क्या भारत का विद्युत ट्रांसमिशन नेटवर्क 5 लाख सर्किट किलोमीटर को पार कर गया?

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क्या भारत का विद्युत ट्रांसमिशन नेटवर्क 5 लाख सर्किट किलोमीटर को पार कर गया?

सारांश

भारत ने अपने राष्ट्रीय बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क की लंबाई को 5 लाख सर्किट किलोमीटर से अधिक पहुंचाकर बिजली क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर हासिल किया है। इस उपलब्धि से 1,407 जीवीए की शक्ति क्षमता भी प्राप्त हुई है, जो नवीकरणीय ऊर्जा के विकास को और अधिक सशक्त बनाएगी।

मुख्य बातें

5 लाख सर्किट किलोमीटर का मील का पत्थर 1,407 जीवीए की बिजली क्षमता नवीकरणीय ऊर्जा का विकास सरकार की विश्वसनीय बिजली आपूर्ति की प्रतिबद्धता भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा

नई दिल्ली, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत ने बिजली क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त की है। केंद्रीय विद्युत मंत्रालय द्वारा गुरुवार को जारी किए गए एक बयान में बताया गया है कि देश का राष्ट्रीय बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क अब 5 लाख सर्किट किलोमीटर (सीकेएम) से अधिक लंबा हो गया है। इसके साथ ही बिजली को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाने की क्षमता 1,407 जीवीए तक बढ़ गई है।

विश्व का सबसे बड़ा सिंक्रोनस राष्ट्रीय ग्रिड ने 14 जनवरी 2026 को यह मील का पत्थर हासिल किया, जब राजस्थान में भादला द्वितीय से सीकर द्वितीय सबस्टेशन तक 765 केवी की 628 सीकेएम ट्रांसमिशन लाइन शुरू की गई। इसका उद्देश्य राजस्थान के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र से उत्पन्न होने वाली सौर ऊर्जा को देश के अन्य हिस्सों तक पहुंचाना है।

नई ट्रांसमिशन लाइन के प्रारंभ होने से 1,100 मेगावाट अतिरिक्त बिजली को भादला, रामगढ़ और फतेहगढ़ सोलर पावर कॉम्प्लेक्स से बाहर भेजा जा सकेगा, जिससे सौर ऊर्जा का अधिकतम उपयोग संभव हो सकेगा।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2014 के बाद से देश के बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क में 71.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस दौरान 220 केवी और उससे ऊपर की 2.09 लाख सर्किट किलोमीटर नई ट्रांसमिशन लाइनें जोड़ी गई हैं। इसके साथ ही बिजली रूपांतरण क्षमता में 876 जीवीए की बढ़ोतरी हुई है।

आज भारत की अंतर क्षेत्रीय बिजली ट्रांसफर क्षमता 1,20,340 मेगावाट तक पहुंच चुकी है। इससे देश के एक हिस्से में उत्पन्न बिजली को आसानी से दूसरे हिस्से तक पहुंचाया जा सकता है। यही कारण है कि 'वन नेशन–वन ग्रिड–वन फ्रीक्वेंसी' का सपना साकार हो सका है।

वर्तमान में, देश में कई अंतर-राज्य बिजली ट्रांसमिशन परियोजनाएं चल रही हैं, जिनके पूरा होने पर लगभग 40,000 सर्किट किलोमीटर नई लाइनें और 399 जीवीए की अतिरिक्त क्षमता जुड़ जाएगी।

इसके अलावा, राज्यों के अंदर चल रही परियोजनाओं से भी करीब 27,500 सर्किट किलोमीटर ट्रांसमिशन लाइनें और 134 जीवीए की क्षमता बढ़ने की संभावना है। इससे बिजली ग्रिड और अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनेगा।

इस ट्रांसमिशन क्षमता में वृद्धि नवीकरणीय ऊर्जा, जैसे कि सौर और पवन ऊर्जा, को बढ़ावा देने में सहायक होगी, जिसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता प्राप्त करना है।

बयान में आगे कहा गया है कि 5 लाख सर्किट किलोमीटर का यह आंकड़ा दर्शाता है कि सरकार देश में सस्ती, विश्वसनीय और सुरक्षित बिजली आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयासरत है, साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा को तेजी से जोड़ने पर भी जोर दे रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि नवीकरणीय ऊर्जा के विकास में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। यह सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि वह सस्ती और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का विद्युत ट्रांसमिशन नेटवर्क कब 5 लाख सर्किट किलोमीटर से अधिक हुआ?
भारत का विद्युत ट्रांसमिशन नेटवर्क 14 जनवरी 2026 को 5 लाख सर्किट किलोमीटर से अधिक हुआ।
इस नेटवर्क की क्षमता कितनी है?
इस नेटवर्क की बिजली को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाने की क्षमता 1,407 जीवीए है।
नई ट्रांसमिशन लाइन का उद्देश्य क्या है?
नई ट्रांसमिशन लाइन का उद्देश्य राजस्थान के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र से उत्पन्न सौर बिजली को देश के अन्य हिस्सों में पहुंचाना है।
राष्ट्र प्रेस
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