11 जुलाई 2026
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पिथौरागढ़ में बाढ़ का संकट: बिल्जू नदी उफान पर, 80-90 परिवार कटे; ग्रामीण जान जोखिम में डालकर पार कर रहे नदी

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पिथौरागढ़ में बाढ़ का संकट: बिल्जू नदी उफान पर, 80-90 परिवार कटे; ग्रामीण जान जोखिम में डालकर पार कर रहे नदी

सारांश

पिथौरागढ़ के मुनस्यारी में बिल्जू नदी के उफान ने मिलम मार्ग बंद कर दिया है और 80-90 परिवार कट गए हैं। पिछले साल बही झूला ट्रॉली की मरम्मत नहीं हुई, न पुल बना — ग्रामीण खुद बनाए लकड़ी के पुल से जान जोखिम में डालकर नदी पार कर रहे हैं।

मुख्य बातें

पिथौरागढ़ के मुनस्यारी में बिल्जू नदी के उफान से मिलम जाने वाला मुख्य सड़क मार्ग 11 जुलाई को बंद हो गया।
मल्ला जोहार क्षेत्र के लगभग 80 से 90 परिवार बाकी दुनिया से कट गए हैं।
पिछले वर्ष अगस्त में बही झूला ट्रॉली की अब तक न मरम्मत हुई, न स्थायी पुल बना।
ग्रामीणों ने स्वयं लकड़ियों का अस्थायी पुल बनाकर आवाजाही जारी रखी है।
प्रशासन ने अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की; ग्रामीणों ने स्थायी पुल और संपर्क मार्ग बहाल करने की माँग की।

पिथौरागढ़ में 11 जुलाई को भारी मानसूनी बारिश के चलते मुनस्यारी के मल्ला जोहार क्षेत्र में बिल्जू नदी उफान पर आ गई, जिससे मिलम को जोड़ने वाला मुख्य सड़क मार्ग बंद हो गया है और लगभग 80 से 90 परिवारों का बाकी दुनिया से संपर्क टूट गया है। बुनियादी ज़रूरतों के लिए ग्रामीण उफनती नदी को जान जोखिम में डालकर पार करने को विवश हैं।

मुख्य घटनाक्रम

लगातार हो रही भारी बारिश से बिल्जू नदी का जलस्तर खतरनाक स्तर तक बढ़ गया, जिसने मिलम जाने वाले एकमात्र सड़क मार्ग को अवरुद्ध कर दिया। ग्रामीणों के अनुसार, राशन, दैनिक उपयोग का सामान और अन्य आवश्यक वस्तुएँ नदी के दूसरी ओर पहुँचाना अब बेहद कठिन हो गया है। यदि कोई चिकित्सा आपात स्थिति उत्पन्न हो, तो नदी पार करना जीवन के लिए गंभीर खतरा बन जाता है।

टूटी ट्रॉली, अधूरा वादा

ग्रामीणों ने बताया कि पिछले वर्ष अगस्त में भारी बारिश के दौरान नदी पार कराने वाली झूला ट्रॉली बह गई थी। तब से अब तक न तो ट्रॉली की मरम्मत की गई और न ही स्थायी पुल का निर्माण शुरू हुआ। मजबूरी में ग्रामीणों ने स्वयं लकड़ियों से अस्थायी पुल तैयार किया है, जिसके सहारे वे प्रतिदिन उफनती नदी पार कर रहे हैं।

प्रशासन की अपील, ग्रामीणों की माँग

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि मौसम सामान्य होने तक अनावश्यक यात्रा से बचें और नदी-नाले पार करने का जोखिम न उठाएँ। दूसरी ओर, ग्रामीणों ने माँग की है कि प्रभावित क्षेत्र में जल्द से जल्द सुरक्षित पुल या कोई वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए और संपर्क मार्ग बहाल किया जाए।

आम जनता पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब पूरे उत्तराखंड में मानसून सक्रिय है और सीमांत क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं। मल्ला जोहार जैसे दूरस्थ इलाकों में बुनियादी ढाँचे की कमी हर मानसून में उजागर होती है — और इस बार भी स्थिति अलग नहीं है। स्वास्थ्य सेवा, राशन आपूर्ति और आवाजाही — तीनों पर एक साथ संकट है।

क्या होगा आगे

ग्रामीणों की माँग है कि प्रशासन तत्काल एक सुरक्षित अस्थायी पुल या वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करे। गौरतलब है कि यदि मानसून की बारिश इसी तरह जारी रही, तो अस्थायी लकड़ी के पुल के भी बह जाने का खतरा बना रहेगा, जिससे परिवारों का संकट और गहरा हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न मरम्मत हुई, न पुल बना। प्रशासन की 'सावधान रहें' वाली अपील उस ज़िम्मेदारी का विकल्प नहीं है जो राज्य सरकार पर है। जब तक सीमांत गाँवों में स्थायी संपर्क अवसंरचना को प्राथमिकता नहीं दी जाती, हर मानसून में यही दृश्य दोहराया जाएगा और हर बार ग्रामीण खुद ही अपनी जान बचाने का इंतज़ाम करेंगे।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पिथौरागढ़ में बाढ़ से कितने परिवार प्रभावित हुए हैं?
मुनस्यारी के मल्ला जोहार क्षेत्र में बिल्जू नदी के उफान से लगभग 80 से 90 परिवारों का संपर्क टूट गया है। मिलम जाने वाला मुख्य सड़क मार्ग बंद होने के कारण ये परिवार बाकी दुनिया से पूरी तरह कट गए हैं।
मल्ला जोहार में पुल क्यों नहीं है?
ग्रामीणों के अनुसार, पिछले वर्ष अगस्त में भारी बारिश के दौरान नदी पार कराने वाली झूला ट्रॉली बह गई थी। तब से आज तक न तो ट्रॉली की मरम्मत कराई गई और न ही स्थायी पुल का निर्माण किया गया।
ग्रामीण अभी नदी कैसे पार कर रहे हैं?
ग्रामीणों ने स्वयं लकड़ियों से एक अस्थायी पुल तैयार किया है, जिसके सहारे वे उफनती बिल्जू नदी पार कर रहे हैं। यह व्यवस्था अत्यंत जोखिम भरी है, विशेषकर यदि कोई चिकित्सा आपात स्थिति उत्पन्न हो।
प्रशासन ने इस स्थिति में क्या कदम उठाए हैं?
स्थानीय प्रशासन ने लोगों से मौसम सामान्य होने तक अनावश्यक यात्रा से बचने और नदी-नाले पार करने का जोखिम न उठाने की अपील की है। हालाँकि, स्थायी पुल या वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था को लेकर अभी तक कोई ठोस घोषणा नहीं हुई है।
ग्रामीणों की मुख्य माँग क्या है?
ग्रामीणों ने माँग की है कि प्रभावित क्षेत्र में जल्द से जल्द एक सुरक्षित स्थायी पुल या वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए और मिलम मार्ग का संपर्क बहाल किया जाए। उनका कहना है कि हर मानसून में यही स्थिति दोहराई जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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