विश्व तंबाकू निषेध दिवस 2026: भारत में हर साल 13 लाख मौतें, 26.7 करोड़ उपभोक्ता
सारांश
मुख्य बातें
विश्व तंबाकू निषेध दिवस हर वर्ष 31 मई को मनाया जाता है और इस बार इसकी पृष्ठभूमि में एक गंभीर वास्तविकता है — विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार, तंबाकू सेवन प्रतिवर्ष भारत में लगभग 13 लाख लोगों की जान ले लेता है और वैश्विक स्तर पर यह संख्या 70 लाख से अधिक है। नई दिल्ली से लेकर देश के हर कोने तक, यह संकट सार्वजनिक स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने को एक साथ प्रभावित कर रहा है।
भारत में तंबाकू की भयावह स्थिति
ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे इंडिया 2016-17 के अनुसार, देश में लगभग 26.7 करोड़ वयस्क किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं। भारत तंबाकू का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता और उत्पादक देश है। यहाँ तंबाकू उत्पाद अत्यंत कम कीमतों पर उपलब्ध हैं, जो इसकी पहुँच को और व्यापक बनाता है।
भारत में तंबाकू सेवन का सबसे प्रचलित रूप धुआं रहित तंबाकू है। आमतौर पर उपयोग किए जाने वाले उत्पादों में खैनी, गुटखा, तंबाकू युक्त पान और जर्दा शामिल हैं। धूम्रपान के रूपों में बीड़ी, सिगरेट और हुक्का प्रमुख हैं।
आर्थिक लागत: जीडीपी का 1.04%
तंबाकू का बोझ केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। एक अध्ययन के अनुसार, वर्ष 2017-18 में 35 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों में तंबाकू जनित बीमारियों की कुल आर्थिक लागत ₹1,77,341 करोड़ (27.5 अरब अमेरिकी डॉलर) थी। यह आँकड़ा भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 1.04% है।
गौरतलब है कि तंबाकू पर प्राप्त उत्पाद शुल्क राजस्व इस आर्थिक लागत का केवल 12.2% था, जबकि प्रत्यक्ष चिकित्सा लागत अकेले कुल स्वास्थ्य व्यय का 5.3% है। यह विरोधाभास स्पष्ट करता है कि तंबाकू से होने वाला राजस्व उसके कारण होने वाले नुकसान की भरपाई करने में सक्षम नहीं है।
युवाओं पर बढ़ता खतरा
WHO के अनुसार, विश्वभर में 13 से 15 वर्ष की आयु के कम से कम 4 करोड़ बच्चे तंबाकू उत्पादों का सेवन करते हैं। युवाओं में ई-सिगरेट और निकोटीन पाउच का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। 31 मई से पहले WHO ने दुनिया भर की सरकारों से आग्रह किया है कि वे नई पीढ़ी को तंबाकू और निकोटीन उत्पादों की लत से बचाने के लिए ठोस कदम उठाएँ।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत में किशोरों के बीच ई-सिगरेट की उपलब्धता पर नियंत्रण को लेकर नीतिगत बहस जारी है। आलोचकों का कहना है कि नए निकोटीन उत्पादों पर नियामक ढाँचा अभी पर्याप्त रूप से सख्त नहीं है।
स्वास्थ्य पर प्रभाव: एक से अधिक अंग प्रभावित
WHO के अनुसार, तंबाकू कैंसर, फेफड़ों की बीमारी, हृदय रोग और स्ट्रोक सहित कई दीर्घकालिक बीमारियों का प्रमुख जोखिम कारक है। तंबाकू में मौजूद निकोटीन व्यक्ति को लत में जकड़ता है, जबकि इसके धुएँ में उपस्थित हज़ारों हानिकारक रसायन फेफड़ों, हृदय, मस्तिष्क और अन्य अंगों को क्षति पहुँचाते हैं। वैश्विक स्तर पर तंबाकू 20 से अधिक विभिन्न प्रकार के कैंसर से जुड़ा हुआ है।
तंबाकू नियंत्रण की आवश्यकता
तंबाकू सेवन परिवारों को आर्थिक रूप से कमज़ोर बनाता है, सामाजिक असमानताओं को बढ़ाता है और सतत विकास लक्ष्यों (SDG) की प्राप्ति में बाधा डालता है। WHO 1 अरब से अधिक तंबाकू, ई-सिगरेट और निकोटीन पाउच उपयोगकर्ताओं को 31 मई को इस लत से मुक्ति की दिशा में पहला कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में तंबाकू नियंत्रण प्रयासों को बड़े पैमाने पर और तेज़ गति से बढ़ाना अब अनिवार्य हो चुका है।