पुरी रथयात्रा 2025: तीनों रथों के सामने ओडिसी कलाकारों का भावपूर्ण नृत्य, बारिश में भी जारी रही भक्ति
सारांश
मुख्य बातें
पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर परिसर में 16 जुलाई को विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथयात्रा के शुभारंभ से पूर्व ओडिसी नृत्य कलाकारों ने भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के तीनों रथों के समक्ष मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किए। पारंपरिक वेशभूषा से सुसज्जित इन कलाकारों ने अपनी कला के माध्यम से महाप्रभु के प्रति गहरी श्रद्धा और समर्पण का प्रदर्शन किया।
भक्ति और कला का संगम
एक नृत्य कलाकार ने कहा कि वर्ष में एक बार भगवान जगन्नाथ स्वयं मंदिर से बाहर निकलकर अपने भक्तों के बीच आते हैं — ऐसे पावन अवसर पर उनके सामने नृत्य करने का सौभाग्य किसी दैवीय आशीर्वाद से कम नहीं। उन्होंने कहा कि महाप्रभु की कृपा से ही यह संभव हो पाता है और उनके समक्ष प्रस्तुति देना उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान है।
लिंगराज कला निकेतन की परंपरा
लिंगराज कला निकेतन से जुड़ी एक कलाकार ने बताया कि वे हर वर्ष भगवान की सेवा के लिए पुरी आती हैं। उन्होंने कहा कि रथयात्रा, बहुड़ा यात्रा और नीलाद्री बीजे जैसे सभी प्रमुख अवसरों पर वे भगवान जगन्नाथ के समक्ष ओडिसी नृत्य प्रस्तुत करती हैं। उनके अनुसार ओडिसी नृत्य की परंपरा सदियों से भगवान जगन्नाथ की भक्ति से जुड़ी रही है, इसलिए उनके सामने प्रस्तुति देना उनके लिए आध्यात्मिक आनंद का विषय है।
बारिश में भी नहीं रुकी प्रस्तुति
एक नृत्यांगना ने बताया कि जब उन्होंने प्रस्तुति शुरू की, उस समय तेज़ बारिश हो रही थी — फिर भी नृत्य जारी रहा, क्योंकि भगवान जगन्नाथ को नृत्य अत्यंत प्रिय है। एक अन्य कलाकार ने हल्की बारिश के बीच प्रस्तुति देने के अनुभव को विशेष बताते हुए बारिश की तुलना मोर के नृत्य से की — जैसे वर्षा से पहले मोर अपने पंख फैलाकर नाचता है, वैसे ही वे भी महाप्रभु के स्वागत में नृत्यरत थीं। एक अन्य कलाकार ने इस वर्षा को भगवान इंद्र का आशीर्वाद बताते हुए कहा कि यह बारिश धरती को रथयात्रा से पहले पवित्र करने के लिए हो रही है।
कलाकारों के भावुक अनुभव
एक युवा कलाकार ने भावुक होकर कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि इस बार पुरी आ पाएंगी, लेकिन एक मित्र की वजह से इस दिव्य अवसर का हिस्सा बनने का सौभाग्य मिला। उनकी सबसे बड़ी इच्छा भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने की है। एक अन्य कलाकार ने इस अनुभव को चमत्कार बताया — उनकी पुरी आने की कोई पूर्व योजना नहीं थी, लेकिन महाप्रभु की इच्छा से वे यहाँ पहुँच गए।
महाप्रभु के रथारोहण की प्रतीक्षा
एक वरिष्ठ कलाकार ने कहा कि जब भगवान जगन्नाथ अपने रथ पर विराजमान होकर बाहर आते हैं और उनके सिर पर सजा 'तहिया' लय में झूमता है, तब ऐसा प्रतीत होता है मानो स्वयं महाप्रभु नृत्य कर रहे हों। सभी कलाकार उसी दिव्य क्षण की प्रतीक्षा में थे, जब भगवान के साथ भक्ति और आनंद का यह उत्सव अपने चरम पर पहुँचेगा।