11 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

काशी के काल भैरव मंदिर क्षेत्र का कायाकल्प: केसरिया रंग में रंगी कालभैरव गली बनी नई आस्था की पहचान

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
काशी के काल भैरव मंदिर क्षेत्र का कायाकल्प: केसरिया रंग में रंगी कालभैरव गली बनी नई आस्था की पहचान

सारांश

वाराणसी की ऐतिहासिक कालभैरव गली अब केसरिया रंग और धार्मिक आकृतियों से सजी एक नई पहचान ले चुकी है। नगर निगम का यह सौंदर्यीकरण अभियान काशी की धार्मिक विरासत को संवारने के साथ-साथ स्थानीय पर्यटन और कारोबार को भी नई ऊँचाई देने का प्रयास है।

मुख्य बातें

वाराणसी नगर निगम ने श्री काल भैरव मंदिर के आसपास की कालभैरव गली को केसरिया (गेरुआ) रंग और धार्मिक आकृतियों से सजाया है।
यह पहल शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों के व्यापक सौंदर्यीकरण अभियान का हिस्सा है, जिसमें तालाब और पवित्र कुंड भी शामिल हैं।
नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी संदीप श्रीवास्तव के अनुसार, भविष्य में शहर के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों का भी इसी प्रकार कायाकल्प किया जाएगा।
स्थानीय कारोबारी दिवाकर त्रिपाठी ने पहल का समर्थन करते हुए कहा कि इससे स्थानीय व्यापार को सीधा लाभ मिलेगा।
यह अभियान काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के बाद वाराणसी में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

वाराणसी नगर निगम ने काशी के ऐतिहासिक श्री काल भैरव मंदिर के आसपास की कालभैरव गली को धार्मिक आकृतियों और केसरिया (गेरुआ) रंग से सजाकर एक नया रूप दिया है, जो अब श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन चुका है। 11 जुलाई को सामने आई यह पहल वाराणसी के प्रमुख धार्मिक स्थलों के व्यापक सौंदर्यीकरण अभियान का हिस्सा है।

मुख्य घटनाक्रम

नगर निगम के इस अभियान के तहत मंदिर के आसपास के भवनों और मकानों को हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखने वाले गेरुआ रंग से पोता जा रहा है। गली की दीवारों पर धार्मिक आकृतियाँ उकेरी गई हैं, जिससे पूरे क्षेत्र को एक सुसंगत आध्यात्मिक स्वरूप मिल रहा है। यह कार्य तेज़ गति से जारी है और क्षेत्र की पहचान पूरी तरह बदल गई है।

नगर निगम की प्रतिक्रिया

वाराणसी नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी संदीप श्रीवास्तव ने बताया कि वाराणसी धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से देश के सबसे महत्वपूर्ण शहरों में से एक है, जहाँ पूरे वर्ष लाखों श्रद्धालु और पर्यटक दर्शन के लिए पहुँचते हैं। उन्होंने कहा कि नगर निगम शहर के समग्र विकास के लिए लगातार नए प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है, जिसमें तालाबों, पवित्र कुंडों और अन्य धार्मिक स्थलों के सौंदर्यीकरण की कई योजनाएँ शामिल हैं।

श्रीवास्तव के अनुसार, श्री काल भैरव मंदिर से करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी है और उसी को ध्यान में रखते हुए यह सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। भविष्य में शहर के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों का भी इसी प्रकार कायाकल्प किए जाने की योजना है।

स्थानीय कारोबार पर असर

स्थानीय कारोबारी दिवाकर त्रिपाठी ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि भगवा रंग धार्मिक स्थलों की पहचान का प्रतीक है और मंदिर क्षेत्र को एक विशिष्ट आध्यात्मिक स्वरूप प्रदान करता है। उनके अनुसार, जब पूरे क्षेत्र के भवन एक समान रंग में दिखाई देते हैं, तो इलाके की सुंदरता और आकर्षण कई गुना बढ़ जाता है।

त्रिपाठी ने यह भी बताया कि मंदिर परिसर में होने वाले मंत्रोच्चारण से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहता है, जिससे श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती है। अधिक संख्या में आगंतुकों के आने से स्थानीय कारोबार को सीधा लाभ मिलता है और व्यापारियों की आजीविका मजबूत होती है।

व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब वाराणसी में पर्यटन और धार्मिक आस्था को केंद्र में रखकर अनेक विकास परियोजनाएँ चलाई जा रही हैं। गौरतलब है कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण के बाद से वाराणसी में आने वाले पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। कालभैरव गली का यह सौंदर्यीकरण उसी दिशा में एक और कदम माना जा रहा है।

क्या होगा आगे

नगर निगम के अनुसार, आने वाले समय में वाराणसी के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों — जिनमें तालाब, पवित्र कुंड और ऐतिहासिक मंदिर शामिल हैं — का भी इसी तर्ज पर सौंदर्यीकरण किया जाएगा। इस अभियान का लक्ष्य शहर की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए पर्यटकों को एक समृद्ध आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के बाद वाराणसी में धार्मिक पर्यटन को एक ब्रांड के रूप में स्थापित करने की बड़ी रणनीति की कड़ी है। सवाल यह है कि क्या केवल रंग-रोगन से दीर्घकालिक पर्यटक अनुभव बेहतर होता है, या इसके साथ बुनियादी ढाँचे — जैसे स्वच्छता, भीड़ प्रबंधन और पार्किंग — में भी समान निवेश हो रहा है। स्थानीय कारोबारियों का उत्साह वास्तविक है, लेकिन धार्मिक पर्यटन की असली क्षमता तभी उजागर होगी जब सौंदर्यीकरण और सुविधाओं का विकास साथ-साथ चले।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वाराणसी की कालभैरव गली का सौंदर्यीकरण क्यों किया जा रहा है?
वाराणसी नगर निगम श्री काल भैरव मंदिर क्षेत्र की धार्मिक पहचान को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने और शहर की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के उद्देश्य से यह सौंदर्यीकरण कर रहा है। इसका लक्ष्य श्रद्धालुओं और पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाना भी है।
कालभैरव गली में क्या बदलाव किए गए हैं?
मंदिर के आसपास के भवनों और मकानों को हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखने वाले गेरुआ (केसरिया) रंग से पोता गया है और दीवारों पर धार्मिक आकृतियाँ उकेरी गई हैं। इससे पूरे क्षेत्र को एक सुसंगत आध्यात्मिक स्वरूप मिला है।
क्या वाराणसी के अन्य धार्मिक स्थलों का भी इसी तरह सौंदर्यीकरण होगा?
हाँ, नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी संदीप श्रीवास्तव के अनुसार भविष्य में शहर के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों — जिनमें तालाब और पवित्र कुंड शामिल हैं — का भी इसी प्रकार सौंदर्यीकरण किया जाएगा।
इस पहल से स्थानीय कारोबार को कैसे फायदा होगा?
स्थानीय कारोबारी दिवाकर त्रिपाठी के अनुसार, मंदिर क्षेत्र के आकर्षक स्वरूप से अधिक संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक आएंगे, जिससे स्थानीय व्यापारियों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। भक्तिमय वातावरण और बेहतर दृश्यता मिलकर पर्यटन को बढ़ावा देते हैं।
काल भैरव मंदिर वाराणसी में क्यों महत्वपूर्ण है?
श्री काल भैरव मंदिर काशी के सबसे प्राचीन और प्रतिष्ठित मंदिरों में से एक है, जहाँ करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी है। पूरे वर्ष देश-विदेश से लाखों भक्त यहाँ दर्शन के लिए आते हैं, जो इसे वाराणसी के धार्मिक पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र बनाता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 8 महीने पहले
  4. 9 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 12 महीने पहले
  8. 1 साल पहले