सनबर्न क्यों होता है? अल्ट्रावॉयलेट किरणों से त्वचा को नुकसान और बचाव के असरदार उपाय

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सनबर्न क्यों होता है? अल्ट्रावॉयलेट किरणों से त्वचा को नुकसान और बचाव के असरदार उपाय

सारांश

सूर्य जीवनदाता है, लेकिन उसकी अदृश्य अल्ट्रावॉयलेट किरणें त्वचा की कोशिकाओं को जला सकती हैं। अंतरराष्ट्रीय सूर्य दिवस पर जानें कि सनबर्न क्यों होता है, UV किरणें बादलों और पानी से भी कैसे परावर्तित होती हैं, और SPF 30+ सनस्क्रीन से लेकर सही कपड़ों तक — बचाव के सबसे असरदार तरीके।

Key Takeaways

अल्ट्रावॉयलेट (UV) किरणें सूर्य की सबसे अधिक ऊर्जा वाली किरणें हैं, जो त्वचा की कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाकर सनबर्न का कारण बनती हैं। UV किरणें पानी, बर्फ, रेत और कंक्रीट से परावर्तित होती हैं — छाते के नीचे या बादल वाले दिन भी सनबर्न हो सकता है। सुबह 10 बजे से दोपहर 4 बजे के बीच UV किरणों की तीव्रता सर्वाधिक होती है, इस दौरान बाहर निकलने से बचना चाहिए। SPF 30 या उससे अधिक का सनस्क्रीन लगाएँ और हर 3-4 घंटे में दोबारा लगाएँ। बार-बार सनबर्न होने से दीर्घकालिक रूप से त्वचा कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। 3 मई को अंतरराष्ट्रीय सूर्य दिवस के रूप में मनाया जाता है।

नई दिल्ली3 मई को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय सूर्य दिवस पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ एक बार फिर इस अहम सवाल की ओर ध्यान खींच रहे हैं: आखिर सूर्य की अल्ट्रावॉयलेट (UV) किरणें त्वचा को क्यों जलाती हैं और सनबर्न से कैसे बचा जा सकता है? सूर्य जहाँ पृथ्वी पर जीवन का आधार है, वहीं उसकी अदृश्य UV किरणें त्वचा की कोशिकाओं को गंभीर नुकसान पहुँचा सकती हैं।

सूर्य से निकलती हैं तीन तरह की किरणें

सूर्य लगातार इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगें पृथ्वी की ओर भेजता रहता है। इनमें तीन प्रमुख प्रकार होते हैं — इन्फ्रारेड रेडिएशन (जो गर्मी का एहसास कराती है), विजिबल लाइट (जो हम देख सकते हैं) और अल्ट्रावॉयलेट लाइट (जो आँखों से नहीं दिखती)। इन तीनों में UV किरणें सबसे अधिक ऊर्जा वाली होती हैं और इन्हीं की वजह से त्वचा को नुकसान होता है।

सनबर्न कैसे होता है

जब अल्ट्रावॉयलेट किरणें अत्यधिक मात्रा में त्वचा पर पड़ती हैं, तो त्वचा की कोशिकाएँ क्षतिग्रस्त होने लगती हैं। कोशिकाएँ मरने लगती हैं और शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली इस पर प्रतिक्रिया देती है। इसके परिणामस्वरूप त्वचा लाल हो जाती है, सूजन आती है, दर्द और जलन होती है — इसी स्थिति को सनबर्न कहते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सनबर्न केवल सीधी धूप में बैठने से नहीं होता। UV किरणें पानी, बर्फ, रेत और कंक्रीट जैसी सतहों से परावर्तित होकर भी त्वचा तक पहुँच सकती हैं। यहाँ तक कि बादल वाले दिन भी ये किरणें वातावरण को भेदकर त्वचा तक पहुँचती हैं, इसलिए छाते के नीचे बैठने पर भी सावधानी ज़रूरी है।

सूर्य की रोशनी के फायदे और नुकसान

सूर्य की रोशनी शरीर में विटामिन डी बनाने में मदद करती है, जो हड्डियों की मज़बूती के लिए अनिवार्य है। हालाँकि, विशेषज्ञों का कहना है कि संतुलन बनाए रखना ज़रूरी है — अत्यधिक UV एक्सपोज़र से दीर्घकालिक नुकसान, यहाँ तक कि त्वचा का कैंसर भी हो सकता है। गौरतलब है कि 3 मई को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय सूर्य दिवस इसी जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है।

सनबर्न से बचाव के उपाय

स्वास्थ्य विशेषज्ञ निम्नलिखित सावधानियाँ बरतने की सलाह देते हैं:

सुबह 10 बजे से दोपहर 4 बजे के बीच तेज धूप में बाहर निकलने से बचें, क्योंकि इस दौरान UV किरणों की तीव्रता सबसे अधिक होती है। हल्के रंग के ढीले कपड़े पहनें जो पूरे शरीर को ढकें। चौड़े किनारे वाली टोपी और UV-प्रोटेक्टिव चश्मा लगाएँ। SPF 30 या उससे अधिक वाला सनस्क्रीन लगाएँ और इसे हर 3-4 घंटे में दोबारा लगाएँ। शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए पर्याप्त पानी पिएँ।

सनबर्न होने पर क्या करें

डॉक्टरों की सलाह है कि सनबर्न होने पर ठंडे पानी से सेंक करें और प्रभावित त्वचा पर मॉइश्चराइज़र लगाएँ। यदि स्थिति गंभीर हो — जैसे फफोले पड़ना, तेज़ बुखार या अत्यधिक दर्द — तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। विशेषज्ञों के अनुसार, बार-बार सनबर्न होना त्वचा कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकता है, इसलिए इसे हल्के में न लें।

Point of View

लेकिन स्वास्थ्य विज्ञान यह स्पष्ट करता है कि यह त्वचा कैंसर की दिशा में पहला कदम हो सकता है। भारत में जागरूकता की कमी इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि यहाँ गर्मियों में UV Index अक्सर 10 से ऊपर रहता है — जिसे WHO 'अत्यधिक खतरनाक' श्रेणी में रखता है। अंतरराष्ट्रीय सूर्य दिवस केवल एक तारीख नहीं है, यह उस वैज्ञानिक साक्ष्य को सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति से जोड़ने का अवसर है जिसे अभी तक भारतीय स्कूली पाठ्यक्रम और सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों में पर्याप्त जगह नहीं मिली है।
NationPress
03/05/2026

Frequently Asked Questions

सनबर्न क्या होता है और यह क्यों होता है?
सनबर्न तब होता है जब सूर्य की अल्ट्रावॉयलेट (UV) किरणें अत्यधिक मात्रा में त्वचा पर पड़ती हैं और कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाती हैं। शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया के कारण त्वचा लाल, सूजी हुई और दर्दनाक हो जाती है।
क्या बादल वाले दिन भी सनबर्न हो सकता है?
हाँ, बादल वाले दिन भी UV किरणें बादलों को भेदकर त्वचा तक पहुँच सकती हैं। इसके अलावा ये किरणें पानी, बर्फ, रेत और कंक्रीट से परावर्तित होकर भी नुकसान पहुँचा सकती हैं।
सनबर्न से बचने के लिए कौन-सा सनस्क्रीन इस्तेमाल करें?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ SPF 30 या उससे अधिक वाला सनस्क्रीन लगाने की सलाह देते हैं। इसे बाहर निकलने से 20-30 मिनट पहले लगाएँ और हर 3-4 घंटे में दोबारा लगाएँ।
सनबर्न होने पर क्या करना चाहिए?
सनबर्न होने पर ठंडे पानी से प्रभावित हिस्से को सेंकें और मॉइश्चराइज़र लगाएँ। यदि फफोले, तेज़ बुखार या असहनीय दर्द हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
UV किरणों के अत्यधिक संपर्क से क्या दीर्घकालिक नुकसान हो सकते हैं?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बार-बार UV किरणों के अत्यधिक संपर्क में आने से त्वचा का कैंसर होने का जोखिम बढ़ जाता है। इसके अलावा समय से पहले त्वचा में झुर्रियाँ और रंग में बदलाव भी हो सकता है।
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