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गिर में 4 शावकों की मौत: CM भूपेंद्र पटेल ने गांधीनगर में उच्चस्तरीय बैठक कर स्थिति का जायजा लिया

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गिर में 4 शावकों की मौत: CM भूपेंद्र पटेल ने गांधीनगर में उच्चस्तरीय बैठक कर स्थिति का जायजा लिया

सारांश

गिर के अलग-अलग क्षेत्रों में 4 शावकों की मौत के बाद CM भूपेंद्र पटेल ने गांधीनगर में उच्चस्तरीय बैठक बुलाई। 17 सिंह आइसोलेट हैं, 350 से अधिक की डी-टिकिंग चल रही है और जूनागढ़ वेटरनरी कॉलेज के विशेषज्ञ भी तैनात हैं।

मुख्य बातें

गिर क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों में 4 शावकों की मृत्यु की पुष्टि हुई है।
लगभग 17 सिंहों को आइसोलेट कर सघन निगरानी में रखा गया है।
गिर गढ़डा और बाबरिया क्षेत्र की 10 किलोमीटर परिधि में सभी सिंहों की मॉनिटरिंग जारी; अन्य बीमारी के लक्षण नहीं।
350 से अधिक सिंहों की डी-टिकिंग प्रक्रिया और स्वास्थ्योन्मुखी कदम उठाए जा रहे हैं।
जूनागढ़ वेटरनरी कॉलेज के चिकित्सा विशेषज्ञ वन विभाग के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
अमरेली और भावनगर जिलों के राजस्व क्षेत्र में सिंहों की दैनिक रिपोर्ट प्राप्त की जा रही है।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 27 मई 2026 को गांधीनगर में एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाकर गिर क्षेत्र में हुई 4 शावकों की मृत्यु के संबंध में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। बैठक में वन एवं पर्यावरण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्थिति की पूरी जानकारी दी और किए जा रहे उपायों से मुख्यमंत्री को अवगत कराया।

मृत्यु का विवरण और प्रभावित क्षेत्र

वन एवं पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव डॉ. विनोद राव ने बैठक में बताया कि गिर के अलग-अलग क्षेत्रों में कुल 4 शावकों की मृत्यु हुई है। इसके साथ ही गिर क्षेत्र के लगभग 17 सिंहों को आइसोलेट कर उन पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

विशेष रूप से गिर गढ़डा तथा बाबरिया क्षेत्र की 10 किलोमीटर की परिधि में मौजूद सभी सिंहों की सघन मॉनिटरिंग जारी है। अधिकारियों ने बताया कि इन सिंहों में अभी तक कोई अन्य बीमारी के लक्षण नहीं पाए गए हैं।

व्यापक निगरानी और स्वास्थ्य उपाय

वन विभाग द्वारा अमरेली तथा भावनगर जिलों के राजस्व क्षेत्र में सभी सिंहों का सघन निरीक्षण किया जा रहा है और इसकी दैनिक रिपोर्ट भी प्राप्त की जा रही है। यह ऐसे समय में विशेष महत्व रखता है जब गर्मी का मौसम शुरू हो चुका है और मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

बैठक में मुख्यमंत्री को बताया गया कि ग्रीष्म ऋतु के आरंभ में दिखाई देने वाली मौसमी बीमारी से बचाव के लिए गिर क्षेत्र के 350 से अधिक सिंहों की डी-टिकिंग प्रक्रिया एवं अन्य स्वास्थ्योन्मुखी कदम उठाए जा रहे हैं।

विशेषज्ञों की भागीदारी

प्रधान मुख्य वन संरक्षक जयपाल सिंह ने जानकारी दी कि इस कार्य में जूनागढ़ वेटरनरी कॉलेज के चिकित्सा विशेषज्ञ भी सक्रिय रूप से जुड़े हैं। पशु चिकित्सा विशेषज्ञों की यह भागीदारी उपचार और निगरानी प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाती है।

गौरतलब है कि एशियाई सिंहों की एकमात्र प्राकृतिक आवास गिर वन्यजीव अभयारण्य है, और यहाँ सिंहों की किसी भी असामान्य मृत्यु को वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत गंभीरता से लिया जाता है।

बैठक में उपस्थित अधिकारी

इस उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव संजीव कुमार, अपर प्रधान सचिव डॉ. विक्रांत पांडे और मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. अजय कुमार भी सहभागी रहे। आने वाले दिनों में स्थिति की नियमित समीक्षा जारी रहेगी और वन विभाग की दैनिक रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिनमें 2018 की महामारी में दर्जनों सिंहों की जान गई थी। मुख्यमंत्री स्तर पर त्वरित बैठक और डी-टिकिंग अभियान सकारात्मक संकेत हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या मृत्यु का कारण अभी तक निर्धारित हो पाया है। बिना स्पष्ट रोग-निदान के, 350 सिंहों की डी-टिकिंग एक सावधानी है, समाधान नहीं। जूनागढ़ वेटरनरी कॉलेज की भागीदारी उत्साहजनक है, परंतु पारदर्शी पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक करना वन्यजीव विशेषज्ञों और संरक्षण संगठनों की लंबे समय से चली आ रही माँग है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गिर क्षेत्र में कितने शावकों की मृत्यु हुई है?
वन एवं पर्यावरण विभाग के अनुसार गिर के अलग-अलग क्षेत्रों में कुल 4 शावकों की मृत्यु हुई है। इसके बाद लगभग 17 सिंहों को आइसोलेट कर उन पर निगरानी रखी जा रही है।
CM भूपेंद्र पटेल ने इस मामले में क्या कदम उठाए?
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 27 मई 2026 को गांधीनगर में उच्चस्तरीय बैठक बुलाई और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से विस्तृत जानकारी प्राप्त की। बैठक में स्वास्थ्य निगरानी, डी-टिकिंग और दैनिक रिपोर्टिंग की व्यवस्था की समीक्षा की गई।
गिर के सिंहों की सुरक्षा के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं?
350 से अधिक सिंहों की डी-टिकिंग प्रक्रिया और अन्य स्वास्थ्योन्मुखी कदम उठाए जा रहे हैं। गिर गढ़डा और बाबरिया क्षेत्र की 10 किलोमीटर परिधि में सघन मॉनिटरिंग जारी है और जूनागढ़ वेटरनरी कॉलेज के विशेषज्ञ भी इस कार्य में जुड़े हैं।
क्या अन्य सिंहों में बीमारी के लक्षण पाए गए हैं?
अधिकारियों के अनुसार गिर गढ़डा और बाबरिया क्षेत्र की 10 किलोमीटर परिधि में मौजूद सिंहों में कोई अन्य बीमारी के लक्षण नहीं पाए गए हैं। अमरेली और भावनगर जिलों के राजस्व क्षेत्र में भी सघन निरीक्षण जारी है।
गिर के सिंहों की निगरानी में कौन-कौन से विभाग शामिल हैं?
वन विभाग के साथ-साथ जूनागढ़ वेटरनरी कॉलेज के चिकित्सा विशेषज्ञ भी इस निगरानी कार्य में सक्रिय हैं। प्रधान मुख्य वन संरक्षक जयपाल सिंह के नेतृत्व में अमरेली और भावनगर जिलों से दैनिक रिपोर्ट प्राप्त की जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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