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पश्चिम बंगाल में पीएम विश्वकर्मा योजना लागू होगी, केंद्र-राज्य बैठक में कार्यान्वयन पर सहमति

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पश्चिम बंगाल में पीएम विश्वकर्मा योजना लागू होगी, केंद्र-राज्य बैठक में कार्यान्वयन पर सहमति

सारांश

पश्चिम बंगाल में पीएम विश्वकर्मा योजना लागू होने की राह साफ हो रही है — केंद्र के वरिष्ठ अधिकारी और राज्य के मुख्य सचिव की बैठक के बाद अब राज्य-स्तरीय समितियाँ गठित हो चुकी हैं। ₹13,000 करोड़ की यह केंद्रीय योजना 18 पारंपरिक व्यवसायों के कारीगरों को ऋण, प्रशिक्षण और बाज़ार पहुँच देगी।

मुख्य बातें

22 मई 2026 को केंद्रीय MSME मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव डॉ.
रजनीश ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल से मुलाकात कर पीएम विश्वकर्मा योजना के क्रियान्वयन पर चर्चा की।
पीएम विश्वकर्मा योजना 17 सितंबर 2023 को शुरू हुई थी; इसका परिव्यय ₹13,000 करोड़ और अवधि 2027-28 तक है।
पश्चिम बंगाल ने हाल ही में राज्य निगरानी समिति और जिला कार्यान्वयन समितियों के गठन की अधिसूचना जारी की।
योजना में 18 पारंपरिक व्यवसायों के कारीगरों को मान्यता, कौशल प्रशिक्षण, संपार्श्विक-मुक्त ऋण और डिजिटल प्रोत्साहन मिलेगा।
योजना का लक्ष्य कारीगरों को घरेलू और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़ना है।

पश्चिम बंगाल में पीएम विश्वकर्मा योजना के क्रियान्वयन को गति देने के लिए 22 मई 2026 को केंद्र और राज्य सरकार के बीच उच्चस्तरीय बैठक हुई। लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) के अतिरिक्त सचिव एवं विकास आयुक्त डॉ. रजनीश ने कोलकाता में पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल से मुलाकात की और राज्य में इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने की रूपरेखा पर विचार-विमर्श किया। इस बैठक को इस लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि पश्चिम बंगाल ने हाल ही में योजना की निगरानी के लिए राज्य और जिला स्तरीय समितियों के गठन की अधिसूचना जारी की है।

योजना की पृष्ठभूमि और वित्तीय ढाँचा

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना को केंद्र सरकार ने 17 सितंबर 2023 को लॉन्च किया था। यह एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है जो पूरी तरह भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित है। इसका प्रारंभिक परिव्यय ₹13,000 करोड़ है और यह योजना आरंभ से 2027-28 तक पाँच वर्षों के लिए लागू है। गौरतलब है कि यह योजना देश के पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को औपचारिक आर्थिक तंत्र से जोड़ने की दिशा में केंद्र सरकार का एक महत्वाकांक्षी प्रयास है।

बैठक में किन मुद्दों पर हुई चर्चा

बैठक में मुख्य रूप से योजना के कार्यान्वयन में तेजी लाने, लाभार्थियों की सटीक पहचान सुनिश्चित करने और कौशल विकास कार्यक्रमों को मजबूत करने पर चर्चा हुई। इसके अलावा पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों तक योजना की व्यापक पहुँच बनाने की रणनीति पर भी विचार किया गया। राज्य में अन्य MSME योजनाओं के समन्वित क्रियान्वयन और संस्थागत समर्थन के ज़रिए MSME पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने के उपायों पर भी विमर्श हुआ।

योजना के प्रमुख लाभ और लक्षित वर्ग

इस योजना के अंतर्गत शुरुआत में 18 व्यवसायों से जुड़े कारीगरों और शिल्पकारों को लाभ दिया जाएगा। योजना का उद्देश्य इन्हें 'विश्वकर्मा' के रूप में आधिकारिक मान्यता दिलाना है, ताकि वे सभी सरकारी लाभों के पात्र बन सकें। लाभार्थियों को संपार्श्विक-मुक्त ऋण तक आसान पहुँच और ब्याज छूट के माध्यम से ऋण की लागत में कमी का लाभ मिलेगा। साथ ही कौशल उन्नयन प्रशिक्षण, डिजिटल लेनदेन के लिए प्रोत्साहन और ब्रांड प्रचार व बाज़ार संपर्क के लिए एक समर्पित मंच भी उपलब्ध कराया जाएगा।

वैश्विक और घरेलू मूल्य श्रृंखला से जुड़ाव

योजना का दीर्घकालिक लक्ष्य कारीगरों के उत्पादों और सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करते हुए उन्हें घरेलू और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़ना है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में असंगठित क्षेत्र के कुशल कारीगरों को औपचारिक बाज़ार तक पहुँच दिलाना एक बड़ी नीतिगत प्राथमिकता बनी हुई है।

आगे क्या होगा

पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा राज्य निगरानी समिति और जिला कार्यान्वयन समितियों के गठन की अधिसूचना जारी होने के बाद अब क्रियान्वयन की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। केंद्र और राज्य के बीच बैठकों का यह दौर जारी है, और आने वाले हफ्तों में जमीनी स्तर पर लाभार्थियों की पहचान शुरू होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

खासकर तब जब राजनीतिक समीकरण अलग हों। समितियों का गठन एक प्रशासनिक कदम है, लेकिन असली परीक्षा जमीनी स्तर पर लाभार्थियों की पहचान और ऋण वितरण की गति से होगी। देश के अन्य राज्यों में इस योजना के क्रियान्वयन के अनुभव बताते हैं कि डिजिटल पंजीकरण और बैंकिंग पहुँच की बाधाएँ अक्सर पात्र कारीगरों को योजना से वंचित कर देती हैं — बंगाल में इन चुनौतियों पर विशेष ध्यान देना होगा।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम विश्वकर्मा योजना क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
पीएम विश्वकर्मा योजना केंद्र सरकार की ₹13,000 करोड़ की योजना है जो 17 सितंबर 2023 को शुरू हुई और 2027-28 तक चलेगी। इसका उद्देश्य 18 पारंपरिक व्यवसायों के कारीगरों और शिल्पकारों को मान्यता, कौशल प्रशिक्षण, संपार्श्विक-मुक्त ऋण और बाज़ार पहुँच देकर उन्हें घरेलू और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़ना है।
पश्चिम बंगाल में यह योजना कब से लागू होगी?
राज्य सरकार ने हाल ही में राज्य निगरानी समिति और जिला कार्यान्वयन समितियों के गठन की अधिसूचना जारी की है। 22 मई 2026 की केंद्र-राज्य बैठक के बाद आने वाले हफ्तों में जमीनी स्तर पर लाभार्थियों की पहचान और क्रियान्वयन शुरू होने की उम्मीद है।
इस योजना से किन कारीगरों को लाभ मिलेगा?
योजना में शुरुआत में 18 पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े कारीगरों और शिल्पकारों को शामिल किया गया है। इन्हें 'विश्वकर्मा' के रूप में आधिकारिक मान्यता मिलेगी जिससे वे योजना के सभी लाभ — ऋण, प्रशिक्षण, डिजिटल प्रोत्साहन और ब्रांड प्रचार — पाने के पात्र बनेंगे।
योजना के तहत कारीगरों को कौन-कौन से वित्तीय लाभ मिलेंगे?
लाभार्थियों को संपार्श्विक-मुक्त ऋण तक आसान पहुँच और ब्याज छूट के माध्यम से ऋण की लागत में कमी का लाभ मिलेगा। इसके अलावा डिजिटल लेनदेन के लिए प्रोत्साहन और बाज़ार संपर्क के लिए एक समर्पित मंच भी प्रदान किया जाएगा।
22 मई की केंद्र-राज्य बैठक में क्या निर्णय हुए?
MSME मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव डॉ. रजनीश और पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल के बीच हुई बैठक में योजना के कार्यान्वयन में तेजी, लाभार्थियों की सटीक पहचान, कौशल विकास को मजबूत करने और राज्य में अन्य MSME योजनाओं के बेहतर समन्वय पर सहमति बनी।
राष्ट्र प्रेस
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