अल्ट्रावॉयलेट लाइट: जानिए इसके विज्ञान और सूरज की किरणों का रहस्य

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अल्ट्रावॉयलेट लाइट: जानिए इसके विज्ञान और सूरज की किरणों का रहस्य

सारांश

अल्ट्रावॉयलेट लाइट, जिसे यूवी किरणें भी कहा जाता है, एक अदृश्य विद्युत चुंबकीय तरंग है। यह न केवल हमारी त्वचा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह ब्रह्मांड की गहराइयों को समझने में भी मदद करती है। जानें इसके विभिन्न प्रकार और इसके प्रभाव।

Key Takeaways

  • अल्ट्रावॉयलेट लाइट
  • यह तीन प्रकारों में आती है: यूवी-ए, यूवी-बी और यूवी-सी।
  • यूवी-बी किरणें सनबर्न का कारण बन सकती हैं।
  • ओजोन परत लगभग 95%25 यूवी-बी किरणों को अवशोषित करती है।
  • यह ब्रह्मांड के अध्ययन में सहायक है।

नई दिल्ली, 17 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अल्ट्रावॉयलेट लाइट, जिसे पराबैंगनी (यूवी) किरणें भी कहा जाता है, यह एक विशेष प्रकार की विद्युत चुंबकीय तरंग है। इसकी तरंगदैर्ध्य (वेवलेंथ) दृश्य प्रकाश से कम होती है, जिससे यह मानव आंखों के लिए अदृश्य रहती है। लेकिन, कुछ जीव जैसे मधुमक्खियाँ और भंवरे इसे देखने की विशेष क्षमता रखते हैं।

यूवी लाइट का विज्ञान न केवल हमारी त्वचा की सुरक्षा से संबंधित है, बल्कि यह ब्रह्मांड की गहराइयों को समझने में भी सहायक है। सूरज की रोशनी में मौजूद ये अदृश्य किरणें जीवन के लिए आवश्यक हैं, लेकिन अधिक संपर्क में आने पर ये हानिकारक भी हो सकती हैं। वैज्ञानिक इनका अध्ययन कर रहे हैं ताकि पृथ्वी और ब्रह्मांड की बेहतर समझ प्राप्त की जा सके।

सूरज, यूवी लाइट का सबसे बड़ा प्राकृतिक स्रोत है। वैज्ञानिक सूरज से निकलने वाली यूवी किरणों को मुख्यतः तीन भागों में वर्गीकृत करते हैं: यूवी-ए, यूवी-बी और यूवी-सी। इनमें से यूवी-सी सबसे अधिक खतरनाक होती है, किंतु पृथ्वी का वायुमंडल इन्हें लगभग पूरी तरह से अवशोषित कर लेता है। यूवी-बी किरणें सनबर्न का कारण बन सकती हैं और जीवों के डीएनए को नुकसान पहुँचा सकती हैं। अच्छी बात यह है कि ओजोन परत लगभग 95 प्रतिशत यूवी-बी किरणों को रोक लेती है। यूवी-ए किरणें सबसे लंबी तरंग वाली होती हैं और ये त्वचा में गहराई तक जा सकती हैं, जिससे उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज कर सकती हैं।

खगोलज्ञ यूवी लाइट को और अधिक बारीकी से वर्गीकृत करते हैं जैसे नियर यूवी (एनयूवी), मिडिल यूवी (एमयूवी), फार यूवी (एफयूवी) और एक्सट्रीम यूवी (ईयूवी)। नासा के सोलर डायनेमिक्स ऑब्जर्वेटरी (एसडीओ) ने सूरज की एक्सट्रीम यूवी इमेज ली है। इन रंगीन तस्वीरों में विभिन्न रंग सूरज की गर्म प्लाज्मा गैसों के तापमान को दिखाते हैं। लाल रंग लगभग 60 हजार डिग्री सेल्सियस को दर्शाता है, जबकि नीला और हरा रंग 10 लाख डिग्री सेल्सियस से अधिक के तापमान को दिखाता है।

साल 1801 में जर्मन वैज्ञानिक जोहान रिटर ने यूवी लाइट की खोज की थी। रिटर ने यह देखा कि फोटोग्राफिक पेपर नीली रोशनी के संपर्क में जल्दी काला हो जाता है। जब उन्होंने बैंगनी रंग से परे की अदृश्य रोशनी में पेपर रखा, तो वह तेजी से काला हो गया। इससे यह सिद्ध हुआ कि बैंगनी से परे भी ऊर्जा मौजूद है, जिसे बाद में अल्ट्रावॉयलेट कहा गया। पृथ्वी का वायुमंडल अधिकतर उच्च-ऊर्जा वाली यूवी किरणों को रोकता है। इसलिए, वैज्ञानिक सूरज और अन्य तारों से आने वाली यूवी रोशनी का अध्ययन करने के लिए उपग्रहों का उपयोग करते हैं।

नए बने तारे मुख्यतः यूवी लाइट में चमकते हैं। नासा के गैलेक्स मिशन ने एम81 गैलेक्सी की यूवी इमेज ली है, जिसमें नए तारों के बनने वाले क्षेत्र स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। नासा के अल्ट्रावॉयलेट इमेजिंग टेलिस्कोप ने एस्ट्रो-2 मिशन के दौरान तीन गैलेक्सी की तस्वीरें लीं। यूवी लाइट में गैलेक्सी में नए, भारी और गर्म तारे चमकते हुए नजर आते हैं, जबकि दृश्य प्रकाश में पुराने, ठंडे तारे अधिक दिखाई देते हैं। इससे वैज्ञानिक गैलेक्सी के विकास और तारों के जन्म-मृत्यु के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करते हैं।

Point of View

बल्कि यह ब्रह्मांड के विभिन्न पहलुओं को समझने में भी सहायक है। वैज्ञानिक इसे लगातार खोज रहे हैं।
NationPress
20/03/2026

Frequently Asked Questions

अल्ट्रावॉयलेट लाइट क्या है?
अल्ट्रावॉयलेट लाइट एक प्रकार की विद्युत चुंबकीय तरंग है जो दृश्य प्रकाश से कम तरंगदैर्ध्य रखती है।
यूवी किरणों के प्रकार क्या हैं?
यूवी किरणें मुख्यतः तीन प्रकार की होती हैं: यूवी-ए, यूवी-बी और यूवी-सी।
यूवी लाइट का मानव स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव है?
यूवी लाइट का अधिक संपर्क त्वचा को नुकसान पहुँचा सकता है और कैंसर का कारण बन सकता है।
अल्ट्रावॉयलेट लाइट की खोज किसने की थी?
अल्ट्रावॉयलेट लाइट की खोज जर्मन वैज्ञानिक जोहान रिटर ने 1801 में की थी।
सूरज से निकलने वाली यूवी किरणों का अध्ययन क्यों किया जाता है?
सूरज से निकलने वाली यूवी किरणों का अध्ययन ब्रह्मांड की समझ को बेहतर करने के लिए किया जाता है।
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