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पीएम-सेतु योजना: पश्चिम बंगाल में ₹5,000–6,000 करोड़ का निवेश, हजारों युवाओं को मिलेगा कौशल प्रशिक्षण

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पीएम-सेतु योजना: पश्चिम बंगाल में ₹5,000–6,000 करोड़ का निवेश, हजारों युवाओं को मिलेगा कौशल प्रशिक्षण

सारांश

पश्चिम बंगाल में पीएम-सेतु योजना के तहत अगले पाँच वर्षों में ₹5,000–6,000 करोड़ का निवेश होगा। मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने कहा कि आईटीआई संस्थानों के आधुनिकीकरण और उद्योग-आधारित प्रशिक्षण से हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा — लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी।

मुख्य बातें

मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने 12 जून 2026 को पीएम-सेतु योजना को पश्चिम बंगाल के युवाओं के लिए ऐतिहासिक अवसर बताया।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2024-25 बजट में देशभर के आईटीआई के लिए ₹60,000 करोड़ की घोषणा की थी।
पश्चिम बंगाल में अगले पाँच वर्षों में ₹5,000–6,000 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है।
योजना केंद्र सरकार, राज्य सरकार और औद्योगिक संगठनों के बीच त्रिपक्षीय समन्वय पर आधारित होगी।
मंत्री ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती राज्य सरकार ने 'प्रधानमंत्री' नाम के कारण इस योजना में भागीदारी नहीं की।

पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने 12 जून 2026 को कोलकाता में कहा कि प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन (पीएम-सेतु) योजना राज्य के युवाओं के लिए कौशल विकास और रोजगार की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होगी। उन्होंने बताया कि अगले पाँच वर्षों में इस योजना के तहत पश्चिम बंगाल में ₹5,000 से ₹6,000 करोड़ का निवेश किया जाएगा।

पीएम-सेतु योजना क्या है

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2024-25 के केंद्रीय बजट में देशभर के हजारों औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के विकास और उन्नयन के लिए ₹60,000 करोड़ की महत्वाकांक्षी परियोजना की घोषणा की थी, जिसे पीएम-सेतु नाम दिया गया। इस योजना का मूल उद्देश्य आईटीआई संस्थानों का आधुनिकीकरण करना, उद्योग-अनुकूल पाठ्यक्रम विकसित करना और प्रशिक्षण के बाद युवाओं को रोजगार से जोड़ना है।

पश्चिम बंगाल में योजना का क्रियान्वयन

मंत्री चट्टोपाध्याय ने कहा कि राज्य में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार बनने के बाद इस योजना को लागू करने का निर्णय लिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि योजना के नाम में 'प्रधानमंत्री' शब्द जुड़े होने के कारण पूर्ववर्ती राज्य सरकार ने इस परियोजना में सक्रिय भागीदारी नहीं निभाई। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में युवा बेरोजगारी एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बनी हुई है।

निवेश और बुनियादी ढाँचे का विकास

चट्टोपाध्याय के अनुसार, ₹5,000 से ₹6,000 करोड़ के प्रस्तावित निवेश से आईटीआई संस्थानों में आधुनिक तकनीक, उन्नत प्रशिक्षण सुविधाएँ और उद्योग-आधारित पाठ्यक्रम विकसित किए जाएंगे। यह योजना केंद्र सरकार, राज्य सरकार और औद्योगिक संगठनों के बीच त्रिपक्षीय समन्वय के आधार पर काम करेगी, जिससे प्रशिक्षण और रोजगार के बीच की खाई को पाटा जा सके।

युवाओं पर असर

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में हजारों युवा हर वर्ष तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा की तलाश में हैं। इस योजना के तहत रोजगारोन्मुखी शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराने से उनकी रोजगार क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। मंत्री ने कहा कि प्रशिक्षण के बाद रोजगार सुनिश्चित करना इस पहल का केंद्रीय लक्ष्य है।

आगे क्या होगा

योजना के तहत निवेश और क्रियान्वयन की विस्तृत रूपरेखा आने वाले महीनों में केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय से तैयार होने की संभावना है। यदि यह पहल अपेक्षित गति से आगे बढ़ती है, तो पश्चिम बंगाल के आईटीआई संस्थान अगले पाँच वर्षों में कौशल विकास के प्रमुख केंद्र बन सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ की राष्ट्रीय परियोजना में से बंगाल को ₹5,000–6,000 करोड़ का आवंटन कैसे और किन मानदंडों पर होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। देश में आईटीआई-आधारित कौशल योजनाओं का इतिहास बताता है कि प्रशिक्षण और वास्तविक रोजगार के बीच की खाई अक्सर बड़ी रहती है — इसलिए जब तक रोजगार सत्यापन का ठोस तंत्र नहीं बनता, यह योजना भी कागजी आँकड़ों तक सीमित रहने का जोखिम उठाती है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम-सेतु योजना क्या है?
पीएम-सेतु यानी प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन योजना केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसकी घोषणा 2024-25 के केंद्रीय बजट में ₹60,000 करोड़ के परिव्यय के साथ की गई थी। इसका उद्देश्य देशभर के आईटीआई संस्थानों का आधुनिकीकरण कर युवाओं को उद्योग-अनुकूल कौशल प्रशिक्षण और रोजगार उपलब्ध कराना है।
पश्चिम बंगाल में पीएम-सेतु के तहत कितना निवेश होगा?
मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय के अनुसार, अगले पाँच वर्षों में पश्चिम बंगाल में पीएम-सेतु के तहत ₹5,000 से ₹6,000 करोड़ का निवेश किया जाएगा। यह निवेश आईटीआई संस्थानों में आधुनिक तकनीक, उन्नत प्रशिक्षण सुविधाएँ और उद्योग-आधारित पाठ्यक्रम विकसित करने पर खर्च होगा।
पश्चिम बंगाल में पहले यह योजना क्यों लागू नहीं हुई?
मंत्री चट्टोपाध्याय ने आरोप लगाया कि योजना के नाम में 'प्रधानमंत्री' शब्द जुड़े होने के कारण पूर्ववर्ती राज्य सरकार ने इसमें सक्रिय भागीदारी नहीं निभाई। उनके अनुसार, राज्य में नई सरकार बनने के बाद इस योजना को अपनाने का निर्णय लिया गया।
इस योजना से पश्चिम बंगाल के युवाओं को क्या फायदा होगा?
योजना के तहत आईटीआई संस्थानों में रोजगारोन्मुखी शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण मिलेगा, जिससे हजारों युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ेगी। केंद्र, राज्य और औद्योगिक संगठनों के समन्वय से प्रशिक्षण के बाद रोजगार सुनिश्चित करने की भी योजना है।
पीएम-सेतु योजना कब से लागू होगी?
योजना की राष्ट्रीय घोषणा 2024-25 के केंद्रीय बजट में हो चुकी है। पश्चिम बंगाल में क्रियान्वयन की विस्तृत रूपरेखा आने वाले महीनों में केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय से तैयार होने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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