ईपीएफओ का डिजिटल क्रांति की ओर बड़ा कदम: 90% दावों का ऑटो-सेटलमेंट, जल्द भीम ऐप से मिलेगा क्लेम
सारांश
मुख्य बातें
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने 31 जुलाई 2026 को अपनी डिजिटल सेवाओं को पूरी तरह नए स्वरूप में पेश करने की घोषणा की, जिसके तहत नए ईपीएफओ ऐप और पोर्टल के जरिए करोड़ों कर्मचारियों और नियोक्ताओं को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी। केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त (सीपीएफसी) रमेश कृष्णमूर्ति ने कहा कि संगठन अब लगभग 90 प्रतिशत दावों का ऑटो-सेटलमेंट कर रहा है और अधिकांश क्लेम उसी दिन या अधिकतम दो दिनों के भीतर निपटाए जाएंगे।
नई डिजिटल व्यवस्था: क्या बदला है
नए सिस्टम के लागू होने के बाद ईपीएफओ ने लगभग सभी लंबित दावों का निपटारा कर दिया है। सीपीएफसी रमेश कृष्णमूर्ति ने बताया कि अब करीब 90 प्रतिशत दावों का ऑटो-सेटलमेंट हो रहा है, जो पहले की तुलना में एक बड़ा बदलाव है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस व्यवस्था से करोड़ों कर्मचारियों को क्लेम के लिए लंबे समय तक प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ेगी।
इसके अलावा, संगठन नियोक्ताओं के लिए अनुपालन प्रक्रिया को भी सरल बनाने पर काम कर रहा है। आयुक्त के अनुसार, आने वाले समय में नियोक्ताओं और ईपीएफओ के बीच संवाद और प्रक्रियाएं पहले से कहीं अधिक सुगम होंगी, जिससे दोनों पक्षों का संगठन पर भरोसा और मजबूत होगा।
भीम ऐप से क्लेम सेटलमेंट: अगला बड़ा कदम
केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त ने बताया कि जल्द ही भीम ऐप के माध्यम से क्लेम सेटलमेंट की सुविधा शुरू की जाएगी। इस व्यवस्था के तहत ईपीएफ का क्लेम सीधे यूपीआई से जुड़े बैंक खाते में भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि यह सुविधा अगले एक महीने के भीतर लागू किए जाने की उम्मीद है, जिससे भुगतान प्रक्रिया और अधिक तेज तथा सुविधाजनक हो जाएगी।
यह ऐसे समय में आया है जब डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में भारत विश्व में अग्रणी स्थान पर है और यूपीआई लेनदेन की संख्या लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है। ईपीएफओ का यह कदम सामाजिक सुरक्षा भुगतानों को भी उसी डिजिटल ढाँचे से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म कर्मचारियों पर फोकस
गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म आधारित कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा देने के सवाल पर रमेश कृष्णमूर्ति ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा संहिता में इसके लिए पहले से प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि जैसे ही सरकार इस संबंध में योजना घोषित करेगी, उसी समय यह भी तय किया जाएगा कि उसका क्रियान्वयन किस एजेंसी के माध्यम से होगा। यदि सरकार चाहे तो इस योजना को ईपीएफओ के जरिए भी लागू किया जा सकता है।
गौरतलब है कि भारत में गिग इकॉनमी तेजी से बढ़ रही है और लाखों श्रमिक ऐसे हैं जो औपचारिक सामाजिक सुरक्षा के दायरे से बाहर हैं। ऐसे में यह प्रावधान उनके लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच साबित हो सकता है।
भारत श्रम सेतु: श्रमिकों के लिए एकीकृत डिजिटल मंच
चौथे ग्लोबल इंडस्ट्रियल रिलेशंस समिट के दौरान टैलेंट इंडिया ग्रुप के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी शंकर कुमार ने 'भारत श्रम सेतु' प्लेटफॉर्म की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो श्रमिक, ठेकेदार और नियोक्ता को एक ही पोर्टल पर जोड़ता है।
शंकर कुमार ने कहा कि अब तक अधिकांश वर्कफोर्स मैनेजमेंट सिस्टम नियोक्ताओं की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाए गए थे, लेकिन भारत श्रम सेतु का उद्देश्य श्रमिकों, ठेकेदारों और कंपनियों — तीनों के लिए एक समान और पारदर्शी डिजिटल व्यवस्था उपलब्ध कराना है। यह प्लेटफॉर्म ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया को पेपरलेस और पूरी तरह डिजिटल बनाता है।
ईपीएफओ के ये सुधार भारत की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को अधिक समावेशी और तकनीक-संचालित बनाने की दिशा में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकते हैं।