दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति रामाफोसा की मांग: दास प्रथा की क्षतिपूर्ति हो, औपनिवेशिक लूट ने अफ्रीका को कर्जदार बनाया
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने 4 मई 2026 को अपने साप्ताहिक न्यूजलेटर में अफ्रीका माह के अवसर पर दास प्रथा के लिए क्षतिपूर्ति (रिपेरेशन्स) की मांग को दोहराया और कहा कि सदियों के शोषण तथा अफ्रीकी संसाधनों की व्यवस्थित लूट का असर आज भी महाद्वीप की अर्थव्यवस्थाओं पर गहराई से पड़ा हुआ है। रामाफोसा के अनुसार, यह ऐतिहासिक अन्याय अफ्रीकी देशों पर बढ़ते कर्ज के बोझ का एक प्रमुख कारण है।
क्षतिपूर्ति की परिभाषा: सिर्फ मुआवजा नहीं
रामाफोसा ने स्पष्ट किया कि क्षतिपूर्ति केवल आर्थिक मुआवजे तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उनके अनुसार इसमें प्रभावित अफ्रीकी देशों के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में वृद्धि, वैश्विक बाजारों तक बेहतर पहुँच, प्रौद्योगिकी और कौशल हस्तांतरण, तथा सदियों पहले लूटी गई सांस्कृतिक धरोहरों की बिना शर्त वापसी भी शामिल होनी चाहिए।
उन्होंने रेखांकित किया कि दास प्रथा केवल लोगों की गुलामी तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह एक ऐसी व्यवस्था थी जिससे पूर्व दास मालिकों ने अमानवीय तरीकों से भारी संपत्ति अर्जित की। सिन्हुआ न्यूज एजेंसी के अनुसार, राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि इस संपत्ति में सांस्कृतिक वस्तुओं की लूट से हुई वृद्धि भी शामिल है, जिनमें से कई आज भी यूरोप के संग्रहालयों में प्रदर्शित हैं।
राष्ट्रपति के प्रमुख उद्धरण
रामाफोसा ने कहा,