'द रेवोल्यूशनरीज' में रोहित सराफ का किरदार: 'हिंसा मेरे लिए कभी विकल्प नहीं रहा'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता रोहित सराफ इन दिनों प्राइम वीडियो पर आई वेब सीरीज 'द रेवोल्यूशनरीज' के चलते सुर्खियों में हैं, जिसमें वह स्वतंत्रता सेनानी सचिंद्र नाथ सान्याल की भूमिका निभा रहे हैं। सीरीज उन क्रांतिकारियों के संघर्ष को रेखांकित करती है, जो ब्रिटिश राज से मुक्ति के लिए सशस्त्र विद्रोह को अपरिहार्य मानते थे। सीरीज के प्रमोशन के दौरान रोहित ने अपने निजी मूल्यों और किरदार की विचारधारा के बीच के फर्क को बड़ी स्पष्टता से रखा।
किरदार और निजी सोच के बीच का फर्क
जब रोहित से पूछा गया कि सामाजिक बदलाव की लड़ाई और हिंसा के बीच वह किस तरह का संबंध देखते हैं, तो उन्होंने अपना रुख साफ किया। रोहित सराफ ने कहा, 'मैं हिंसा में बिल्कुल विश्वास नहीं रखता। हालांकि, जिस दौर की कहानी सीरीज में दिखाई गई है, वह आज से बहुत अलग थी। उस समय गांधीजी बाद में आए थे और उस दौर में क्रांतिकारियों के पास संघर्ष का रास्ता अलग था। उनके पास हथियार आसानी से उपलब्ध नहीं थे — कई बार उन्हें खुद हथियार तैयार करने पड़ते थे या फिर उन्हें चोरी करके हासिल करना पड़ता था।'
यह बयान महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि रोहित ने किरदार की मजबूरियों को ऐतिहासिक संदर्भ में समझाते हुए अपनी वैयक्तिक अहिंसावादी सोच को अलग रखा — जो एक परिपक्व अभिनेता की समझ को दर्शाता है।
21वीं सदी में विद्रोह की ज़रूरत क्यों नहीं
रोहित ने अपनी निजी परिस्थितियों का ज़िक्र करते हुए कहा, 'आज हम 21वीं सदी में रह रहे हैं और समय काफी बदल चुका है। मैं इस मामले में खुशकिस्मत हूँ कि मुझे अपनी ज़िंदगी में किसी चीज को हासिल करने के लिए हिंसा का रास्ता नहीं अपनाना पड़ा। मुझे ज़िंदगी में बहुत कुछ मिला है, इसलिए मुझे किसी चीज के लिए उस तरह विद्रोह करने की ज़रूरत महसूस नहीं हुई, जैसी उस दौर के क्रांतिकारियों को करनी पड़ी थी।' यह टिप्पणी उनके किरदार की पृष्ठभूमि से उनकी अपनी पृष्ठभूमि को अलग करती है।
सचिंद्र नाथ सान्याल की मानसिक यात्रा
रोहित ने अपने किरदार की आंतरिक दुनिया को समझाते हुए कहा, 'सचिन के सामने परिस्थितियाँ बिल्कुल अलग थीं। उनके लिए रास बिहारी बोस किसी भगवान की तरह थे — वह उन्हें अपना आदर्श मानते थे और उन्हीं जैसा बनना चाहते थे।' उन्होंने आगे जोड़ा कि सचिन को लगता था कि उनका परिवार देश की आज़ादी की लड़ाई में पर्याप्त योगदान नहीं दे रहा, क्योंकि वे पर्दे के पीछे रहकर काम कर रहे थे। 'उनके लिए क्रांति में असली योगदान का मतलब ज़मीन पर उतरकर काम करना था।'
किरदार की विचारधारा में बदलाव
रोहित के अनुसार सीरीज की सबसे दिलचस्प बात यही है कि सचिन का किरदार एकांगी नहीं है। उन्होंने कहा, 'सीरीज में मेरे किरदार की पूरी यात्रा दिखाई गई है। इसमें यह भी दिखाया गया है कि किस तरह सचिन धीरे-धीरे अहिंसा की अहमियत को समझने लगता है। यही बदलाव कहानी को दिलचस्प बनाता है, क्योंकि किरदार सिर्फ एक विचार पर कायम नहीं रहता, बल्कि परिस्थितियों और अनुभवों के साथ उसकी सोच में भी बदलाव आता है।' यह आर्क सीरीज को महज एक्शन-ड्रामा से ऊपर उठाकर एक वैचारिक यात्रा बनाती है।
सीरीज के बारे में
'द रेवोल्यूशनरीज' का निर्माण मोनिशा आडवाणी और मधु भोजवानी ने एम्मे एंटरटेनमेंट के बैनर तले किया है। इसकी कहानी संजीव सान्याल ने लिखी है। सीरीज अभी प्राइम वीडियो पर उपलब्ध है। गौरतलब है कि यह सीरीज ऐसे समय में आई है जब OTT प्लेटफॉर्म पर ऐतिहासिक और स्वतंत्रता संग्राम पर आधारित कंटेंट की माँग में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है।