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पुरी रथ यात्रा 2025: मूसलाधार बारिश में भी लाखों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था, 'जय जगन्नाथ' से गूंजा बड़ा डंडा

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पुरी रथ यात्रा 2025: मूसलाधार बारिश में भी लाखों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था, 'जय जगन्नाथ' से गूंजा बड़ा डंडा

सारांश

मूसलाधार बारिश भी पुरी के बड़ा डंडा पर उमड़े लाखों श्रद्धालुओं की आस्था को नहीं डिगा सकी। 12वीं सदी के जगन्नाथ मंदिर से रथों तक निकला भव्य जुलूस, शंकराचार्य की पूजा और राजा गजपति की सोने की झाड़ू से रस्मी सफाई — सदियों पुरानी परंपरा एक बार फिर जीवंत हुई।

मुख्य बातें

16 जुलाई को पुरी में विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा का आगाज़ हुआ; मूसलाधार बारिश के बावजूद लाखों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को 12वीं सदी के जगन्नाथ मंदिर से सजाए गए रथों तक भव्य जुलूस में ले जाया गया।
पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती और गजपति महाराजा दिव्य सिंह देव ने पारंपरिक पूजा व 'छेरा पहरा' अनुष्ठान संपन्न किया।
अनुष्ठान पूरे होने में दो घंटे से अधिक की देरी हुई।
सुरक्षा के लिए 13,000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात; 19 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी निगरानी में; भारतीय नौसेना व तटरक्षक बल भी अलर्ट पर।
देवी-देवता अगले नौ दिनों तक गुंडिचा मंदिर में विराजेंगे।

ओडिशा के पवित्र तीर्थ नगर पुरी में गुरुवार, 16 जुलाई को विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा का आगाज़ हुआ, जहाँ मूसलाधार बारिश भी लाखों श्रद्धालुओं की भक्ति और उत्साह पर पानी नहीं फेर सकी। बड़ा डंडा (ग्रैंड रोड) पर उमड़े भक्त छातों की कतारों के बीच 'जय जगन्नाथ' और 'हरि बोल' के गगनभेदी उद्घोष करते हुए पूरी तरह भक्ति में लीन रहे।

मुख्य घटनाक्रम

वार्षिक रथ यात्रा उत्सव तय समय से पहले ही पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ प्रारंभ हुआ। इस क्रम में भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और भगवान बलभद्र को 12वीं सदी के श्री जगन्नाथ मंदिर से उनके भव्य सजाए गए रथों तक एक विशाल जुलूस में ले जाया गया। जुलूस के दौरान घंटा (गोंग), काहली (ट्रम्पेट) और तेलिंगी बाजा जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों की दिव्य ध्वनि वातावरण को भक्तिमय बनाती रही।

वैदिक मंत्रों का उच्चारण करते पुजारियों और पारंपरिक ओडिसी नृत्य प्रस्तुत करने वाले कलाकारों ने देवी-देवताओं का स्वागत किया, जो अब गुंडिचा मंदिर की नौ दिवसीय यात्रा पर निकले हैं।

हालाँकि अनुष्ठान तय समय से पहले आरंभ हुए, गुरुवार को उनके पूरा होने में दो घंटे से अधिक की देरी दर्ज की गई।

धार्मिक अनुष्ठान और परंपरा

अनुष्ठान संपन्न होने के पश्चात पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने अपने शिष्यों के साथ रथों पर विराजमान देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की। इसके उपरांत भगवान जगन्नाथ के प्रथम सेवक माने जाने वाले पुरी के राजा गजपति महाराजा दिव्य सिंह देव ने देवी-देवताओं की पूजा की और पारंपरिक रूप से सोने की झाड़ू से रस्मी सफाई — जिसे 'छेरा पहरा' कहा जाता है — संपन्न की। यह परंपरा सदियों से अटूट रूप से निभाई जाती रही है और इसका धार्मिक महत्व अत्यंत गहरा है।

प्रशासन की तैयारियाँ

जिला प्रशासन और राज्य के आवास एवं शहरी विकास विभाग ने भारी वर्षा के मद्देनज़र शहर के जलभराव वाले क्षेत्रों से पानी की त्वरित निकासी के लिए व्यापक प्रबंध किए। जिला प्रशासन, पुलिस और अन्य विभागों ने मिलकर रथ यात्रा के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए बहुस्तरीय व्यवस्था तैयार की।

सुरक्षा व्यवस्था

उत्सव के दौरान सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतज़ाम किए गए हैं। 13,000 से अधिक पुलिसकर्मियों के साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के जवानों को तैनात किया गया है। तटीय मार्ग से किसी भी अवांछित गतिविधि पर नज़र रखने के लिए भारतीय तटरक्षक बल और भारतीय नौसेना भी पूरी तरह अलर्ट पर हैं। समग्र सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए 19 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है।

आगे क्या

भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा अगले नौ दिनों तक गुंडिचा मंदिर में विराजेंगे, जिसके बाद 'बहुड़ा यात्रा' (वापसी यात्रा) के साथ उत्सव का समापन होगा। यह यात्रा प्रतिवर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं को पुरी की ओर खींचती है और भारत की सांस्कृतिक एकता का जीवंत प्रतीक बनी रहती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 पुलिसकर्मियों की तैनाती और नौसेना-तटरक्षक की सतर्कता यह दर्शाती है कि इस आयोजन की सुरक्षा-जटिलता किसी बड़े राष्ट्रीय कार्यक्रम से कम नहीं। फिर भी, जलभराव और दो घंटे की देरी यह सवाल उठाती है कि क्या बुनियादी ढाँचागत तैयारी श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के अनुरूप है। आस्था की यह अदम्य शक्ति प्रेरणादायक है, लेकिन प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि भक्ति का यह उत्सव सुरक्षित और सुव्यवस्थित भी रहे।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुरी जगन्नाथ रथ यात्रा 2025 कब शुरू हुई?
पुरी में जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई 2025 (गुरुवार) को आरंभ हुई। अनुष्ठान तय समय से पहले शुरू हुए, हालाँकि उनके पूरा होने में दो घंटे से अधिक की देरी हुई।
रथ यात्रा में 'छेरा पहरा' रस्म क्या होती है?
'छेरा पहरा' वह पारंपरिक अनुष्ठान है जिसमें पुरी के राजा गजपति महाराजा सोने की झाड़ू से रथों की रस्मी सफाई करते हैं। यह परंपरा इस भाव का प्रतीक है कि भगवान के सामने राजा भी एक सेवक मात्र है।
रथ यात्रा के दौरान पुरी में सुरक्षा के क्या इंतज़ाम किए गए?
उत्सव के दौरान 13,000 से अधिक पुलिसकर्मियों के साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के जवान तैनात किए गए हैं। 19 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सुरक्षा की निगरानी कर रहे हैं और भारतीय नौसेना तथा तटरक्षक बल तटीय मार्ग पर अलर्ट पर हैं।
भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान कहाँ जाते हैं?
रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा श्री जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर की यात्रा करते हैं और वहाँ नौ दिनों तक विराजते हैं। इसके बाद 'बहुड़ा यात्रा' के साथ उनकी वापसी होती है।
भारी बारिश का रथ यात्रा पर क्या असर पड़ा?
16 जुलाई को हुई मूसलाधार बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह अटूट रहा और वे बड़ा डंडा पर 'जय जगन्नाथ' के नारे लगाते रहे। जिला प्रशासन ने जलभराव से निपटने के लिए व्यापक निकासी व्यवस्था की थी, हालाँकि अनुष्ठानों में दो घंटे से अधिक की देरी दर्ज की गई।
राष्ट्र प्रेस
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