें बैंक ऋण, टूलकिट वितरण, कौशल प्रशिक्षण, डिजिटल भुगतान और स्वरोजगार से जुड़ी विस्तृत जानकारी दी गई। कई लाभार्थियों को कार्यक्रम के दौरान ही टूलकिट और ऋण स्वीकृति का लाभ भी प्रदान किया गया।
विशेषज्ञों ने कारीगरों को बताया कि AI की सहायता से उत्पादों की डिज़ाइन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और डिजिटल मार्केटिंग को किस प्रकार उन्नत किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त ई-कॉमर्स, उद्यमिता, निर्यात, वित्तीय सहायता और केंद्र व राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की भी जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण केंद्र की उपलब्धियाँ
कार्यक्रम में उपस्थित मैनेजिंग डायरेक्टर विनोद ने बताया, 'प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के लाभार्थियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए यह प्रशिक्षण आयोजित किया गया है। बुरहानपुर प्रशिक्षण केंद्र में अब तक 3,207 लाभार्थियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जबकि लक्ष्य 3,300 लोगों का था।' उन्होंने दावा किया कि यह केंद्र पूरे मध्य प्रदेश में प्रथम स्थान पर है और लगभग सभी निर्धारित लक्ष्य पूरे कर लिए गए हैं।
महिला लाभार्थियों के अनुभव
योजना से लाभान्वित महिलाओं ने भी अपने अनुभव साझा किए। लाभार्थी ज्योति ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान उन्हें आर्थिक सहायता मिली और बाद में ₹1 लाख का ऋण स्वीकृत हुआ, जिससे वह अपने व्यवसाय का विस्तार करने में सक्षम हो रही हैं। एक अन्य लाभार्थी सीमा चौधरी ने कहा कि इस योजना ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है और पारंपरिक कारीगरों को नई पहचान मिल रही है।
आम जनता और कारीगरों पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब देश में पारंपरिक शिल्प क्षेत्र असंगठित और डिजिटल अर्थव्यवस्था से कटा हुआ रहा है। PM विश्वकर्मा योजना सितंबर 2023 में शुरू की गई थी और इसका उद्देश्य बढ़ई, लोहार, कुम्हार, दर्जी जैसे पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े कारीगरों को औपचारिक वित्तीय और तकनीकी ढाँचे से जोड़ना है। बुरहानपुर, जो ऐतिहासिक रूप से अपनी बुनकरी और हस्तशिल्प परंपरा के लिए जाना जाता है, इस योजना का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है।
आगे की राह
गौरतलब है कि बुरहानपुर प्रशिक्षण केंद्र अपने 3,300 के लक्ष्य के सापेक्ष 97% से अधिक उपलब्धि हासिल कर चुका है। आने वाले समय में शेष लाभार्थियों को प्रशिक्षित कर लक्ष्य पूरा करने की योजना है। अधिकारियों के अनुसार, डिजिटल और AI प्रशिक्षण के इस प्रयास से कारीगरों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों तक पहुँच बनाने में मदद मिलेगी।