डोडा में दो बार बादल फटे, भलेसा की सड़कें तबाह; कई गांव जिले से कटे, चिनाब खतरे के निशान से एक मीटर ऊपर
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में 2 जुलाई को भलेसा इलाके में कहल जुगेसर के पास बादल फटने की दो घटनाएं हुईं, जिनसे अचानक बाढ़ आ गई और कई सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। अधिकारियों के अनुसार, अब तक कोई जनहानि नहीं हुई है, लेकिन बाढ़ के कारण भलेसा क्षेत्र के बड़े हिस्से जिले के शेष भागों से पूरी तरह कट गए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
बादल फटने से सबसे अधिक नुकसान थाथरी-किलहोत्रन रोड पर हुआ, जहाँ भारी मात्रा में मलबा जमा होने से सड़क पूरी तरह दब गई और यातायात ठप हो गया। यात्री कई घंटों तक दोनों ओर फंसे रहे। दूरदराज के गांवों को जोड़ने वाली अनेक संपर्क सड़कें भी क्षतिग्रस्त हुईं, जिससे राहत एवं बहाली कार्य में भी बाधा आई।
भटियास इलाके से भी भारी नुकसान की सूचना है — बाढ़ का पानी सरकारी अनाज भंडारण डिपो में घुस गया, जिससे अंदर रखा अनाज खराब हो गया। स्थानीय लोगों के अनुमान के अनुसार, मलबे और बाढ़ के पानी में डूबे रहने के कारण सैकड़ों क्विंटल अनाज नष्ट हो गया।
आम जनता पर असर
कोई वैकल्पिक मार्ग न होने के कारण मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में एम्बुलेंस और आपातकालीन सेवाओं के आवागमन को लेकर गंभीर चिंता उत्पन्न हो गई। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कई घंटों तक सड़क साफ करने का काम शुरू नहीं किया गया, जिससे फंसे यात्रियों की परेशानी और बढ़ी।
निवासियों ने यह भी कहा कि उचित जल निकासी व्यवस्था और बाढ़-रोधी उपायों की बार-बार माँग के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे भारी बारिश के दौरान यह इलाका और अधिक असुरक्षित हो जाता है।
चिनाब नदी में खतरे का स्तर
चिनाब नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण नदी का जलस्तर खतरे के निशान से लगभग एक मीटर ऊपर पहुँच गया है। इसके मद्देनजर जिला प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी किया है और नदी किनारे रहने वाले लोगों को नदी से दूर रहने तथा असुरक्षित क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही न करने की सलाह दी है।
सरकार की प्रतिक्रिया
अधिकारियों ने बताया कि मलबा हटाने और बंद सड़कों को फिर से खोलने के लिए बहाली टीमें तैनात कर दी गई हैं। प्रशासन मौसम की स्थिति पर लगातार नज़र रखे हुए है, क्योंकि बारिश का यह दौर भूस्खलन और अचानक बाढ़ के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बना सकता है।
क्या होगा आगे
यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में मानसून अपने चरम पर है और पहाड़ी जिलों में बादल फटने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। गौरतलब है कि डोडा जिला पिछले कुछ वर्षों में ऐसी आपदाओं का बार-बार सामना कर चुका है। बहाली टीमों के काम की गति और चिनाब के जलस्तर पर अगले कुछ घंटे निर्णायक रहेंगे।