16 जुलाई 2026
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पुरी रथयात्रा 2025: तीनों रथों के सामने ओडिसी कलाकारों का भावपूर्ण नृत्य, बारिश में भी जारी रही भक्ति

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पुरी रथयात्रा 2025: तीनों रथों के सामने ओडिसी कलाकारों का भावपूर्ण नृत्य, बारिश में भी जारी रही भक्ति

सारांश

पुरी में रथयात्रा से पहले ओडिसी कलाकारों ने तीनों रथों के सामने भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत किया — तेज़ बारिश भी उनकी भक्ति नहीं रोक सकी। लिंगराज कला निकेतन सहित कई कलाकारों ने इस दिव्य अनुभव को अपने जीवन का सबसे बड़ा सम्मान बताया।

मुख्य बातें

16 जुलाई को पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर परिसर में रथयात्रा से पूर्व ओडिसी नृत्य प्रस्तुतियाँ आयोजित हुईं।
कलाकारों ने भगवान जगन्नाथ , भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के तीनों रथों के सामने नृत्य किया।
लिंगराज कला निकेतन से जुड़ी कलाकार हर वर्ष रथयात्रा , बहुड़ा यात्रा और नीलाद्री बीजे पर प्रस्तुति देती हैं।
तेज़ बारिश के बावजूद कलाकारों ने नृत्य जारी रखा; एक कलाकार ने बारिश को भगवान इंद्र का आशीर्वाद बताया।
वरिष्ठ कलाकार के अनुसार रथ पर 'तहिया' का लय में झूमना ऐसा प्रतीत होता है मानो स्वयं महाप्रभु नृत्य कर रहे हों।

पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर परिसर में 16 जुलाई को विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथयात्रा के शुभारंभ से पूर्व ओडिसी नृत्य कलाकारों ने भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के तीनों रथों के समक्ष मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किए। पारंपरिक वेशभूषा से सुसज्जित इन कलाकारों ने अपनी कला के माध्यम से महाप्रभु के प्रति गहरी श्रद्धा और समर्पण का प्रदर्शन किया।

भक्ति और कला का संगम

एक नृत्य कलाकार ने कहा कि वर्ष में एक बार भगवान जगन्नाथ स्वयं मंदिर से बाहर निकलकर अपने भक्तों के बीच आते हैं — ऐसे पावन अवसर पर उनके सामने नृत्य करने का सौभाग्य किसी दैवीय आशीर्वाद से कम नहीं। उन्होंने कहा कि महाप्रभु की कृपा से ही यह संभव हो पाता है और उनके समक्ष प्रस्तुति देना उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान है।

लिंगराज कला निकेतन की परंपरा

लिंगराज कला निकेतन से जुड़ी एक कलाकार ने बताया कि वे हर वर्ष भगवान की सेवा के लिए पुरी आती हैं। उन्होंने कहा कि रथयात्रा, बहुड़ा यात्रा और नीलाद्री बीजे जैसे सभी प्रमुख अवसरों पर वे भगवान जगन्नाथ के समक्ष ओडिसी नृत्य प्रस्तुत करती हैं। उनके अनुसार ओडिसी नृत्य की परंपरा सदियों से भगवान जगन्नाथ की भक्ति से जुड़ी रही है, इसलिए उनके सामने प्रस्तुति देना उनके लिए आध्यात्मिक आनंद का विषय है।

बारिश में भी नहीं रुकी प्रस्तुति

एक नृत्यांगना ने बताया कि जब उन्होंने प्रस्तुति शुरू की, उस समय तेज़ बारिश हो रही थी — फिर भी नृत्य जारी रहा, क्योंकि भगवान जगन्नाथ को नृत्य अत्यंत प्रिय है। एक अन्य कलाकार ने हल्की बारिश के बीच प्रस्तुति देने के अनुभव को विशेष बताते हुए बारिश की तुलना मोर के नृत्य से की — जैसे वर्षा से पहले मोर अपने पंख फैलाकर नाचता है, वैसे ही वे भी महाप्रभु के स्वागत में नृत्यरत थीं। एक अन्य कलाकार ने इस वर्षा को भगवान इंद्र का आशीर्वाद बताते हुए कहा कि यह बारिश धरती को रथयात्रा से पहले पवित्र करने के लिए हो रही है।

कलाकारों के भावुक अनुभव

एक युवा कलाकार ने भावुक होकर कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि इस बार पुरी आ पाएंगी, लेकिन एक मित्र की वजह से इस दिव्य अवसर का हिस्सा बनने का सौभाग्य मिला। उनकी सबसे बड़ी इच्छा भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने की है। एक अन्य कलाकार ने इस अनुभव को चमत्कार बताया — उनकी पुरी आने की कोई पूर्व योजना नहीं थी, लेकिन महाप्रभु की इच्छा से वे यहाँ पहुँच गए।

महाप्रभु के रथारोहण की प्रतीक्षा

एक वरिष्ठ कलाकार ने कहा कि जब भगवान जगन्नाथ अपने रथ पर विराजमान होकर बाहर आते हैं और उनके सिर पर सजा 'तहिया' लय में झूमता है, तब ऐसा प्रतीत होता है मानो स्वयं महाप्रभु नृत्य कर रहे हों। सभी कलाकार उसी दिव्य क्षण की प्रतीक्षा में थे, जब भगवान के साथ भक्ति और आनंद का यह उत्सव अपने चरम पर पहुँचेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि ओडिसी नृत्य जैसी सदियों पुरानी कला परंपराओं का जीवंत मंच भी है — यह वह संगम है जहाँ आस्था और शास्त्रीय कला एक-दूसरे को पोषित करती हैं। लिंगराज कला निकेतन जैसी संस्थाओं का वर्षों से इस परंपरा को निभाना यह रेखांकित करता है कि मंदिर-केंद्रित कला का यह पारिस्थितिकी तंत्र अभी भी जीवित और सक्रिय है। बारिश में भी नृत्य जारी रखने की कलाकारों की भावना यह दिखाती है कि यह प्रस्तुति उनके लिए व्यावसायिक नहीं, आध्यात्मिक दायित्व है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर रथयात्रा की भीड़ और भव्यता पर केंद्रित रहती है — इन कलाकारों की कहानी उस मानवीय समर्पण को सामने लाती है जो इस उत्सव की आत्मा है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुरी रथयात्रा से पहले ओडिसी नृत्य क्यों प्रस्तुत किया जाता है?
ओडिसी नृत्य की परंपरा सदियों से भगवान जगन्नाथ की भक्ति से जुड़ी रही है। रथयात्रा, बहुड़ा यात्रा और नीलाद्री बीजे जैसे प्रमुख अवसरों पर कलाकार महाप्रभु के समक्ष नृत्य प्रस्तुत कर अपनी श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करते हैं।
16 जुलाई को पुरी में किन रथों के सामने नृत्य प्रस्तुत किया गया?
16 जुलाई को श्री जगन्नाथ मंदिर परिसर में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा — तीनों के रथों के सामने ओडिसी नृत्य प्रस्तुत किया गया। कलाकार पारंपरिक वेशभूषा में सुसज्जित थे।
क्या बारिश के कारण नृत्य प्रस्तुति रोकी गई?
नहीं, बारिश के बावजूद कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति जारी रखी। एक नृत्यांगना ने बताया कि भगवान जगन्नाथ को नृत्य प्रिय है, इसलिए तेज़ बारिश में भी प्रस्तुति नहीं रोकी। एक अन्य कलाकार ने इस वर्षा को भगवान इंद्र का आशीर्वाद बताया।
लिंगराज कला निकेतन का रथयात्रा से क्या संबंध है?
लिंगराज कला निकेतन से जुड़ी कलाकार हर वर्ष भगवान जगन्नाथ की सेवा के लिए पुरी आती हैं और रथयात्रा, बहुड़ा यात्रा तथा नीलाद्री बीजे जैसे अवसरों पर ओडिसी नृत्य प्रस्तुत करती हैं। उनके लिए यह आध्यात्मिक सेवा की निरंतर परंपरा है।
'तहिया' क्या है और इसका रथयात्रा में क्या महत्व है?
'तहिया' भगवान जगन्नाथ के सिर पर सजाया जाने वाला पारंपरिक आभूषण है। वरिष्ठ कलाकारों के अनुसार जब रथ पर विराजमान भगवान का 'तहिया' लय में झूमता है, तो ऐसा प्रतीत होता है मानो स्वयं महाप्रभु नृत्य कर रहे हों — यही क्षण भक्तों और कलाकारों के लिए सर्वोच्च आनंद का होता है।
राष्ट्र प्रेस
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