दक्षिण अफ्रीका में अवैध प्रवास पर सख्ती: राष्ट्रपति रामफोसा ने हिंसा की निंदा की, कानून का सम्मान करने की अपील

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दक्षिण अफ्रीका में अवैध प्रवास पर सख्ती: राष्ट्रपति रामफोसा ने हिंसा की निंदा की, कानून का सम्मान करने की अपील

सारांश

दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति रामफोसा ने अप्रैल के अंत से जोहान्सबर्ग, प्रिटोरिया और डरबन में विदेशी नागरिकों पर हो रही हिंसा की कड़ी निंदा की और कहा कि यह न सरकार की नीति है, न देश की सोच। साथ ही घाना ने अफ्रीकी संघ से इस मुद्दे को जून की बैठक में उठाने की माँग की है।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने 11 मई को साप्ताहिक न्यूजलेटर में विदेशी-विरोधी हिंसा की कड़ी निंदा की।
अप्रैल के अंत से जोहान्सबर्ग , प्रिटोरिया और डरबन में अवैध प्रवास के खिलाफ मार्च जारी हैं।
रामफोसा ने चेतावनी दी कि आईडी चेक और तलाशी जैसे काम गैरकानूनी तरीके से करना किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं होगा।
राष्ट्रपति ने माना कि बिना दस्तावेज प्रवासियों से स्वास्थ्य सेवाओं और आवास पर दबाव बढ़ता है।
घाना ने अफ्रीकी संघ से जून की मध्य-वर्षीय बैठक में दक्षिण अफ्रीका में विदेशी-विरोधी हमलों पर चर्चा की माँग की।

दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने सोमवार, 11 मई को अपने साप्ताहिक न्यूजलेटर में नागरिकों और विदेशी नागरिकों दोनों से अपील की कि वे कानून का सम्मान करें, क्योंकि सरकार अवैध प्रवास से निपटने के प्रयास तेज कर रही है। उन्होंने जोहान्सबर्ग, प्रिटोरिया और डरबन में विदेशी नागरिकों को निशाना बनाकर की गई हालिया हिंसा की कड़ी निंदा की।

हिंसक प्रदर्शनों पर राष्ट्रपति की प्रतिक्रिया

रामफोसा ने स्पष्ट किया कि देश के कुछ हिस्सों में हुए विदेशी-विरोधी हिंसक प्रदर्शन न तो दक्षिण अफ्रीकी नागरिकों की सोच को दर्शाते हैं और न ही सरकार की नीति को। उन्होंने कहा कि ये हरकतें उन लोगों की हैं जो गरीबों की असली समस्याओं का फायदा उठाकर 'सामुदायिक आंदोलन' के नाम पर गलत काम कर रहे हैं।

राष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि कुछ लोग गैरकानूनी तरीके से ऐसे काम कर रहे हैं जो केवल सरकारी अधिकारियों का अधिकार है — जैसे पहचान पत्र जाँचना और निजी संपत्ति की तलाशी लेना। उन्होंने कहा कि इस तरह कानून तोड़ना किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे अपराधी कोई भी हो या पीड़ित कोई भी।

अप्रैल के अंत से जारी है विरोध का सिलसिला

अप्रैल के अंत से लेकर अब तक जोहान्सबर्ग, प्रिटोरिया और डरबन सहित कई प्रमुख शहरों में अवैध प्रवास के खिलाफ मार्च निकाले गए हैं। कुछ समूह माँग कर रहे हैं कि बिना दस्तावेज वाले प्रवासी देश छोड़ दें। यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण अफ्रीका में बेरोज़गारी और सामाजिक असमानता पहले से ही गंभीर चुनौती बनी हुई है।

प्रवासन के कारण संसाधनों पर दबाव

रामफोसा ने स्वीकार किया कि बिना दस्तावेज वाले प्रवासियों की वजह से स्वास्थ्य सेवाओं, आवास और नगर सुविधाओं पर दबाव पड़ता है, खासकर गरीब इलाकों में। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ नियोक्ता इन प्रवासियों का शोषण करते हैं और उन्हें कानूनी न्यूनतम मजदूरी से कम वेतन देते हैं, जिससे स्थानीय लोगों में तनाव और बढ़ता है।

संविधान और अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों का संतुलन

राष्ट्रपति ने कहा कि अवैध प्रवास से निपटते समय सरकार संविधान और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के साथ-साथ देश की सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रख रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अफ्रीकी देशों के बीच एकता और सहयोग की कोशिशों को कुछ आपराधिक घटनाओं से कमज़ोर नहीं होने दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दक्षिण अफ्रीका में नफरत, जातीय भेदभाव, असहिष्णुता या हिंसा की कोई जगह नहीं है।

अफ्रीकी संघ में उठेगा मुद्दा

दक्षिण अफ्रीका ने शुक्रवार को उन आरोपों को खारिज किया कि देश विदेशियों के प्रति द्वेषपूर्ण रवैया रखता है। सरकार ने कहा कि हाल की घटनाएँ अलग-अलग और सीमित हैं, और वह अफ्रीकी देशों के साथ प्रवासन मुद्दों पर बातचीत और कूटनीति के लिए तैयार है। गौरतलब है कि घाना ने अफ्रीकी संघ से अनुरोध किया है कि जून में होने वाली मध्य-वर्षीय बैठक में दक्षिण अफ्रीका में अफ्रीकी नागरिकों पर कथित विदेशी-विरोधी हमलों पर चर्चा की जाए। यह घटनाक्रम संकेत देता है कि यह मुद्दा अब द्विपक्षीय से बढ़कर महाद्वीपीय राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दूसरी तरफ अफ्रीकी एकता की छवि बनाए रखने की राजनीतिक ज़रूरत। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या सरकार के पास अवैध प्रवास को नियंत्रित करने की वास्तविक क्षमता और इच्छाशक्ति है, या यह बयान भी पिछले वर्षों की तरह महज़ शब्दों तक सीमित रहेगा। घाना द्वारा अफ्रीकी संघ में मुद्दा उठाने की माँग यह दर्शाती है कि यह अब केवल दक्षिण अफ्रीका का आंतरिक मामला नहीं रहा — और प्रिटोरिया की कूटनीतिक साख दाँव पर है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रपति रामफोसा ने अवैध प्रवास पर क्या कहा?
राष्ट्रपति रामफोसा ने 11 मई को अपने साप्ताहिक न्यूजलेटर में नागरिकों और विदेशी नागरिकों दोनों से कानून का सम्मान करने की अपील की। उन्होंने विदेशी नागरिकों को निशाना बनाकर की गई हिंसा की निंदा की और कहा कि यह न सरकार की नीति है और न दक्षिण अफ्रीकी लोगों की सोच।
दक्षिण अफ्रीका में विदेशी-विरोधी हिंसा कब से हो रही है?
अप्रैल के अंत से जोहान्सबर्ग, प्रिटोरिया और डरबन में अवैध प्रवास के खिलाफ मार्च निकाले जा रहे हैं। कुछ समूह माँग कर रहे हैं कि बिना दस्तावेज वाले प्रवासी देश छोड़ दें।
घाना ने अफ्रीकी संघ से क्या माँग की है?
घाना ने अफ्रीकी संघ से अनुरोध किया है कि जून में होने वाली मध्य-वर्षीय बैठक में दक्षिण अफ्रीका में अफ्रीकी नागरिकों पर कथित विदेशी-विरोधी हमलों पर चर्चा की जाए। यह माँग दर्शाती है कि यह मुद्दा अब महाद्वीपीय राजनीति का हिस्सा बन रहा है।
दक्षिण अफ्रीका में अवैध प्रवासियों से क्या समस्याएँ हो रही हैं?
रामफोसा ने स्वीकार किया कि बिना दस्तावेज प्रवासियों से स्वास्थ्य सेवाओं, आवास और नगर सुविधाओं पर दबाव बढ़ता है, खासकर गरीब इलाकों में। साथ ही कुछ नियोक्ता इन प्रवासियों को कानूनी न्यूनतम मजदूरी से कम वेतन देते हैं, जिससे स्थानीय लोगों में तनाव बढ़ता है।
दक्षिण अफ्रीका सरकार ने विदेशी-विरोधी आरोपों पर क्या कहा?
दक्षिण अफ्रीका ने शुक्रवार को उन आरोपों को खारिज किया कि देश विदेशियों के प्रति द्वेषपूर्ण रवैया रखता है। सरकार ने कहा कि हाल की घटनाएँ अलग-अलग और सीमित हैं, और वह अफ्रीकी देशों के साथ प्रवासन मुद्दों पर कूटनीति के लिए तैयार है।
राष्ट्र प्रेस