24 अक्टूबर 2026
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पुणे एयरपोर्ट पर बम खतरे की मॉक ड्रिल: CISF और AAI ने परखी आपातकालीन तैयारी

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पुणे एयरपोर्ट पर बम खतरे की मॉक ड्रिल: CISF और AAI ने परखी आपातकालीन तैयारी

सारांश

पुणे एयरपोर्ट पर AAI और CISF ने बम खतरे की स्थिति का पूर्ण अनुकरण किया — लावारिस बैग से IED की पुष्टि तक, टेलीस्कोपिक मैनिपुलेटर से निष्क्रियकरण तक। यह वार्षिक अभ्यास एक दर्जन से अधिक एजेंसियों की समन्वय क्षमता का असली पैमाना है।

मुख्य बातें

पुणे एयरपोर्ट पर 24 अक्टूबर 2026 को बम खतरे की व्यापक मॉक ड्रिल आयोजित की गई।
AAI और CISF के नेतृत्व में यह वार्षिक अभ्यास सुबह 11 बजे टेबलटॉप एक्सरसाइज से शुरू हुआ।
चेक-इन क्षेत्र में काल्पनिक IED की पुष्टि के बाद बम निष्क्रियकरण दस्ते ने 'रेंडर सेफ प्रोसीजर' सफलतापूर्वक पूरा किया।
कार्गो क्षेत्र में राज्य बम निष्क्रियकरण दस्ते ने डमी IED खोजकर अपनी तत्परता साबित की।
CISF , भारतीय वायुसेना , पुणे पुलिस , SDRF सहित एक दर्जन से अधिक एजेंसियों ने अभ्यास में भाग लिया।

पुणे एयरपोर्ट पर 24 अक्टूबर 2026 को भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने संयुक्त रूप से एक व्यापक मॉक ड्रिल आयोजित की, जिसका उद्देश्य बम खतरे की स्थिति में विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों की प्रतिक्रिया क्षमता और आपसी समन्वय को परखना था। यह वार्षिक सुरक्षा अभ्यास एयरपोर्ट की आपातकालीन प्रणाली का अहम हिस्सा है।

मॉक ड्रिल का क्रमिक घटनाक्रम

अभ्यास की शुरुआत सुबह 11 बजे AAI के प्रशासनिक भवन के कॉन्फ्रेंस हॉल में टेबलटॉप एक्सरसाइज से हुई। इसमें काल्पनिक बम खतरे की परिस्थितियों, विभिन्न एजेंसियों की जिम्मेदारियों और संचार व्यवस्था पर विस्तृत चर्चा की गई।

सुबह 11:30 बजे टर्मिनल बिल्डिंग में व्यावहारिक मॉक ड्रिल आरंभ हुई। काल्पनिक परिदृश्य में एक अज्ञात व्यक्ति ने इंडिगो प्रबंधक को चेक-इन क्षेत्र में एक लावारिस बैग की सूचना दी, जिसमें विस्फोटक सामग्री होने का संदेह जताया गया था।

त्वरित प्रतिक्रिया और सुरक्षा उपकरणों का प्रयोग

सूचना मिलते ही CISF का सुरक्षा नियंत्रण कक्ष अलर्ट हो गया और क्विक रिएक्शन टीम ने प्रभावित क्षेत्र को तुरंत खाली करा दिया। यात्रियों, कर्मचारियों और अन्य लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया।

संदिग्ध बैग को ब्लास्ट इनहिबिटर से ढककर पूरे क्षेत्र को सील किया गया। इसके बाद डॉग स्क्वॉड, एक्सप्लोसिव वेपर डिटेक्टर (EVD), नॉन-लीनियर जंक्शन डिटेक्टर (NLJD), इलेक्ट्रॉनिक स्टेथोस्कोप और हैंडहेल्ड रियल टाइम व्यूइंग सिस्टम जैसे अत्याधुनिक उपकरणों से जाँच की गई।

IED की पुष्टि और बम निष्क्रियकरण प्रक्रिया

अभ्यास के तहत बैग में काल्पनिक IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) की मौजूदगी की पुष्टि के बाद बम थ्रेट असेसमेंट कमेटी की बैठक बुलाई गई और इसे विशेष खतरे की श्रेणी में घोषित किया गया।

बम निष्क्रियकरण दस्ते ने टेलीस्कोपिक मैनिपुलेटर की सहायता से संदिग्ध बैग को संभाला और उसे विशेष सुरक्षा कंटेनर में रखकर 'रेंडर सेफ प्रोसीजर' सफलतापूर्वक पूरा किया। बैग को इसके बाद निर्धारित सुरक्षित निस्तारण क्षेत्र में ले जाया गया।

कार्गो क्षेत्र में राज्य बम दस्ते की परीक्षा

मॉक ड्रिल के अंतर्गत कार्गो क्षेत्र में भी एक डमी IED रखा गया था। इंडिया पोस्ट के निकट स्थित इस क्षेत्र में राज्य बम निष्क्रियकरण दस्ते ने विस्फोटक को सफलतापूर्वक खोज निकाला, जिससे उसकी तत्परता और तकनीकी क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन हुआ।

भागीदार एजेंसियाँ और महत्व

इस अभ्यास में CISF, भारतीय वायुसेना, पुणे पुलिस, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), अग्निशमन सेवा, कस्टम विभाग, इमिग्रेशन, स्वास्थ्य विभाग, एयरलाइन कंपनियों और एयरपोर्ट से जुड़े अन्य हितधारकों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

अधिकारियों के अनुसार, इस तरह के मॉक अभ्यास एयरपोर्ट सुरक्षा प्रणाली का अनिवार्य अंग हैं, जो सुरक्षा एजेंसियों की संचालन क्षमता, आपसी समन्वय और किसी भी वास्तविक आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने की तैयारी को सुदृढ़ करते हैं। गौरतलब है कि राष्ट्रीय स्तर पर एयरपोर्ट सुरक्षा के लिए ऐसे वार्षिक अभ्यास अनिवार्य किए गए हैं, ताकि हर परिदृश्य में प्रतिक्रिया को चाक-चौबंद रखा जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ यात्री संख्या के साथ सुरक्षा जोखिम भी बढ़ रहे हैं। एक दर्जन से अधिक एजेंसियों की भागीदारी समन्वय की जटिलता को दर्शाती है — असली आपदा में यही समन्वय निर्णायक होता है। सवाल यह है कि वार्षिक अभ्यास से मिली सीख को क्या संस्थागत रूप दिया जाता है, या यह सिर्फ 'टिक-द-बॉक्स' कवायद बनकर रह जाती है। जब तक अभ्यास के परिणामों की समीक्षा और कमियों का सार्वजनिक जवाबदेही नहीं होती, इनकी वास्तविक उपयोगिता सीमित रहती है।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुणे एयरपोर्ट पर मॉक ड्रिल क्यों आयोजित की गई?
यह वार्षिक सुरक्षा अभ्यास बम खतरे जैसी आपात स्थिति में विभिन्न एजेंसियों की प्रतिक्रिया, समन्वय और तैयारी को परखने के लिए आयोजित किया गया। AAI और CISF के लिए ऐसे अभ्यास राष्ट्रीय विमानन सुरक्षा मानकों का अनिवार्य हिस्सा हैं।
मॉक ड्रिल में किन एजेंसियों ने भाग लिया?
इस अभ्यास में CISF, भारतीय वायुसेना, पुणे पुलिस, SDRF, अग्निशमन सेवा, कस्टम विभाग, इमिग्रेशन, स्वास्थ्य विभाग, एयरलाइन कंपनियाँ और अन्य हितधारक शामिल थे। कुल मिलाकर एक दर्जन से अधिक संस्थाओं ने अभ्यास में हिस्सा लिया।
IED की पुष्टि के बाद क्या प्रक्रिया अपनाई गई?
बैग में काल्पनिक IED की पुष्टि होने पर बम थ्रेट असेसमेंट कमेटी की बैठक बुलाई गई और इसे विशेष खतरे की श्रेणी में घोषित किया गया। इसके बाद बम निष्क्रियकरण दस्ते ने टेलीस्कोपिक मैनिपुलेटर से 'रेंडर सेफ प्रोसीजर' पूरा किया और बैग को सुरक्षित निस्तारण क्षेत्र में भेजा।
मॉक ड्रिल में किन सुरक्षा उपकरणों का उपयोग हुआ?
अभ्यास में डॉग स्क्वॉड, एक्सप्लोसिव वेपर डिटेक्टर (EVD), नॉन-लीनियर जंक्शन डिटेक्टर (NLJD), इलेक्ट्रॉनिक स्टेथोस्कोप, हैंडहेल्ड रियल टाइम व्यूइंग सिस्टम और ब्लास्ट इनहिबिटर का उपयोग किया गया। ये उपकरण वास्तविक बम खतरे की स्थिति में भी प्रयोग में आते हैं।
क्या कार्गो क्षेत्र में भी मॉक ड्रिल हुई?
हाँ, कार्गो क्षेत्र में इंडिया पोस्ट के निकट एक डमी IED रखा गया था जिसे राज्य बम निष्क्रियकरण दस्ते ने सफलतापूर्वक खोज निकाला। इससे दस्ते की तत्परता और तकनीकी दक्षता का प्रदर्शन हुआ।
राष्ट्र प्रेस
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