लाहौल-स्पीति भूस्खलन: जाहलमा नाले के पास संसारी-तिन्दी-तांदी मार्ग बंद, सैकड़ों वाहन फंसे
सारांश
मुख्य बातें
लाहौल-स्पीति ज़िले में जाहलमा नाले के समीप दरकी पहाड़ी से 28 मई 2026 को लगातार भारी भूस्खलन जारी है, जिसके कारण संसारी-तिन्दी-तांदी सड़क मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है। पिछले दो दिनों से बड़ी-बड़ी चट्टानें और मलबा गिरने के कारण जाहलमा पुल पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है और सैकड़ों वाहन मार्ग के दोनों छोर पर फंसे हुए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
दरकी पहाड़ी से मलबे का गिरना लगातार जारी है, जिससे जाहलमा पुल के क्षतिग्रस्त होने की आशंका बढ़ती जा रही है। सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जिला प्रशासन ने समूचे मार्ग को सभी प्रकार के वाहनों के लिए बंद कर दिया है। कई ट्रक चालक 24 घंटे से अधिक समय से फंसे हुए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब लाहौल-स्पीति की ऊँचाई वाली सड़कें मौसम की पहली मार से जूझ रही हैं।
प्रशासन और बीआरओ की प्रतिक्रिया
उपायुक्त लाहौल-स्पीति किरण भड़ाना और उपमंडल अधिकारी मौके पर पहुँचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के अधिकारियों को तत्काल मार्ग बहाल करने के निर्देश दिए। बीआरओ की टीमें वैकल्पिक मार्ग खोलने और मलबा हटाने में जुटी हैं, लेकिन लगातार पत्थर गिरने के कारण कार्य में बाधा आ रही है।
फंसे यात्रियों की स्थिति
फंसे हुए यात्री सतीश कुमार ने बताया, 'हम सीमेंट लेकर जा रहे थे। पूरे दिन ट्रैवल करने के बाद यहाँ पहुँचे। सुबह पहाड़ी से पत्थर गिरा और रोड ब्लॉक हो गया। बड़ी गाड़ियों के लिए समस्या बहुत ज़्यादा है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि कल शाम तक कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन अभी पक्का कुछ नहीं है।' एक अन्य यात्री ने कहा, 'पुल क्षतिग्रस्त होने का खतरा है। हम जंगलों के बीच फंस गए हैं। खाने-पीने की सामग्री भी कम हो रही है। छोटी गाड़ियों को कल शाम तक निकाला जा सकता है, जबकि बड़ी गाड़ियों के लिए 10 से 15 दिन लग सकते हैं।' कुछ यात्री अपनी जान जोखिम में डालकर जाहलमा नाले को पैदल पार करने की कोशिश कर रहे हैं।
आम जनता पर असर
पांगी, तिन्दी और उदयपुर की ओर जाने वाले मालवाहक और यात्री वाहनों पर इस बंदी का सर्वाधिक असर पड़ा है। सड़क के दोनों छोर पर भारी वाहनों की लंबी कतारें लगी हुई हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तुरंत सुरक्षित आवाजाही बहाल करने की माँग की है। गौरतलब है कि लाहौल-स्पीति की दुर्गम भौगोलिक स्थिति और ऊँचाई वाली सड़कें अक्सर ऐसी आपदाओं की चपेट में आती रही हैं।
क्या होगा आगे
प्रशासन के अनुसार यदि भूस्खलन थमा तो सड़क को चरणबद्ध तरीके से खोलने की योजना है — पहले हल्के वाहनों के लिए, फिर भारी वाहनों के लिए। बीआरओ और जिला प्रशासन क्षेत्र पर लगातार निगरानी बनाए हुए हैं। जाहलमा पुल और आसपास का इलाका अभी भी खतरे की जद में बना हुआ है।