बांग्लादेश में खसरे का कहर: मई में 309 बच्चों की मौत, कुल मृतकों का आंकड़ा 594 पार
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश में खसरे के प्रकोप ने भयावह रूप ले लिया है, जहाँ 15 मार्च 2026 से अब तक 594 बच्चों की जान जा चुकी है। अकेले मई महीने में खसरे और इससे जुड़े लक्षणों के कारण 309 मासूमों की मौत हुई, जबकि सोमवार से मंगलवार सुबह 8 बजे तक के 24 घंटों में छह और बच्चों ने दम तोड़ दिया। आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि यह दक्षिण एशिया में हाल के वर्षों का सबसे गंभीर खसरा संकट बनता जा रहा है।
मुख्य घटनाक्रम और ताज़ा आंकड़े
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) के मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, खसरे से मिलते-जुलते लक्षणों से मरने वालों की संख्या 504 तक पहुँच गई है, जिन्हें संदिग्ध श्रेणी में रखा गया है। वहीं 90 मौतों की वजह सीधे तौर पर खसरा मानी गई है। पिछले 24 घंटों में दर्ज छह नई मौतों को भी फ़िलहाल संदिग्ध श्रेणी में रखा गया है।
नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में 1,292 नए संदिग्ध मामले सामने आए, जिससे कुल संदिग्ध मामलों की संख्या बढ़कर 73,362 हो गई है। इसी अवधि में 42 नए पुष्ट मामले दर्ज हुए और कुल लैब-कन्फर्म संक्रमणों का आँकड़ा 9,136 तक पहुँच गया।
अस्पतालों पर दबाव
15 मार्च से अब तक खसरे जैसे लक्षणों वाले कुल 59,106 मरीज़ों को अस्पतालों में भर्ती कराया जा चुका है, जिनमें से 54,812 स्वस्थ होकर लौट चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मार्च से मई 2026 के बीच बांग्लादेश में 62,000 से अधिक संदिग्ध और 8,000 से अधिक लैब-पुष्ट मामले दर्ज किए जा चुके हैं।
वैक्सीनेशन में चूक सबसे बड़ा कारण
बांग्लादेशी अंग्रेज़ी दैनिक डेली सन की रिपोर्ट के अनुसार, मरने वाले अधिकांश बच्चे पाँच वर्ष से कम उम्र के थे और कई को खसरे का पूरा वैक्सीनेशन कोर्स नहीं मिला था। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूनिसेफ ने भी इस संकट के पीछे टीकाकरण कवरेज में आई गिरावट को मुख्य कारण बताया है।
क्यों इतना घातक है खसरा
खसरा दुनिया की सबसे तेज़ी से फैलने वाली वायरल बीमारियों में से एक है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक संक्रमित बच्चा अपने आसपास के 90 फीसदी ऐसे बच्चों में वायरस फैला सकता है जिन्हें टीका न लगा हो। यही कारण है कि कम टीकाकरण वाले इलाकों में संक्रमण विस्फोटक रूप ले लेता है।
आगे क्या
स्वास्थ्य अधिकारियों ने प्रभावित ज़िलों में आपातकालीन टीकाकरण अभियान तेज़ करने के संकेत दिए हैं। हालाँकि, जब तक रूटीन इम्यूनाइज़ेशन में आई कमी की भरपाई नहीं होती, तब तक मामलों में गिरावट की उम्मीद कम है।