क्या बजट 2026 में रक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जाएगा?
सारांश
Key Takeaways
- रक्षा क्षेत्र को बजट में विशेष लाभ मिल सकता है।
- इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश बढ़ने की संभावना है।
- महंगाई दर 4-5% के बीच रहने की संभावना।
- निवेशकों का सकारात्मक दृष्टिकोण।
- बाजार में उतार-चढ़ाव की आशंका।
नई दिल्ली, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय बजट 2026 में सरकार वित्तीय अनुशासन को बनाए रखते हुए उन क्षेत्रों पर ज्यादा ध्यान देने की योजना बना रही है, जहां बड़े पैमाने पर पूंजीगत खर्च किया जाता है। इस क्रम में रक्षा क्षेत्र को सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावनाएं व्यक्त की गई हैं। यह जानकारी स्मॉलकेस द्वारा जारी एक रिपोर्ट में सामने आई है।
इस रिपोर्ट के अनुसार, सर्वे में शामिल लगभग 40 प्रतिशत निवेश प्रबंधकों का मानना है कि इस बजट में रक्षा क्षेत्र को अधिक बजट आवंटित किया जा सकता है। इसका मुख्य कारण देश में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देना, सेना का आधुनिकीकरण, रक्षा निर्यात की संभावनाएं और इस क्षेत्र में सरकार का निरंतर खर्च है।
बजट से पहले किए गए इस सर्वे में 50 से अधिक निवेश प्रबंधकों ने भाग लिया, जिसके अनुसार इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को दूसरा सबसे बड़ा लाभ प्राप्त करने वाला क्षेत्र माना गया है। लगभग 29 प्रतिशत प्रतिभागियों का मानना है कि सड़क, रेलवे और अन्य बुनियादी ढांचे पर सरकारी खर्च से लंबे समय तक आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मध्यम अवधि में भारतीय शेयर बाजार के निवेशक सकारात्मक नजरिया रखते हैं। हालाँकि, बजट के समय बाजार में कुछ उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। अधिकांश फंड मैनेजर भारतीय शेयर बाजार के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, 82 प्रतिशत से अधिक प्रतिभागियों को उम्मीद है कि निफ्टी50 वित्त वर्ष 2027 के अंत तक 25,000 अंक से ऊपर बंद होगा। वहीं, 43 प्रतिशत निवेशकों का अनुमान है कि यह 25,000 से 27,500 के दायरे में रह सकता है।
महंगाई को लेकर भी निवेश प्रबंधक ज्यादा चिंतित नहीं हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि 85 प्रतिशत से अधिक लोग मानते हैं कि वित्त वर्ष 2027 में महंगाई दर 4 से 5 प्रतिशत या उससे कम रह सकती है।
इसके अलावा, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को भी बजट से लाभ मिलने की संभावना है। लगभग 18 प्रतिशत लोगों ने इस क्षेत्र का उल्लेख किया है, क्योंकि सरकार उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना के माध्यम से उद्योगों को निरंतर समर्थन प्रदान कर रही है।
खपत और कृषि क्षेत्रों को लेकर लगभग 7-7 प्रतिशत लोगों ने समर्थन की उम्मीद जताई है, जिससे संकेत मिलता है कि सरकार इन क्षेत्रों में सीमित और लक्षित मदद प्रदान कर सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 80 प्रतिशत निवेश प्रबंधकों को बजट के आसपास बाजार में उतार-चढ़ाव की आशंका है। इसकी वजह नीतिगत फैसले, अचानक घोषणाएं और वैश्विक घटनाएं हो सकती हैं। हालाँकि, उनका मानना है कि यह उतार-चढ़ाव अधिक समय तक नहीं रहेगा और बाजार जल्द ही अपने मूल आधार पर लौट आएगा।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि टैक्स में बड़े बदलाव की उम्मीद कम है। निवेशकों का मानना है कि कंपनियों के लिए टैक्स में बड़ी कटौती की गुंजाइश नहीं है, जबकि नौकरीपेशा लोगों के लिए सीमित राहत या टैक्स नियमों को सरल बनाया जा सकता है।
कंपनियों पर टैक्स में स्थिरता बनाए रखने की संभावना है और सरकार का ध्यान पूंजीगत खर्च से संबंधित प्रोत्साहन योजनाओं और नियमों के पालन पर रहेगा।
इसके अलावा, रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार शहरों और गांवों में मांग बढ़ाने के लिए कुछ विशेष कदम उठा सकती है, लेकिन बड़े पैमाने पर खर्च बढ़ाने से बचेगी, ताकि वित्तीय अनुशासन बना रहे।