16 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

EPFO वेतन सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 हुई, कैबिनेट की मंजूरी; 51 लाख नए कर्मचारी दायरे में

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
EPFO वेतन सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 हुई, कैबिनेट की मंजूरी; 51 लाख नए कर्मचारी दायरे में

सारांश

12 साल में पहली बार ईपीएफओ की वेतन सीमा बदली — ₹15,000 से ₹25,000। इस एक फैसले से 51 लाख कर्मचारी PF, पेंशन और बीमा के दायरे में आएंगे। अगले पाँच साल में सरकार खर्च करेगी ₹56,696 करोड़। यह सिर्फ नंबर नहीं, करोड़ों वेतनभोगियों की सामाजिक सुरक्षा की नई बुनियाद है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 16 सितंबर 2026 को ईपीएफओ की अनिवार्य वेतन सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने की मंजूरी दी।
इस फैसले से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को ईपीएफ, ईपीएस और ईडीएलआई का लाभ मिलने की उम्मीद है।
ईपीएफओ की वेतन सीमा पिछली बार सितंबर 2014 में बदली थी — यानी 12 वर्षों बाद पहला संशोधन।
सरकार का अनुमानित वार्षिक अतिरिक्त व्यय लगभग ₹11,339 करोड़ ; अगले पाँच वर्षों में कुल ₹56,696 करोड़ खर्च होने का अनुमान।
वर्तमान में ईपीएफओ के तहत 7.98 करोड़ अंशदाता सदस्य और लगभग 82 लाख पेंशनभोगी लाभान्वित हैं।
16 जून 2026 को व्यय वित्त समिति ने इस प्रस्ताव की सिफारिश की थी।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार, 16 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के तहत अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा को ₹15,000 प्रति माह से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने की मंजूरी दे दी। सरकार के अनुसार, इस फैसले से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ), कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) और कर्मचारी जमा-संबद्ध बीमा योजना (ईडीएलआई) का लाभ मिलने की उम्मीद है। यह संशोधन 12 वर्षों में पहला है — इससे पहले सीमा सितंबर 2014 में ₹10,000 से ₹15,000 की गई थी।

मुख्य घटनाक्रम

ईपीएफओ की वेतन सीमा 2004 से 2014 तक — पूरे 10 वर्षों तक — अपरिवर्तित ₹10,000 पर रही। सितंबर 2014 में इसे ₹15,000 किया गया, और अब 12 वर्षों के अंतराल के बाद इसे ₹25,000 कर दिया गया है। इस प्रस्ताव पर विभिन्न मंत्रालयों के साथ विस्तृत परामर्श हुआ था और 16 जून 2026 को व्यय वित्त समिति ने इसकी सिफारिश की थी।

कर्मचारियों को मिलने वाले तीन प्रमुख लाभ

नई व्यवस्था के तहत ₹15,000 से ₹25,000 मासिक वेतन वर्ग के कर्मचारी अब अनिवार्य रूप से ईपीएफओ के दायरे में आएंगे। इनके लिए तीन लाभ सुनिश्चित होंगे: ईपीएफ के जरिए नियमित दीर्घकालिक बचत; ईपीएस के माध्यम से सेवानिवृत्ति पश्चात पेंशन सुरक्षा; और ईडीएलआई के अंतर्गत बीमा कवर। इसके अतिरिक्त, पेंशन योग्य वेतन और वैधानिक अंशदान व्यवस्था भी वर्तमान वेतन स्तरों के अधिक अनुरूप हो जाएगी।

सरकारी व्यय और वित्तीय प्रभाव

सरकार के अनुसार, इस फैसले के परिणामस्वरूप वार्षिक सरकारी व्यय बढ़कर लगभग ₹11,339 करोड़ हो जाएगा, जबकि वर्तमान बजटीय सहायता करीब ₹10,250 करोड़ है। अगले पाँच वर्षों में इस निर्णय पर लगभग ₹56,696 करोड़ खर्च होने का अनुमान है।

औपचारिक रोजगार पर असर

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में देश में वेतन स्तर और औपचारिक रोजगार में लगातार वृद्धि हुई है और कई राज्यों में न्यूनतम मजदूरी पहले से निर्धारित ₹15,000 की सीमा के करीब पहुँच चुकी थी। अब तक यदि कोई नया कर्मचारी ₹15,000 से अधिक पर नौकरी शुरू करता था, तो वह स्वतः ईपीएफ ढाँचे के अंतर्गत नहीं आता था, जिससे भविष्य निधि, पेंशन और बीमा जैसी सुविधाएँ उससे दूर रहती थीं। नई व्यवस्था इस अंतर को पाटने का प्रयास करती है।

सरकार का कहना है कि औपचारिक रोजगार केवल वेतन तक सीमित नहीं होना चाहिए — उसके साथ पोर्टेबल और सुनिश्चित सामाजिक सुरक्षा भी जुड़ी होनी चाहिए।

ईपीएफओ का मौजूदा आकार और आगे की राह

वर्तमान में ईपीएफओ दुनिया की सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों में से एक का संचालन करता है। उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, ईपीएफओ के तहत लगभग 7.98 करोड़ अंशदाता सदस्य और 7.68 लाख से अधिक प्रतिष्ठान जुड़े हुए हैं, जबकि कर्मचारी पेंशन योजना के तहत करीब 82 लाख पेंशनभोगियों को लाभ मिल रहा है। यह निर्णय 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण नीतिगत कदम के रूप में देखा जा रहा है। व्यापक सामाजिक सुरक्षा कवरेज से न केवल कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि नियोक्ताओं को भी प्रतिभाशाली कर्मचारी बनाए रखने में सहूलियत मिलेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ₹25,000 की नई सीमा भी कई महानगरों की वास्तविक मजदूरी वृद्धि से पीछे रह सकती है — खासकर तब जब मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में प्रवेश स्तर के वेतन अक्सर इससे ऊपर होते हैं। 12 साल की देरी यह भी बताती है कि नीतिगत समीक्षा का कोई स्वचालित तंत्र नहीं है — अगली बार फिर एक दशक इंतजार नहीं होना चाहिए। असली परीक्षा यह होगी कि 51 लाख की संख्या वास्तव में कितनों तक पहुँचती है, क्योंकि असंगठित क्षेत्र से औपचारिक दायरे में लाना केवल सीमा बढ़ाने से नहीं, बल्कि प्रवर्तन और नियोक्ता अनुपालन से तय होगा।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईपीएफओ की वेतन सीमा बढ़ाने का फैसला क्या है?
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 16 सितंबर 2026 को ईपीएफओ के तहत अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने की मंजूरी दी है। यह संशोधन 12 वर्षों में पहला है और इससे 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को भविष्य निधि, पेंशन और बीमा कवर मिलेगा।
इस फैसले से किन कर्मचारियों को फायदा होगा?
जो कर्मचारी ₹15,000 से ₹25,000 के बीच मासिक वेतन पाते हैं और अब तक ईपीएफओ के दायरे से बाहर थे, वे अब अनिवार्य रूप से ईपीएफ, ईपीएस और ईडीएलआई के अंतर्गत आएंगे। सरकार के अनुसार इस वर्ग में 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी शामिल होंगे।
सरकार पर इस फैसले का वित्तीय बोझ कितना होगा?
सरकार के अनुमान के अनुसार वार्षिक व्यय बढ़कर लगभग ₹11,339 करोड़ हो जाएगा, जो वर्तमान बजटीय सहायता ₹10,250 करोड़ से अधिक है। अगले पाँच वर्षों में इस निर्णय पर लगभग ₹56,696 करोड़ खर्च होने का अनुमान लगाया गया है।
ईपीएफओ की वेतन सीमा पहले कब बदली थी?
इससे पहले सितंबर 2014 में वेतन सीमा ₹10,000 से बढ़ाकर ₹15,000 की गई थी। उससे पहले 2004 से 2014 तक — यानी पूरे 10 वर्षों तक — यह सीमा अपरिवर्तित रही थी। वर्तमान संशोधन 12 वर्षों के अंतराल के बाद आया है।
ईपीएफओ की नई वेतन सीमा कब से लागू होगी?
कैबिनेट ने 16 सितंबर 2026 को मंजूरी दे दी है। लागू होने की सटीक तिथि की आधिकारिक अधिसूचना अभी जारी होनी बाकी है; श्रम मंत्रालय द्वारा औपचारिक गजट अधिसूचना के बाद नई व्यवस्था प्रभावी होगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 25 मिनट पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले