18 मार्च को दर्श अमावस्या: विजय मुहूर्त और अमृतकाल का विशेष महत्व
सारांश
Key Takeaways
- दर्श अमावस्या का दिन पितरों के तर्पण के लिए महत्वपूर्ण है।
- इस दिन विशेष मुहूर्त का ध्यान रखना चाहिए।
- अशुभ समय से बचना आवश्यक है।
- पंचक का प्रभाव पूरे दिन रहेगा।
- धार्मिक मान्यता के अनुसार दान और पुण्य का महत्व है।
नई दिल्ली, 17 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। हिंदू पंचांग के अनुसार, 18 मार्च को दर्श अमावस्या का पर्व मनाया जाएगा। हर महीने की अमावस्या को दर्श अमावस्या कहा जाता है। 'दर्श' का अर्थ है 'देखना' या 'दर्शन करना', और अमावस्या वह तिथि है जब चंद्रमा पूरी तरह से अदृश्य होता है। इसलिए इसे दर्श अमावस्या के नाम से जाना जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध और जल अर्पण करने से उनकी आत्मा को शांति प्राप्त होती है। जब पितर प्रसन्न होते हैं, तो वे परिवार में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और धन का आशीर्वाद देते हैं। दान, पुण्य, स्नान और विशेष पूजा से पितृ दोष दूर होता है और आने वाली पीढ़ियों को इसका लाभ मिलता है।
दृक पंचांग के अनुसार, 18 मार्च को सूर्योदय सुबह 6:28 बजे और सूर्यास्त शाम 6:31 बजे होगा। कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि सुबह 8:25 बजे तक रहेगी, इसके बाद अमावस्या तिथि प्रवेश करेगी। नक्षत्र पूर्व भाद्रपद सुबह 5:21 बजे तक रहेगा, फिर उत्तर भाद्रपद का समय आएगा। शुभ योग सुबह 4:01 बजे से 19 मार्च तक रहेगा जबकि करण शकुनि सुबह 8:25 बजे तक रहेगा।
18 मार्च के विशेष मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:52 से 5:40 तक है। विजय मुहूर्त दोपहर 2:30 से 3:18 बजे तक रहेगा, गोधूलि मुहूर्त शाम 6:29 से 6:53 बजे तक रहेगा। अमृत काल रात 9:37 से 11:10 बजे तक रहेगा। निशीथ मुहूर्त रात 12:05 से 12:53 बजे तक है। हालांकि, इस दिन अभिजित मुहूर्त नहीं है।
अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल दोपहर 12:29 से 2:00 बजे तक रहेगा। यमगंड सुबह 7:58 से 9:28 बजे तक है। गुलिक काल सुबह 10:59 से दोपहर 12:29 बजे तक रहेगा। साथ ही दुर्मुहूर्त दोपहर 12:05 से 12:53 बजे तक रहेगा। इस बुधवार को पंचक पूरे दिन प्रभावी रहेगा।