त्राल में कीटनाशक से 20 भेड़ों की मौत, पुलवामा के चरवाहे को भारी नुकसान
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के त्राल इलाके में शुक्रवार, 12 जून को कम से कम 20 भेड़ें संदिग्ध जहरीले हालात में मृत पाई गईं। भेड़ें सीर त्राल निवासी बिलाल अहमद की थीं और घटना के समय उन्हें केहलील इलाके के ऊँचे पहाड़ी चरागाह में ले जाया जा रहा था। मौत की सटीक वजह की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
घटनाक्रम
चरवाहों के अनुसार, भेड़ों के गिरने से कुछ ही देर पहले उन्होंने ऐसी घास चरी थी जिसके बारे में संदेह है कि वह कीटनाशकों से दूषित थी। देखते ही देखते सभी 20 भेड़ें मर गईं, जिससे मालिक बिलाल अहमद को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। स्थानीय प्रशासन को घटना की सूचना दी गई और जाँच की माँग की गई।
पहले भी हो चुकी है ऐसी घटना
यह घटना ऐसे समय में आई है जब दो महीने से भी कम पहले, 26 अप्रैल को, बडगाम जिले के कावूसा के यारीगुंड इलाके में संदिग्ध जहरीले हालात में आठ भेड़ें मर चुकी थीं। गौरतलब है कि यह कश्मीर घाटी में इस प्रकार की दूसरी बड़ी घटना है, जो चरागाहों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।
चरवाहों और पशुपालकों की चिंता
इस घटना से उन सैकड़ों चरवाहों और पशुपालकों में गहरी चिंता फैल गई है जो अपनी आजीविका के लिए मौसमी चरागाह मार्गों पर निर्भर हैं। स्थानीय लोगों ने संबंधित विभागों से आग्रह किया है कि मौत का कारण शीघ्र पता लगाया जाए और प्रभावित चरवाहे बिलाल अहमद को उचित सहायता प्रदान की जाए। पशुपालकों ने माँग की है कि उन क्षेत्रों में रसायनों के उपयोग की गहन जाँच हो जहाँ पशु चरने जाते हैं।
कीटनाशकों का बढ़ता खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि घाटी में फलों के बागों में फंगीसाइड और कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग पर्यावरण के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुका है। ये रसायन खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर रहे हैं और कीटनाशक-छिड़काव वाले सेबों की सुरक्षा पर भी सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों की चेतावनी है कि यदि निकट भविष्य में जैविक खेती को नहीं अपनाया गया तो स्थानीय बागवानी उद्योग के अस्तित्व पर संकट आ सकता है।
आगे क्या होगा
अधिकारियों के अनुसार, पुलिस जाँच जारी है और मृत भेड़ों के नमूनों की जाँच से मौत की असली वजह स्पष्ट होने की उम्मीद है। पशुपालक समुदाय चाहता है कि प्रशासन चरागाह क्षेत्रों में रासायनिक उपयोग की निगरानी के लिए ठोस तंत्र विकसित करे, ताकि भविष्य में इस तरह की क्षति न हो।