30 सितंबर 2026
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अनिल विज का राहुल गांधी पर तीखा हमला: 'नसों में दादी का तानाशाही खून', CEC हटाने की मांग को बताया बहानेबाजी

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अनिल विज का राहुल गांधी पर तीखा हमला: 'नसों में दादी का तानाशाही खून', CEC हटाने की मांग को बताया बहानेबाजी

सारांश

हरियाणा मंत्री अनिल विज ने CEC को हटाने की विपक्षी माँग को 'फेल छात्र की बहानेबाजी' करार दिया और राहुल गांधी पर 'दादी का तानाशाही खून' वाला बयान दागा। BJP नेता राजीव चंद्रशेखर ने इंडिया गठबंधन की टूट और उसकी आंतरिक विसंगतियों पर सवाल खड़े किए।

मुख्य बातें

हरियाणा मंत्री अनिल विज ने 30 सितंबर 2026 को अंबाला में CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की विपक्ष की माँग को खारिज किया।
विज ने कहा कि यदि मतदाता सूचियाँ फर्जी हैं, तो उन्हीं सूचियों से जीते विपक्षी सांसदों और विधायकों को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए।
विज ने राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि उनकी 'नसों में दादी का तानाशाही वाला खून दौड़ रहा है' और वे लोकतंत्र को खत्म करना चाहते हैं।
केरल BJP अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि DMK और समाजवादी पार्टी समेत अन्य दल इंडिया गठबंधन से अलग हो चुके हैं।
यह विवाद चुनाव आयोग के SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) की प्रक्रिया के बाद उठा है, जिस पर विपक्ष ने आपत्ति जताई है।

हरियाणा के वरिष्ठ मंत्री अनिल विज ने 30 सितंबर 2026 को अंबाला में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने की विपक्ष की माँग को सिरे से खारिज करते हुए इंडिया गठबंधन पर तीखा पलटवार किया। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) विवाद की आड़ में चल रही इस मुहिम को विज ने 'फेल छात्र की बहानेबाजी' करार दिया और सीधा सवाल दागा कि यदि मतदाता सूचियाँ ही फर्जी हैं, तो उन्हीं सूचियों के बूते जीते विपक्षी सांसद और विधायक अपनी कुर्सियाँ क्यों नहीं छोड़ रहे।

विज का विपक्ष पर सीधा प्रहार

विज ने कहा, 'यह ठीक वैसा ही है जैसे कोई बच्चा स्कूल में फेल हो जाए और घर आकर रोए कि टीचर खराब था, स्कूल खराब था, या बेंच खराब थी। लेकिन जब वे जीतते हैं, तो वे यह नहीं कहते, है ना? उन्होंने हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक या केरल में ऐसा नहीं कहा। अब वे हर जगह जुलूस निकाल रहे हैं और कह रहे हैं कि इलेक्टोरल रोल गलत हैं।'

उन्होंने आगे कहा कि यदि वाकई इलेक्टोरल रोल गलत थे, तो उन्हीं के आधार पर जीते सभी विधायक और सांसद को तत्काल इस्तीफा देकर सड़कों पर उतरना चाहिए। यह बयान विपक्ष की मुहिम की आंतरिक विसंगति को उजागर करने की कोशिश थी।

राहुल गांधी पर 'तानाशाही खून' वाला हमला

विज ने कांग्रेस पर देश की स्वायत्त संस्थाओं को व्यवस्थित रूप से बदनाम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस न्यायालयों पर, प्रवर्तन निदेशालय (ED) पर और अब चुनाव आयोग पर सवाल खड़े करती है। विज का आरोप था कि इसकी जड़ में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की सोच है। उन्होंने कहा, 'राहुल गांधी की नसों में उनकी दादी का तानाशाही वाला खून दौड़ रहा है। वो प्रजातंत्र को खत्म करके देश में तानाशाही लाना चाहते हैं, इसलिए लगातार स्वायत्त संस्थाओं का विरोध किया जा रहा है।' उल्लेखनीय है कि विज यह संदर्भ पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल से जोड़ रहे थे।

राजीव चंद्रशेखर का इंडिया गठबंधन पर सवाल

केरल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष एवं विधायक राजीव चंद्रशेखर ने भी विपक्ष के प्रदर्शन पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'इंडिया गठबंधन से किसी को पूछना चाहिए कि आप किस बात का विरोध कर रहे हैं? क्या आप इस बात का विरोध कर रहे हैं कि चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के झूठ का पर्दाफाश कर दिया?'

चंद्रशेखर ने गठबंधन की आंतरिक दरारों का भी हवाला दिया — उनके अनुसार द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) और समाजवादी पार्टी समेत अन्य दल गठबंधन से दूरी बना चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी खुद अपने ही इंडिया गठबंधन के सदस्य पी. विजयन को जेल भेजने की बात करते हैं, जो गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़ा करता है।

केरल और वित्तीय संकट का संदर्भ

चंद्रशेखर ने यह भी कहा कि उनके लिए यह स्थिति 'निंदनीय' है, क्योंकि एक तरफ केंद्र सरकार ने केरल के गहरे वित्तीय संकट को देखते हुए राज्य को समर्थन देने की पहल की है। उन्होंने उल्लेख किया कि गृह मंत्री ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में केरल के मंत्रियों को मिलने के लिए आमंत्रित किया था।

विवाद का पृष्ठभूमि

यह विवाद चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया शुरू करने के बाद उठा है, जिस पर विपक्षी दलों ने आपत्ति जताते हुए CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग की। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब चुनाव आयोग की स्वायत्तता को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने आए हों; हाल के वर्षों में ईवीएम विवाद से लेकर चुनावी बॉन्ड मामले तक, चुनाव आयोग की भूमिका पर राजनीतिक बहस गहरी होती रही है। आगे देखना होगा कि विपक्ष की यह मुहिम संसदीय स्तर तक पहुँचती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके पीछे एक ठोस वैचारिक सवाल दबा हुआ है — क्या विपक्ष चुनाव आयोग की साख पर सैद्धांतिक आपत्ति कर रहा है, या चुनावी हार के बाद संस्थाओं को निशाना बनाने का चलन बन गया है? SIR जैसी प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक रूप से जायज है, लेकिन CEC को हटाने की माँग बिना ठोस प्रक्रियागत आधार के संस्थागत विश्वसनीयता को नुकसान पहुँचा सकती है। दूसरी तरफ, BJP की यह आलोचना तब और धारदार लगती है जब विपक्ष की जीत वाले राज्यों में वही मतदाता सूचियाँ निर्विवाद रहती हैं। इंडिया गठबंधन की आंतरिक दरारों ने इस मुद्दे पर एकजुट संदेश देने की उसकी क्षमता को और कमजोर कर दिया है।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग क्यों उठी है?
विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग की है। उनका आरोप है कि यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और इससे मतदाता सूचियाँ प्रभावित हो सकती हैं।
अनिल विज ने विपक्ष पर क्या आरोप लगाया?
हरियाणा मंत्री अनिल विज ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे चुनाव हारने पर मतदाता सूचियों को दोष देते हैं, लेकिन जीत के समय चुप रहते हैं। उन्होंने कहा कि यदि सूचियाँ वाकई गलत थीं तो उन्हीं के आधार पर जीते सभी विपक्षी जनप्रतिनिधियों को इस्तीफा देना चाहिए।
अनिल विज ने राहुल गांधी पर 'तानाशाही खून' का आरोप क्यों लगाया?
विज ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अदालतों, ED और चुनाव आयोग जैसी स्वायत्त संस्थाओं पर लगातार सवाल उठा कर लोकतंत्र को कमजोर करना चाहते हैं। उन्होंने यह संदर्भ पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल से जोड़ा।
राजीव चंद्रशेखर ने इंडिया गठबंधन पर क्या टिप्पणी की?
केरल BJP अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि DMK और समाजवादी पार्टी जैसे दल इंडिया गठबंधन से अलग हो चुके हैं और गठबंधन बिखर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी खुद अपने ही गठबंधन के नेता पी. विजयन को जेल भेजने की बात करते हैं, जो गठबंधन की एकता पर सवाल खड़ा करता है।
SIR विवाद क्या है और इसका चुनाव आयोग से क्या संबंध है?
SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण, चुनाव आयोग की वह प्रक्रिया है जिसमें मतदाता सूचियों की गहन समीक्षा की जाती है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में अनियमितताएँ हैं और इससे कुछ मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए या जोड़े जा सकते हैं, जिसके चलते उन्होंने CEC को हटाने की माँग उठाई।
राष्ट्र प्रेस
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