1 मई से ऑनलाइन गेमिंग के नए नियम लागू, सरकार ने बनाई 'गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया'

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1 मई से ऑनलाइन गेमिंग के नए नियम लागू, सरकार ने बनाई 'गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया'

सारांश

सरकार ने 1 मई 2026 से ऑनलाइन गेमिंग के नए नियम लागू करने की घोषणा की। MeitY द्वारा तैयार इस फ्रेमवर्क में 'ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया' का गठन, मनी गेम्स की पहचान प्रक्रिया और 10 साल के डिजिटल सर्टिफिकेट की व्यवस्था शामिल है। बच्चों और कमजोर वर्गों की सुरक्षा इसकी प्राथमिकता है।

Key Takeaways

  • 1 मई 2026 से देशभर में ऑनलाइन गेमिंग के नए नियम लागू होंगे।
  • MeitY ने 'प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग रूल्स 2026' को अंतिम रूप दिया है।
  • 'ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया' नई दिल्ली में स्थापित होगी, जो 5 मंत्रालयों के प्रतिनिधियों से मिलकर बनेगी।
  • मनी गेम की पहचान 90 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा।
  • मंजूर गेम्स को 10 साल तक के लिए डिजिटल सर्टिफिकेट दिया जाएगा।
  • पैसे वाले गेम्स को राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम 2025 के तहत ई-स्पोर्ट्स की मान्यता नहीं मिलेगी।

नई दिल्ली, 22 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत सरकार ने 1 मई 2026 से देशभर में ऑनलाइन गेमिंग के नए नियम लागू करने की घोषणा की है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा तैयार ये नियम 'प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग एक्ट 2025' के तहत लागू होंगे, जिसका मुख्य उद्देश्य बच्चों और कमजोर वर्गों को आर्थिक व मानसिक नुकसान से बचाना और भारत को वैश्विक गेमिंग हब बनाना है।

नए कानून की पृष्ठभूमि और जरूरत

भारत में ऑनलाइन गेमिंग उद्योग तेज़ी से विस्तार पा रहा है। अनुमानों के अनुसार, देश में 50 करोड़ से अधिक स्मार्टफोन यूज़र्स हैं और इनमें से बड़ी संख्या किसी न किसी रूप में ऑनलाइन गेमिंग से जुड़ी है। पैसे वाले गेम्स (मनी गेम्स) को लेकर लत, धोखाधड़ी और नाबालिगों की भागीदारी जैसी समस्याएं लगातार बढ़ रही थीं। इन्हीं चिंताओं के मद्देनज़र अगस्त 2025 में संसद ने 'प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग एक्ट 2025' पास किया था।

गौरतलब है कि इससे पहले ऑनलाइन गेमिंग को नियंत्रित करने के लिए कोई केंद्रीय कानून मौजूद नहीं था। राज्य स्तर पर बिखरे हुए कानून थे, जिनसे एकरूपता का अभाव था और कंपनियां अक्सर नियामक खालीपन का फायदा उठाती थीं।

ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया का गठन

नए फ्रेमवर्क के तहत 'ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया' नाम की एक स्वतंत्र नियामक संस्था बनाई जाएगी। यह संस्था नई दिल्ली में स्थित होगी और MeitY के अधीन काम करेगी।

इस अथॉरिटी में गृह मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, युवा मामले और खेल मंत्रालय तथा कानून मंत्रालय के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह बहु-मंत्रालयी संरचना इस बात का संकेत है कि सरकार ऑनलाइन गेमिंग को केवल तकनीकी नहीं, बल्कि सामाजिक, वित्तीय और कानूनी दृष्टि से भी नियंत्रित करना चाहती है।

यह अथॉरिटी ऑनलाइन मनी गेम्स की सूची तैयार करेगी, नियमों का पालन सुनिश्चित करेगी और बैंकों व कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर अवैध वित्तीय लेन-देन पर लगाम लगाएगी।

मनी गेम और सामान्य गेम की पहचान कैसे होगी

नए नियमों में यह स्पष्ट प्रक्रिया तय की गई है कि किस गेम को 'मनी गेम' माना जाएगा और किसे सामान्य गेम या ई-स्पोर्ट्स। इसके लिए तीन मुख्य मानदंड होंगे — पहला, क्या गेम खेलने के लिए पैसा लगाना पड़ता है; दूसरा, क्या जीतने पर नकद पुरस्कार मिलता है; और तीसरा, क्या गेम के इन-गेम पुरस्कारों को वास्तविक मुद्रा में बदला जा सकता है।

यह वर्गीकरण अथॉरिटी, कंपनियों के आवेदन या सरकारी अधिसूचना के आधार पर किया जाएगा और इस प्रक्रिया को 90 दिनों के भीतर पूरा करना अनिवार्य होगा, ताकि गेमिंग कंपनियों को समय पर नियामक स्पष्टता मिल सके।

रजिस्ट्रेशन और डिजिटल सर्टिफिकेट व्यवस्था

नए ढांचे में एक जोखिम-आधारित रजिस्ट्रेशन सिस्टम लागू किया गया है। रजिस्ट्रेशन केवल उन गेम्स के लिए अनिवार्य होगा, जिन्हें सरकार उच्च जोखिम श्रेणी में रखेगी — जैसे कि जहां बड़ी मात्रा में पैसा दांव पर हो या यूज़र्स को नुकसान की संभावना अधिक हो।

सरकार द्वारा मंजूर किए गए गेम्स को 10 वर्षों तक के लिए डिजिटल सर्टिफिकेट प्रदान किया जाएगा। वहीं, यह भी स्पष्ट किया गया है कि पैसे वाले गेम्स को राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम, 2025 के तहत ई-स्पोर्ट्स की मान्यता नहीं दी जाएगी।

आम जनता और गेमिंग उद्योग पर असर

इन नियमों से करोड़ों भारतीय गेमर्स, खासकर युवाओं और किशोरों पर सीधा असर पड़ेगा। जो प्लेटफॉर्म अब तक बिना किसी केंद्रीय निगरानी के काम कर रहे थे, उन्हें अब कड़े नियामक दायरे में आना होगा। गेमिंग कंपनियों को अपने व्यवसाय मॉडल में बदलाव करने होंगे।

तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो चीन ने 2021 में नाबालिगों के लिए गेमिंग पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे, जबकि यूरोपीय संघ में GDPR के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कड़ी नियामक जिम्मेदारी है। भारत का यह कदम वैश्विक रुझान के अनुरूप है।

1 मई 2026 की समयसीमा नजदीक है और गेमिंग उद्योग की नज़रें अब अथॉरिटी के गठन और पहली आधिकारिक मनी गेम सूची पर टिकी रहेंगी। आने वाले हफ्तों में MeitY की ओर से विस्तृत दिशानिर्देश और अथॉरिटी के अध्यक्ष की नियुक्ति की घोषणा अपेक्षित है।

Point of View

लेकिन असली परीक्षा अथॉरिटी के क्रियान्वयन में होगी। भारत में गेमिंग उद्योग अरबों डॉलर का है और इसमें बड़े कॉर्पोरेट हित जुड़े हैं — ऐसे में यह देखना होगा कि नियामक संस्था वास्तव में स्वतंत्र रहती है या उद्योग के दबाव में झुकती है। विडंबना यह है कि जब तक केंद्रीय कानून नहीं था, तब तक लाखों युवा मनी गेम्स की लत में फंसते रहे और राज्य सरकारें असहाय दिखती रहीं। अब जरूरत है कि 'मनी गेम' की परिभाषा को लूपहोल-मुक्त बनाया जाए, नहीं तो चालाक कंपनियां तकनीकी दांव-पेंच से बच निकलेंगी।
NationPress
26/04/2026

Frequently Asked Questions

1 मई 2026 से ऑनलाइन गेमिंग के कौन से नए नियम लागू होंगे?
'प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग रूल्स 2026' के तहत मनी गेम्स की पहचान, जोखिम-आधारित रजिस्ट्रेशन और डिजिटल सर्टिफिकेट की व्यवस्था लागू होगी। बच्चों और कमजोर वर्गों की सुरक्षा इन नियमों की मुख्य प्राथमिकता है।
ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया क्या है और यह क्या काम करेगी?
'ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया' एक नई नियामक संस्था है जो MeitY के अधीन नई दिल्ली में काम करेगी। यह मनी गेम्स की सूची बनाएगी, नियमों का पालन सुनिश्चित करेगी और अवैध वित्तीय लेन-देन रोकने के लिए बैंकों व कानून एजेंसियों से समन्वय करेगी।
मनी गेम और सामान्य गेम में क्या फर्क है?
जिस गेम में खेलने के लिए पैसा लगाना पड़े, जीतने पर नकद मिले या इन-गेम पुरस्कार को असली मुद्रा में बदला जा सके — उसे 'मनी गेम' माना जाएगा। यह वर्गीकरण 90 दिनों के भीतर पूरा करना अनिवार्य होगा।
क्या सभी ऑनलाइन गेम्स को रजिस्ट्रेशन कराना होगा?
नहीं, रजिस्ट्रेशन केवल उन गेम्स के लिए अनिवार्य होगा जिन्हें सरकार उच्च जोखिम श्रेणी में चिन्हित करेगी। मंजूर गेम्स को 10 साल तक के लिए डिजिटल सर्टिफिकेट दिया जाएगा।
यह कानून कब पास हुआ और इसे कब लागू किया जाएगा?
'प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग एक्ट 2025' को संसद ने अगस्त 2025 में पास किया था। इसके तहत बने नियम 1 मई 2026 से पूरे देश में लागू होंगे।
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