31 जुलाई 2026
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त्राल में कीटनाशक से 20 भेड़ों की मौत, पुलवामा के चरवाहे को भारी नुकसान

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त्राल में कीटनाशक से 20 भेड़ों की मौत, पुलवामा के चरवाहे को भारी नुकसान

सारांश

पुलवामा के त्राल में 20 भेड़ों की संदिग्ध कीटनाशक-जनित मौत महज एक अलग घटना नहीं — यह कश्मीर के चरागाहों में रासायनिक प्रदूषण की बढ़ती कड़ी में नई कड़ी है। दो महीने में यह दूसरी बड़ी घटना है, और विशेषज्ञ चेता रहे हैं कि बिना तत्काल कदम उठाए पशुपालन और बागवानी दोनों संकट में पड़ सकते हैं।

मुख्य बातें

पुलवामा जिले के त्राल के केहलील चरागाह में 12 जून को 20 भेड़ें संदिग्ध जहरीले हालात में मृत पाई गईं।
भेड़ें सीर त्राल निवासी बिलाल अहमद की थीं; मौत की आधिकारिक वजह की पुष्टि अभी बाकी है।
चरवाहों के अनुसार भेड़ों ने मरने से पहले कीटनाशक-दूषित घास चरी थी।
26 अप्रैल को बडगाम के यारीगुंड में भी संदिग्ध जहरीले हालात में 8 भेड़ें मर चुकी हैं — दो महीने में दूसरी घटना।
पुलिस ने मामला दर्ज कर जाँच शुरू की; पशुपालकों ने चरागाह क्षेत्रों में रसायन-उपयोग की गहन जाँच की माँग की।
विशेषज्ञों ने चेताया कि जैविक खेती न अपनाई गई तो घाटी का बागवानी उद्योग संकट में पड़ सकता है।

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के त्राल इलाके में शुक्रवार, 12 जून को कम से कम 20 भेड़ें संदिग्ध जहरीले हालात में मृत पाई गईं। भेड़ें सीर त्राल निवासी बिलाल अहमद की थीं और घटना के समय उन्हें केहलील इलाके के ऊँचे पहाड़ी चरागाह में ले जाया जा रहा था। मौत की सटीक वजह की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

घटनाक्रम

चरवाहों के अनुसार, भेड़ों के गिरने से कुछ ही देर पहले उन्होंने ऐसी घास चरी थी जिसके बारे में संदेह है कि वह कीटनाशकों से दूषित थी। देखते ही देखते सभी 20 भेड़ें मर गईं, जिससे मालिक बिलाल अहमद को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। स्थानीय प्रशासन को घटना की सूचना दी गई और जाँच की माँग की गई।

पहले भी हो चुकी है ऐसी घटना

यह घटना ऐसे समय में आई है जब दो महीने से भी कम पहले, 26 अप्रैल को, बडगाम जिले के कावूसा के यारीगुंड इलाके में संदिग्ध जहरीले हालात में आठ भेड़ें मर चुकी थीं। गौरतलब है कि यह कश्मीर घाटी में इस प्रकार की दूसरी बड़ी घटना है, जो चरागाहों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।

चरवाहों और पशुपालकों की चिंता

इस घटना से उन सैकड़ों चरवाहों और पशुपालकों में गहरी चिंता फैल गई है जो अपनी आजीविका के लिए मौसमी चरागाह मार्गों पर निर्भर हैं। स्थानीय लोगों ने संबंधित विभागों से आग्रह किया है कि मौत का कारण शीघ्र पता लगाया जाए और प्रभावित चरवाहे बिलाल अहमद को उचित सहायता प्रदान की जाए। पशुपालकों ने माँग की है कि उन क्षेत्रों में रसायनों के उपयोग की गहन जाँच हो जहाँ पशु चरने जाते हैं।

कीटनाशकों का बढ़ता खतरा

विशेषज्ञों का कहना है कि घाटी में फलों के बागों में फंगीसाइड और कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग पर्यावरण के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुका है। ये रसायन खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर रहे हैं और कीटनाशक-छिड़काव वाले सेबों की सुरक्षा पर भी सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों की चेतावनी है कि यदि निकट भविष्य में जैविक खेती को नहीं अपनाया गया तो स्थानीय बागवानी उद्योग के अस्तित्व पर संकट आ सकता है।

आगे क्या होगा

अधिकारियों के अनुसार, पुलिस जाँच जारी है और मृत भेड़ों के नमूनों की जाँच से मौत की असली वजह स्पष्ट होने की उम्मीद है। पशुपालक समुदाय चाहता है कि प्रशासन चरागाह क्षेत्रों में रासायनिक उपयोग की निगरानी के लिए ठोस तंत्र विकसित करे, ताकि भविष्य में इस तरह की क्षति न हो।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि ढाँचागत है। घाटी में सेब बागवानी के लिए अंधाधुंध रासायनिक छिड़काव और मौसमी चरागाहों का अतिव्यापन एक खतरनाक टकराव पैदा कर रहा है जिसे अब तक गंभीरता से नहीं लिया गया। असली सवाल यह है कि क्या प्रशासन के पास चरागाह क्षेत्रों में रासायनिक उपयोग की कोई निगरानी-प्रणाली है — और यदि नहीं, तो पशुपालक समुदाय हर मौसम में इसी तरह नुकसान उठाता रहेगा।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

त्राल में 20 भेड़ों की मौत कैसे हुई?
चरवाहों के अनुसार, भेड़ों ने केहलील के ऊँचे चरागाह में कीटनाशक-दूषित घास खाई, जिसके कुछ देर बाद सभी 20 भेड़ें मर गईं। मौत की आधिकारिक वजह की पुष्टि के लिए पुलिस जाँच जारी है।
इस घटना में किसका नुकसान हुआ?
सीर त्राल निवासी बिलाल अहमद की सभी 20 भेड़ें मर गईं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से उन्हें उचित सहायता देने की माँग की है।
क्या कश्मीर में पहले भी ऐसी घटना हो चुकी है?
हाँ, 26 अप्रैल को बडगाम जिले के यारीगुंड इलाके में संदिग्ध जहरीले हालात में 8 भेड़ें मर गई थीं। दो महीने में यह दूसरी बड़ी घटना है।
कश्मीर में कीटनाशकों का इतना उपयोग क्यों हो रहा है?
घाटी में सेब और अन्य फलों की बागवानी के लिए फंगीसाइड व कीटनाशकों का व्यापक उपयोग होता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह रसायन खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर रहे हैं और चरागाहों को भी दूषित कर रहे हैं।
इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जाएंगे?
पुलिस ने मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। पशुपालकों ने माँग की है कि चरागाह क्षेत्रों में रसायन-उपयोग की गहन जाँच हो और भविष्य में ऐसे नुकसान रोकने के लिए ठोस उपाय किए जाएँ।
राष्ट्र प्रेस
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