यूएन महासभा अध्यक्ष एनालेना बैरबॉक की चीन यात्रा: बहुपक्षवाद और यूएन सुधार पर दिया अहम बयान
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र महासभा की 80वीं सत्र की अध्यक्ष एनालेना बैरबॉक ने अप्रैल 2026 में चीन की आधिकारिक यात्रा की और यात्रा के समापन पर एक विशेष साक्षात्कार में बहुपक्षवाद की रक्षा, यूएन की प्रासंगिकता और चीन की भूमिका पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वर्तमान अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था गंभीर दबाव में है और इस संकट के दौर में संयुक्त राष्ट्र को और अधिक सशक्त बनाना समय की माँग है।
बहुपक्षवाद पर बढ़ता दबाव
बैरबॉक ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिदृश्य में अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और बहुपक्षवाद दोनों पर भारी दबाव है। उनके अनुसार, इस पृष्ठभूमि में यूएन महासभा अध्यक्ष का प्रमुख दायित्व यूएन चार्टर और संयुक्त राष्ट्र के तीन मूल स्तंभों — शांति व सुरक्षा, सतत विकास और मानवाधिकार — की रक्षा करना है। उन्होंने सभी देशों से एकजुट होकर बहुपक्षवाद की सुरक्षा की अपील की।
चीन की भूमिका और योगदान
बैरबॉक ने रेखांकित किया कि चीन न केवल संयुक्त राष्ट्र के संस्थापक सदस्यों में से एक है, बल्कि बहुपक्षवाद के सबसे मज़बूत समर्थकों में भी शामिल है। वित्तीय दृष्टि से चीन वर्तमान में यूएन को सर्वाधिक योगदान देने वाले देशों में से एक है। इसके अतिरिक्त, चीन सक्रिय रूप से यूएन शांति अभियानों में भाग लेता है और सतत विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति में भी अग्रणी भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि चीन अपने वादों का पालन करता है और विभिन्न देशों को परस्पर सहयोग के लिए प्रोत्साहित करता है।
संयुक्त राष्ट्र की अपरिहार्यता
यूएन की भूमिका पर बात करते हुए बैरबॉक ने कहा कि आज के दौर में संयुक्त राष्ट्र पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने एक ठोस उदाहरण दिया — पिछले वर्ष 12 करोड़ से अधिक लोग यूएन द्वारा उपलब्ध कराए गए अनाज पर निर्भर रहे। उन्होंने यह भी कहा कि वायु उड़ान सुरक्षा की निगरानी भी यूएन के अधीन एक संस्था करती है, जिसके बिना हवाई यात्रा संभव नहीं होती। उनके शब्दों में, 'यूएन को अधिक मज़बूत बनाना हम सभी के हित में है।'
सुरक्षा परिषद सुधार और दोहरे मापदंड
बैरबॉक ने यूएन सुरक्षा परिषद की केंद्रीय भूमिका की चर्चा करते हुए कहा कि उसका प्रमुख कर्तव्य शांति व सुरक्षा की रक्षा करना और दोहरे मापदंड को त्यागना है। उन्होंने कहा कि चीन समेत सुरक्षा परिषद के पाँच स्थायी सदस्य देश इस प्रक्रिया की कुंजीभूत शक्ति हैं। चीन ने हमेशा शांति की रक्षा के अपने वादे का पालन किया है और इस दिशा में नेतृत्वकारी भूमिका निभाई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि चीन आगे भी संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर एक अस्थिर विश्व में स्थिरता और निश्चितता लाने में योगदान देगा।
यूएन में सुधार की ज़रूरत
बैरबॉक ने स्वीकार किया कि संयुक्त राष्ट्र में सुधार की आवश्यकता है, लेकिन यह सुधार संस्था को कमज़ोर करने के लिए नहीं, बल्कि उसे और अधिक प्रभावी बनाने के लिए होना चाहिए। यह यात्रा ऐसे समय में हुई जब वैश्विक स्तर पर एकपक्षीय नीतियों और व्यापार तनावों के बीच बहुपक्षीय संस्थाओं की प्रासंगिकता पर बहस तेज़ हो रही है।