क्या रियल-मनी गेम में 45 करोड़ भारतीय हर साल 20,000 करोड़ रुपए गंवा रहे थे? ऑनलाइन गेमिंग बिल से युवाओं को मिलेगी नई दिशा!

सारांश
Key Takeaways
- रियल-मनी गेम पर प्रतिबंध लगेगा।
- ई-स्पोर्ट्स को बढ़ावा मिलेगा।
- बिल सभी पक्षों की सहमति से बनाया गया है।
- सामाजिक समस्याओं का समाधान किया जाएगा।
- निवेश में वृद्धि की उम्मीद है।
नई दिल्ली, 24 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। सरकार ने द प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025 प्रस्तुत कर देश के युवाओं को नया मार्ग प्रदान करने का प्रयास किया है। इस बिल के द्वारा एक तरफ रियल-मनी गेम पर प्रतिबंध लगेगा, वहीं दूसरी तरफ ई-स्पोर्ट्स और शिक्षा प्लेटफार्मों को प्रोत्साहन मिलेगा।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, रियल-मनी गेम में लगभग 45 करोड़ भारतीय हर साल 20,000 करोड़ रुपए खो रहे थे। इसने कई सामाजिक मुद्दों को जन्म दिया है, जिनमें कर्ज के कारण आत्महत्या और बच्चों द्वारा अनजाने में माता-पिता की पूरी बचत का ऑनलाइन गेम में दांव पर लगाना शामिल है।
सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग बिल को सभी संबंधित पक्षों की सहमति से तैयार किया है। इस विधेयक को तैयार करने के लिए वित्त, खेल और आईटी मंत्रालयों के साथ-साथ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई), बैंकों, अभिभावक संगठनों और गेमिंग उद्योग से जानकारी ली गई।
इस बिल से देश में ऑनलाइन गेम के भविष्य को सही दिशा मिलने की उम्मीद है।
रिपोर्टों के अनुसार, इस समय देश में 48.8 करोड़ लोग ऑनलाइन गेम खेलते हैं। यह आंकड़ा 2025 के अंत तक 50 करोड़ को पार कर सकता है। वहीं, ई-स्पोर्ट्स की व्यूअरशिप 2025 के अंत तक 64 करोड़ को पार जाने की उम्मीद है। 2024 में गेमिंग स्टार्टअप ने 3,000 करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित किया था, जिसे 2025 में 5,000 करोड़ रुपए तक बढ़ने की संभावना है।
प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल, 2025 पर इंडस्ट्री लीडर्स और लीगल एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह देश में ई-स्पोर्ट्स को बढ़ावा देगा।
विशेषज्ञों ने कहा कि यह कानून न केवल ई-स्पोर्ट्स को मान्यता देता है, बल्कि आदत, वित्तीय सुरक्षा, धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे सामाजिक मुद्दों को भी संबोधित करता है।
अर्थशास्त्र लीगल के संस्थापक सदस्य गौरव सहाय ने कहा कि यह विधेयक व्यापक है क्योंकि यह सेवा प्रदाता और सुविधाएं देने वालों से लेकर ऐसे खेलों को बढ़ावा देने वालों तक, सभी पर लागू होता है।
उन्होंने आगे कहा कि यह कानून सभी प्रकार के रियल-मनी खेलों पर प्रतिबंध लगाकर धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद की फंडिंग को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है।
एस8यूएल के सह-संस्थापक और सीईओ अनिमेष अग्रवाल ने इस विधेयक को भारतीय ई-स्पोर्ट्स के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ बताया।
उन्होंने कहा कि कौशल-आधारित गेमिंग और सट्टेबाजी के बीच एक स्पष्ट रेखा खींचकर, यह कानून संरचित विकास के लिए जगह बनाते हुए इकोसिस्टम की अखंडता की रक्षा करता है।