पिथौरागढ़ में बाढ़ का संकट: बिल्जू नदी उफान पर, 80-90 परिवार कटे; ग्रामीण जान जोखिम में डालकर पार कर रहे नदी
सारांश
मुख्य बातें
पिथौरागढ़ में 11 जुलाई को भारी मानसूनी बारिश के चलते मुनस्यारी के मल्ला जोहार क्षेत्र में बिल्जू नदी उफान पर आ गई, जिससे मिलम को जोड़ने वाला मुख्य सड़क मार्ग बंद हो गया है और लगभग 80 से 90 परिवारों का बाकी दुनिया से संपर्क टूट गया है। बुनियादी ज़रूरतों के लिए ग्रामीण उफनती नदी को जान जोखिम में डालकर पार करने को विवश हैं।
मुख्य घटनाक्रम
लगातार हो रही भारी बारिश से बिल्जू नदी का जलस्तर खतरनाक स्तर तक बढ़ गया, जिसने मिलम जाने वाले एकमात्र सड़क मार्ग को अवरुद्ध कर दिया। ग्रामीणों के अनुसार, राशन, दैनिक उपयोग का सामान और अन्य आवश्यक वस्तुएँ नदी के दूसरी ओर पहुँचाना अब बेहद कठिन हो गया है। यदि कोई चिकित्सा आपात स्थिति उत्पन्न हो, तो नदी पार करना जीवन के लिए गंभीर खतरा बन जाता है।
टूटी ट्रॉली, अधूरा वादा
ग्रामीणों ने बताया कि पिछले वर्ष अगस्त में भारी बारिश के दौरान नदी पार कराने वाली झूला ट्रॉली बह गई थी। तब से अब तक न तो ट्रॉली की मरम्मत की गई और न ही स्थायी पुल का निर्माण शुरू हुआ। मजबूरी में ग्रामीणों ने स्वयं लकड़ियों से अस्थायी पुल तैयार किया है, जिसके सहारे वे प्रतिदिन उफनती नदी पार कर रहे हैं।
प्रशासन की अपील, ग्रामीणों की माँग
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि मौसम सामान्य होने तक अनावश्यक यात्रा से बचें और नदी-नाले पार करने का जोखिम न उठाएँ। दूसरी ओर, ग्रामीणों ने माँग की है कि प्रभावित क्षेत्र में जल्द से जल्द सुरक्षित पुल या कोई वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए और संपर्क मार्ग बहाल किया जाए।
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब पूरे उत्तराखंड में मानसून सक्रिय है और सीमांत क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं। मल्ला जोहार जैसे दूरस्थ इलाकों में बुनियादी ढाँचे की कमी हर मानसून में उजागर होती है — और इस बार भी स्थिति अलग नहीं है। स्वास्थ्य सेवा, राशन आपूर्ति और आवाजाही — तीनों पर एक साथ संकट है।
क्या होगा आगे
ग्रामीणों की माँग है कि प्रशासन तत्काल एक सुरक्षित अस्थायी पुल या वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करे। गौरतलब है कि यदि मानसून की बारिश इसी तरह जारी रही, तो अस्थायी लकड़ी के पुल के भी बह जाने का खतरा बना रहेगा, जिससे परिवारों का संकट और गहरा हो सकता है।