क्या पाकिस्तान ने ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का सही निर्णय लिया?

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क्या पाकिस्तान ने ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का सही निर्णय लिया?

सारांश

क्या पाकिस्तान सरकार ने ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का सही निर्णय लिया? इस पर विपक्षी नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया और चिंता के साथ राजनीतिक माहौल में हलचल देखी जा रही है।

Key Takeaways

  • पाकिस्तान ने ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का निर्णय लिया।
  • विपक्ष ने इस निर्णय की कड़ी आलोचना की है।
  • पुनर्निर्माण और सुरक्षा का मुद्दा महत्वपूर्ण है।
  • पाकिस्तान की भागीदारी की नैतिकता पर सवाल उठाए गए हैं।
  • इस निर्णय के राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं।

इस्लामाबाद, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने के पाकिस्तान सरकार के निर्णय पर देश में राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। पाकिस्तान की सीनेट में विपक्षी नेता अल्लामा राजा नासिर अब्बास ने इस निर्णय पर तीखी आलोचना करते हुए इसे नैतिक रूप से गलत और नीतिगत दृष्टि से अस्वीकार्य करार दिया है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए उन्होंने कहा कि यह पहल शुरू से ही समस्याग्रस्त रही है। उन्होंने बताया कि युद्ध के बाद गाजा के पुनर्निर्माण के नाम पर बनी यह व्यवस्था वास्तव में फिलिस्तीनी जनता से शासन का अधिकार छीनने के समान है। पुनर्निर्माण, सुरक्षा और राजनीतिक निगरानी को बाहरी ताकतों के हाथ में सौंपना एक नव-औपनिवेशिक मानसिकता का संकेत है, जो अंततः आत्मनिर्णय के अधिकार को कमजोर करेगा।

उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान की भागीदारी और भी चिंताजनक है क्योंकि जिस पहल को पहले गाजा में कथित नरसंहार के बाद सीमित पुनर्निर्माण तंत्र के रूप में प्रस्तुत किया गया था, उसका दायरा अब स्पष्ट रूप से बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बोर्ड का उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को दरकिनार करना या कमजोर करना है।

इस मुद्दे पर संविधान संरक्षण आंदोलन (तहरीक-ए-तहाफुज़-ए-आइन-ए-पाकिस्तान) के उपाध्यक्ष मुस्तफा नवाज खोखर ने भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि संसद से कोई राय लिए बिना और सार्वजनिक बहस के बिना इस बोर्ड में शामिल होना वर्तमान शासन की जनता के प्रति उपेक्षा को दर्शाता है।

खोखर ने एक्स पर लिखा कि तथाकथित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ गाजा पर शासन करने और संयुक्त राष्ट्र के समानांतर व्यवस्था बनाने की एक औपनिवेशिक कोशिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बोर्ड का चार्टर ट्रंप को एकतरफा और निरंकुश अधिकार देता है, जिससे वे अपने और अमेरिकी एजेंडे को लागू कर सकते हैं।

उन्हें यह भी कहा कि बोर्ड के अन्य सदस्यों की नियुक्ति या बर्खास्तगी का अधिकार भी अध्यक्ष (ट्रंप) के पास होगा। बोर्ड की बैठकें कब होंगी और किस विषय पर चर्चा होगी, यह भी वही तय करेंगे। उनके अनुसार, एक अरब डॉलर देकर स्थायी सदस्यता का प्रावधान इसे ‘अमीरों का क्लब’ बना देता है।

पाकिस्तान की पूर्व राजदूत (अमेरिका, ब्रिटेन और संयुक्त राष्ट्र) मलीहा लोधी ने भी इस निर्णय को कई कारणों से अविवेकपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि सरकार इस तथ्य को नजरअंदाज कर रही है कि ट्रंप इस बोर्ड के जरिए अपने एकतरफा फैसलों के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन और वैधता हासिल करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बोर्ड का कार्यक्षेत्र गाजा से कहीं आगे तक फैला हुआ है, जो इसमें शामिल न होने का एक और बड़ा कारण है।

इन बयानों से पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने घोषणा की थी कि पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 के ढांचे के तहत गाजा शांति योजना के कार्यान्वयन के समर्थन में ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होगा। विदेश मंत्रालय ने उम्मीद जताई कि इससे स्थायी युद्धविराम, फिलिस्तीनियों के लिए मानवीय सहायता में वृद्धि और गाजा के पुनर्निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।

Point of View

यह निर्णय कई सवाल उठाता है। विपक्ष की चिंताएं इस बात को दर्शाती हैं कि सरकार को जनता के हितों का ध्यान रखना चाहिए। यह आवश्यक है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी स्थिति को स्पष्ट करे और जनता के साथ संवाद बढ़ाए।
NationPress
22/01/2026

Frequently Asked Questions

पाकिस्तान ने ट्रंप के बोर्ड में शामिल होने का निर्णय क्यों लिया?
पाकिस्तान का कहना है कि यह निर्णय गाजा शांति योजना के कार्यान्वयन के समर्थन में लिया गया है।
विपक्ष ने इस निर्णय पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
विपक्ष ने इसे नैतिक और नीतिगत दृष्टि से गलत बताया है।
इस बोर्ड का उद्देश्य क्या है?
इस बोर्ड का उद्देश्य गाजा के पुनर्निर्माण, सुरक्षा और राजनीतिक निगरानी है।
क्या पाकिस्तान की भागीदारी चिंताजनक है?
विपक्षी नेताओं का मानना है कि यह भागीदारी चिंताजनक है और यह औपनिवेशिक सोच को दर्शाती है।
पाकिस्तान की पूर्व राजदूत ने इस निर्णय पर क्या कहा?
उन्होंने इसे अविवेकपूर्ण बताते हुए सरकार की चिंता व्यक्त की।
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