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बालोद में रोज़ाना 50-70 चमगादड़ों की रहस्यमयी मौत, नमूने भोपाल लैब भेजे गए

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बालोद में रोज़ाना 50-70 चमगादड़ों की रहस्यमयी मौत, नमूने भोपाल लैब भेजे गए

सारांश

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में रोज़ाना 50-70 चमगादड़ों की मौत ने प्रशासन को हिला दिया है। वन और पशु चिकित्सा विभाग की संयुक्त टीम जांच में जुटी है, नमूने भोपाल लैब भेजे गए हैं। गर्मी से लेकर संक्रमण तक — असली कारण अभी अज्ञात।

मुख्य बातें

बालोद जिले के दल्लीराजहरा क्षेत्र में पिछले कई दिनों से प्रतिदिन 50 से 70 चमगादड़ मृत मिल रहे हैं।
मृत चमगादड़ों के नमूने भोपाल स्थित आईसीएआर-राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग प्रयोगशाला भेजे गए हैं।
प्रारंभिक आकलन में अत्यधिक गर्मी संभावित कारण, लेकिन संक्रमण या बीमारी की आशंका से इनकार नहीं।
वन विभाग और पशु चिकित्सा विभाग की संयुक्त टीम प्रभावित क्षेत्र की निगरानी कर रही है।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि मृत या बीमार चमगादड़ को न छुएं और तुरंत वन विभाग को सूचित करें।

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के दल्लीराजहरा क्षेत्र में पिछले कई दिनों से प्रतिदिन 50 से 70 चमगादड़ मृत अवस्था में मिल रहे हैं, जिसने वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की चिंता गहरी कर दी है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मृत चमगादड़ों के नमूने जांच के लिए भोपाल स्थित आईसीएआर-राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग प्रयोगशाला भेजे गए हैं।

मुख्य घटनाक्रम

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार दल्लीराजहरा के एक विशेष क्षेत्र में लगातार बड़े पैमाने पर चमगादड़ों की मौतें दर्ज हो रही हैं। मृतकों की संख्या में कोई कमी नहीं आने से वरिष्ठ वन अधिकारियों ने तत्काल जांच के निर्देश दिए और संबंधित विभागों को सतर्क रहने को कहा है।

वन विभाग और पशु चिकित्सा विभाग की संयुक्त टीम प्रभावित क्षेत्र की निरंतर निगरानी कर रही है। टीम उन स्थानों की पहचान कर रही है जहाँ सर्वाधिक मौतें हो रही हैं।

जांच की स्थिति

मृत चमगादड़ों के नमूने एकत्र कर भोपाल स्थित आईसीएआर-राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग प्रयोगशाला भेजे गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि प्रयोगशाला की रिपोर्ट आने के बाद ही मौतों के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी।

प्रारंभिक आकलन में अत्यधिक गर्मी को संभावित कारणों में से एक माना जा रहा है। हालाँकि अधिकारियों ने संक्रमण या किसी बीमारी के प्रकोप की आशंका से भी इनकार नहीं किया है। वैज्ञानिक रिपोर्ट आने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुँचना जल्दबाजी होगी — यह अधिकारियों ने स्पष्ट किया।

सार्वजनिक स्वास्थ्य और सावधानी

प्रशासन ने स्थानीय निवासियों से अपील की है कि वे किसी भी मृत या बीमार चमगादड़ को हाथ न लगाएँ। यदि कहीं ऐसे चमगादड़ दिखें तो तुरंत वन विभाग या संबंधित अधिकारियों को सूचित करें।

गौरतलब है कि चमगादड़ कई ज़ूनोटिक वायरसों के प्राकृतिक वाहक माने जाते हैं, इसीलिए इस प्रकार की सामूहिक मौतें सार्वजनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से भी सतर्कता की माँग करती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

अधिकारियों के अनुसार वन्यजीवों की इतनी बड़ी संख्या में एकाएक मौत को असामान्य घटना माना जा रहा है। सभी संभावित कारणों — गर्मी, संक्रमण, विषाक्तता — को ध्यान में रखते हुए जांच की जा रही है। प्रयोगशाला रिपोर्ट ही आगे की कार्रवाई की दिशा तय करेगी।

आगे क्या होगा

आईसीएआर प्रयोगशाला की रिपोर्ट आने के बाद वन विभाग और प्रशासन आगे की रणनीति तय करेंगे। फिलहाल प्रभावित क्षेत्र में निगरानी जारी है और स्थानीय लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि चमगादड़ निपाह, रेबीज़ और कोरोनावायरस जैसे ज़ूनोटिक रोगों के प्रमुख वाहक माने जाते हैं। प्रशासन की सतर्कता और नमूने भेजने की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन रिपोर्ट में देरी और पारदर्शिता की कमी स्थानीय जनता में अनावश्यक भय पैदा कर सकती है। यह भी विचारणीय है कि भीषण गर्मी के इस दौर में अन्य वन्यजीव प्रजातियों पर पड़ने वाले असर की व्यापक निगरानी अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बालोद में चमगादड़ों की मौत क्यों हो रही है?
अभी तक मौतों का सटीक कारण अज्ञात है। प्रारंभिक आकलन में अत्यधिक गर्मी को एक संभावित कारण माना जा रहा है, लेकिन संक्रमण या बीमारी के प्रकोप की आशंका से भी इनकार नहीं किया गया है। आईसीएआर प्रयोगशाला की रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट होगा।
नमूने किस प्रयोगशाला में भेजे गए हैं?
मृत चमगादड़ों के नमूने भोपाल स्थित आईसीएआर-राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग प्रयोगशाला भेजे गए हैं। यह देश की सर्वोच्च पशु रोग जांच संस्थाओं में से एक है।
स्थानीय लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
प्रशासन ने अपील की है कि कोई भी मृत या बीमार चमगादड़ को हाथ न लगाए। ऐसा दिखने पर तुरंत वन विभाग या संबंधित अधिकारियों को सूचित करें। सतर्कता से किसी भी संभावित संक्रमण के खतरे को रोका जा सकता है।
दल्लीराजहरा में प्रतिदिन कितने चमगादड़ मर रहे हैं?
अधिकारियों के अनुसार पिछले कई दिनों से दल्लीराजहरा क्षेत्र में प्रतिदिन 50 से 70 चमगादड़ मृत अवस्था में मिल रहे हैं। मृतकों की यह संख्या लगातार बनी रहने से प्रशासन और वन विभाग ने इसे असामान्य घटना माना है।
जांच में कौन-कौन से विभाग शामिल हैं?
वन विभाग और पशु चिकित्सा विभाग की संयुक्त टीम मामले की जांच कर रही है। वरिष्ठ वन अधिकारियों ने तत्काल जांच के निर्देश दिए हैं और प्रभावित क्षेत्र की निरंतर निगरानी जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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