पुरी रथ यात्रा 2025: दूसरे दिन हजारों श्रद्धालुओं ने किए भगवान जगन्नाथ के दर्शन, भक्तों ने कहा — 'शब्दों से परे है यह अनुभव'
सारांश
मुख्य बातें
पुरी (ओडिशा) में भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथ यात्रा का दूसरा दिन — शुक्रवार, 18 जुलाई — पूरे भक्तिभाव और आस्था के साथ संपन्न हुआ। गुरुवार, 17 जुलाई को आरंभ हुई इस भव्य यात्रा के दूसरे दिन भगवान जगन्नाथ के रथ पर विधि-विधान से आरती दर्शन आयोजित किए गए, जिसमें देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे। पूरे पुरी नगर में भक्तिमय वातावरण छाया रहा।
श्रद्धालुओं का उमड़ा जनसैलाब
रथ यात्रा में सम्मिलित होने के लिए देश के कोने-कोने से भक्तजन पुरी पहुँचे। पहली बार इस पावन यात्रा में शामिल हुए एक श्रद्धालु ने कहा, 'मैं पहली बार रथ यात्रा में आया हूँ, और यह अनुभव अद्भुत है। मैं पिछले दो दिनों से यहाँ हूँ और आज वापस लौटूँगा। पहली बार यहाँ आकर मन को अपार शांति मिली है। यहाँ बिताया हर पल मेरे लिए बेहद खास रहा।'
भक्तों की आस्था — 'शब्दों में नहीं बताया जा सकता'
एक अन्य श्रद्धालु ने अपनी भावनाएँ व्यक्त करते हुए कहा, 'यह अनुभव इतना अद्भुत है कि इसे शब्दों में बयाँ नहीं किया जा सकता। हम परसों से ही यहाँ हैं क्योंकि हम इस पावन पर्व का हिस्सा बनना चाहते थे। यह सब भगवान जगन्नाथ की कृपा है।' एक अन्य भक्त ने कहा, 'इससे बड़ा सुख कोई नहीं हो सकता। स्वयं भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों को दर्शन देने बाहर आए हैं। गुरुवार को हमें मंदिर में प्रवेश कर प्रभु के बाहर आने का दिव्य दृश्य देखने का सौभाग्य मिला। ऐसा लगा मानो पूरा ब्रह्मांड उनके दर्शन की प्रतीक्षा कर रहा हो।'
बारिश ने बढ़ाई दिव्यता, आँखों से बहे खुशी के आँसू
भक्तों ने बताया कि इस पावन अवसर पर हुई वर्षा ने आयोजन को और भी अलौकिक बना दिया — जैसे स्वयं प्रकृति ने इस पल को आशीर्वाद दिया हो। पहली बार पुरी पहुँचे एक श्रद्धालु ने कहा, 'इस अनुभव को शब्दों में नहीं बताया जा सकता। इसे समझने के लिए यहाँ आना और इस माहौल को महसूस करना जरूरी है। भगवान जगन्नाथ बिना किसी भेदभाव के सभी भक्तों को दर्शन देते हैं। पहली बार प्रभु के दर्शन कर मेरी आँखों से खुशी के आँसू निकल आए।'
आस्था, भक्ति और आध्यात्म का संगम
भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा प्रतिवर्ष पुरी में आयोजित होने वाला विश्व-प्रसिद्ध धार्मिक महापर्व है, जिसमें लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से सम्मिलित होते हैं। यह यात्रा आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक आनंद का अनूठा संगम है, जो सभी वर्गों और समुदायों के भक्तों को एक सूत्र में पिरोती है। आने वाले दिनों में यह यात्रा अपने पारंपरिक क्रम में जारी रहेगी और श्रद्धालुओं का आगमन अपेक्षित है।