बांग्लादेश में खसरा प्रकोप: 2 और बच्चों की मौत, 15 मार्च से अब तक 585 मासूमों की जान गई
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा। स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशालय (डीजीएचएस) के अनुसार, 31 मई 2026 को जारी ताज़ा आँकड़ों में 2 और बच्चों की मौत की पुष्टि हुई है, जिससे 15 मार्च 2026 से अब तक कुल मृतक संख्या 585 हो गई है। ये दोनों मौतें खसरे के मिलते-जुलते लक्षणों के कारण शनिवार से रविवार सुबह 8 बजे के बीच हुईं।
मृत्यु और संक्रमण के ताज़ा आँकड़े
डीजीएचएस के मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, कुल 585 मौतों में से 495 खसरे के मिलते-जुलते लक्षणों से हुई हैं, जबकि 90 मौतें खसरे से पुष्ट मानी गई हैं। पिछले 24 घंटों में 1,324 नए संदिग्ध मामले सामने आए, जिससे कुल संदिग्ध मामलों की संख्या बढ़कर 70,936 हो गई। इसी अवधि में 53 नए पुष्ट मामले दर्ज हुए और पुष्ट मामलों की कुल संख्या 9,049 पहुँच गई।
गौरतलब है कि इसी हफ्ते बुधवार और गुरुवार को प्रत्येक दिन 5-5 बच्चों की जान गई, जबकि मंगलवार को एकल दिन में 10 मौतें दर्ज हुई थीं — जो इस प्रकोप के दौरान की सबसे तेज़ एकल-दिवसीय वृद्धि में से एक है।
अस्पताल में भर्ती और ठीक होने की स्थिति
15 मार्च 2026 से अब तक खसरे के मिलते-जुलते लक्षणों वाले 56,886 बच्चों को देशभर के अस्पतालों में भर्ती कराया गया। इनमें से 52,841 बच्चे उपचार के बाद स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। हालाँकि, अभी भी बड़ी संख्या में बच्चे चिकित्सा निगरानी में हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया और टीकाकरण अभियान
बढ़ते संक्रमण को देखते हुए बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने अप्रैल 2026 में देशव्यापी आपातकालीन खसरा-रूबेला टीकाकरण अभियान शुरू किया। इस अभियान के तहत 6 महीने से 5 वर्ष तक के लगभग 1 करोड़ 80 लाख बच्चों को टीका लगाने का लक्ष्य रखा गया। यह कार्यक्रम स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), यूनिसेफ और वैक्सीन एवं प्रतिरक्षण के लिए वैश्विक गठबंधन (GAVI) के सहयोग से संचालित किया जा रहा है।
यूनिसेफ की चेतावनी और जवाबदेही का सवाल
यह प्रकोप ऐसे समय में और गहरा हुआ है जब यूनिसेफ ने हाल ही में दावा किया कि अंतरिम सरकार के 18 महीने के कार्यकाल के दौरान उसने बार-बार चेताया था कि यदि समय पर उचित कदम नहीं उठाए गए तो परिणाम गंभीर हो सकते हैं। यह बयान सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र की तैयारी और नीतिगत प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करता है।
आगे क्या
विशेषज्ञों का मानना है कि टीकाकरण अभियान की गति और कवरेज ही इस प्रकोप की दिशा तय करेगी। डीजीएचएस प्रतिदिन आँकड़े जारी कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठन स्थिति पर करीबी नज़र बनाए हुए हैं। बांग्लादेश के लिए यह संकट सार्वजनिक स्वास्थ्य ढाँचे की दीर्घकालिक मज़बूती की अनिवार्यता को रेखांकित करता है।