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लाहौल-स्पीति भूस्खलन: जाहलमा नाले के पास संसारी-तिन्दी-तांदी मार्ग बंद, सैकड़ों वाहन फंसे

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लाहौल-स्पीति भूस्खलन: जाहलमा नाले के पास संसारी-तिन्दी-तांदी मार्ग बंद, सैकड़ों वाहन फंसे

सारांश

लाहौल घाटी में जाहलमा नाले के पास दो दिनों से लगातार भूस्खलन जारी है — संसारी-तिन्दी-तांदी मार्ग पूरी तरह बंद, जाहलमा पुल खतरे में, और सैकड़ों वाहन दोनों ओर फंसे हैं। बड़ी गाड़ियों के लिए राहत में 10 से 15 दिन लग सकते हैं।

मुख्य बातें

जाहलमा नाले के पास दरकी पहाड़ी से पिछले दो दिनों से लगातार भारी भूस्खलन जारी है।
संसारी-तिन्दी-तांदी सड़क मार्ग सभी प्रकार के वाहनों के लिए पूरी तरह बंद; जाहलमा पुल को नुकसान का खतरा।
सैकड़ों वाहन फंसे; कई ट्रक चालक 24 घंटे से अधिक समय से प्रतीक्षारत।
उपायुक्त किरण भड़ाना ने मौके का दौरा किया; बीआरओ को तत्काल मार्ग बहाली के निर्देश दिए।
छोटी गाड़ियों के लिए राहत अगले दिन शाम तक संभव; बड़े वाहनों के लिए 10 से 15 दिन लगने का अनुमान।

लाहौल-स्पीति ज़िले में जाहलमा नाले के समीप दरकी पहाड़ी से 28 मई 2026 को लगातार भारी भूस्खलन जारी है, जिसके कारण संसारी-तिन्दी-तांदी सड़क मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है। पिछले दो दिनों से बड़ी-बड़ी चट्टानें और मलबा गिरने के कारण जाहलमा पुल पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है और सैकड़ों वाहन मार्ग के दोनों छोर पर फंसे हुए हैं।

मुख्य घटनाक्रम

दरकी पहाड़ी से मलबे का गिरना लगातार जारी है, जिससे जाहलमा पुल के क्षतिग्रस्त होने की आशंका बढ़ती जा रही है। सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जिला प्रशासन ने समूचे मार्ग को सभी प्रकार के वाहनों के लिए बंद कर दिया है। कई ट्रक चालक 24 घंटे से अधिक समय से फंसे हुए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब लाहौल-स्पीति की ऊँचाई वाली सड़कें मौसम की पहली मार से जूझ रही हैं।

प्रशासन और बीआरओ की प्रतिक्रिया

उपायुक्त लाहौल-स्पीति किरण भड़ाना और उपमंडल अधिकारी मौके पर पहुँचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के अधिकारियों को तत्काल मार्ग बहाल करने के निर्देश दिए। बीआरओ की टीमें वैकल्पिक मार्ग खोलने और मलबा हटाने में जुटी हैं, लेकिन लगातार पत्थर गिरने के कारण कार्य में बाधा आ रही है।

फंसे यात्रियों की स्थिति

फंसे हुए यात्री सतीश कुमार ने बताया, 'हम सीमेंट लेकर जा रहे थे। पूरे दिन ट्रैवल करने के बाद यहाँ पहुँचे। सुबह पहाड़ी से पत्थर गिरा और रोड ब्लॉक हो गया। बड़ी गाड़ियों के लिए समस्या बहुत ज़्यादा है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि कल शाम तक कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन अभी पक्का कुछ नहीं है।' एक अन्य यात्री ने कहा, 'पुल क्षतिग्रस्त होने का खतरा है। हम जंगलों के बीच फंस गए हैं। खाने-पीने की सामग्री भी कम हो रही है। छोटी गाड़ियों को कल शाम तक निकाला जा सकता है, जबकि बड़ी गाड़ियों के लिए 10 से 15 दिन लग सकते हैं।' कुछ यात्री अपनी जान जोखिम में डालकर जाहलमा नाले को पैदल पार करने की कोशिश कर रहे हैं।

आम जनता पर असर

पांगी, तिन्दी और उदयपुर की ओर जाने वाले मालवाहक और यात्री वाहनों पर इस बंदी का सर्वाधिक असर पड़ा है। सड़क के दोनों छोर पर भारी वाहनों की लंबी कतारें लगी हुई हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तुरंत सुरक्षित आवाजाही बहाल करने की माँग की है। गौरतलब है कि लाहौल-स्पीति की दुर्गम भौगोलिक स्थिति और ऊँचाई वाली सड़कें अक्सर ऐसी आपदाओं की चपेट में आती रही हैं।

क्या होगा आगे

प्रशासन के अनुसार यदि भूस्खलन थमा तो सड़क को चरणबद्ध तरीके से खोलने की योजना है — पहले हल्के वाहनों के लिए, फिर भारी वाहनों के लिए। बीआरओ और जिला प्रशासन क्षेत्र पर लगातार निगरानी बनाए हुए हैं। जाहलमा पुल और आसपास का इलाका अभी भी खतरे की जद में बना हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बंद सड़कें, फंसे वाहन और बीआरओ के आश्वासन। असली सवाल यह है कि दरकी पहाड़ी जैसे चिह्नित संवेदनशील क्षेत्रों में स्थायी ढलान-स्थिरीकरण उपाय क्यों नहीं किए गए। जाहलमा पुल की भेद्यता — जो इस क्षेत्र की एकमात्र जीवन-रेखा है — वर्षों से ज्ञात है, फिर भी निवारक बुनियादी ढाँचे में निवेश प्रतिक्रियात्मक रहा है, न कि सक्रिय। जब तक संवेदनशील मार्गों पर पूर्व-मानसून भूस्खलन जोखिम मूल्यांकन और रोकथाम कार्य को प्राथमिकता नहीं दी जाती, तब तक यह चक्र हर साल दोहराता रहेगा।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लाहौल-स्पीति में जाहलमा नाले के पास भूस्खलन क्यों हो रहा है?
जाहलमा नाले के समीप दरकी पहाड़ी की भूगर्भीय संरचना कमज़ोर है और मानसून-पूर्व नमी के कारण ढलानें अस्थिर हो जाती हैं। लाहौल-स्पीति की ऊँचाई वाली सड़कें अक्सर इस तरह की घटनाओं की चपेट में आती हैं।
संसारी-तिन्दी-तांदी मार्ग कब तक खुलेगा?
प्रशासन के अनुसार हल्के वाहनों के लिए मार्ग अगले दिन शाम तक बहाल किया जा सकता है, जबकि भारी वाहनों के लिए 10 से 15 दिन लगने का अनुमान है। यह समयसीमा भूस्खलन के थमने पर निर्भर करती है।
जाहलमा पुल को कितना खतरा है?
पुल के ठीक ऊपर की पहाड़ी से लगातार पत्थर और मलबा गिर रहा है, जिससे पुल के क्षतिग्रस्त होने की आशंका बढ़ गई है। बीआरओ और जिला प्रशासन पुल पर लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।
फंसे यात्रियों और वाहनों के लिए क्या राहत उपाय किए जा रहे हैं?
उपायुक्त किरण भड़ाना ने बीआरओ को तत्काल मार्ग बहाली के निर्देश दिए हैं। बीआरओ की टीमें मलबा हटाने और वैकल्पिक मार्ग खोलने में लगी हैं। प्रशासन ने फंसे यात्रियों को आश्वासन दिया है कि प्राथमिकता के आधार पर हल्के वाहनों को पहले निकाला जाएगा।
इस भूस्खलन से कौन-से क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं?
पांगी, तिन्दी और उदयपुर की ओर जाने वाले मालवाहक और यात्री वाहन सर्वाधिक प्रभावित हैं। सड़क के दोनों छोर पर भारी वाहनों की लंबी कतारें लगी हैं और स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला भी बाधित हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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