वैश्विक तंबाकू सेवन में गिरावट, पर 1.5 करोड़ किशोर वेपिंग की चपेट में: WHO रिपोर्ट 2025
सारांश
मुख्य बातें
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में तंबाकू सेवन में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है — लेकिन इसी के साथ एक नई और गंभीर चुनौती सामने आई है: 13 से 15 वर्ष की आयु के लगभग 1.5 करोड़ किशोर ई-सिगरेट या वेपिंग का उपयोग कर रहे हैं। 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर जारी यह रिपोर्ट वर्ष 2000 से 2024 के बीच के रुझानों और 2025–2030 के अनुमानों पर आधारित है।
वैश्विक तंबाकू उपयोग में कमी के आंकड़े
WHO की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2000 में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लगभग 1.379 अरब लोग किसी न किसी तंबाकू उत्पाद का सेवन करते थे। 2024 तक यह संख्या घटकर 1.202 अरब रह गई है और अनुमान है कि 2025 तक यह आंकड़ा 1.196 अरब तक पहुँच जाएगा। सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रहे हैं।
लिंग के आधार पर देखें तो 2024 में कुल तंबाकू उपयोगकर्ताओं में 83 प्रतिशत पुरुष हैं — पुरुष उपयोगकर्ताओं की संख्या 99.7 करोड़ और महिला उपयोगकर्ताओं की संख्या 20.6 करोड़ दर्ज की गई। वर्ष 2000 में 34.2 करोड़ महिलाएं तंबाकू का उपयोग करती थीं, जो 2030 तक 18.2 करोड़ तक आने का अनुमान है।
किशोरों में वेपिंग की नई चुनौती
रिपोर्ट में सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि जिन देशों में आंकड़े उपलब्ध हैं, वहाँ किशोर वयस्कों की तुलना में औसतन नौ गुना अधिक वेपिंग करते पाए गए हैं। इसके अलावा, लगभग 4 करोड़ किशोर पारंपरिक तंबाकू उत्पादों का भी सेवन कर रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर तंबाकू नियंत्रण के प्रयास तेज़ हुए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, निकोटीन अत्यधिक नशे की लत पैदा करने वाला पदार्थ है और कम उम्र में इसके संपर्क में आने से मस्तिष्क के विकास पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ने का जोखिम रहता है — क्योंकि इस आयु वर्ग में मस्तिष्क का विकास अभी जारी होता है।
तंबाकू उद्योग की बदलती रणनीति
WHO के स्वास्थ्य निर्धारक, संवर्धन और रोकथाम विभाग के निदेशक डॉ. एटियेन क्रुग ने चेतावनी दी है: 'तंबाकू से हर साल लाखों लोगों की मौत होने के बावजूद बड़ी तंबाकू कंपनियाँ अपने व्यापार मॉडल को नया रूप दे रही हैं। वे एक ओर घातक सिगरेट से मुनाफा कमाना जारी रखे हुए हैं, वहीं दूसरी ओर फ्लेवरयुक्त ई-सिगरेट, निकोटीन पाउच और अन्य निकोटीन उत्पादों को आक्रामक रूप से बढ़ावा दे रही हैं, जिनका लक्ष्य अगली पीढ़ी को अपनी गिरफ्त में लेना है।'
गौरतलब है कि WHO के अनुसार, हर वर्ष 70 लाख से अधिक लोगों की मौत तंबाकू सेवन से होती है। यह हृदय रोग, श्वसन संबंधी बीमारियों और 20 से अधिक प्रकार के कैंसर से जुड़ा है।
क्षेत्रीय स्थिति और भारत का योगदान
क्षेत्रीय स्तर पर दक्षिण-पूर्व एशिया में सबसे अधिक सुधार देखा गया है — 2010 से 2025 के बीच इस क्षेत्र में लगभग 6.9 करोड़ तंबाकू उपयोगकर्ताओं की कमी आने का अनुमान है। इसके विपरीत, अफ्रीका और पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्रों में उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़ने की आशंका है।
19 मई को WHO ने उन नेताओं और संगठनों को सम्मानित किया जिन्होंने युवाओं को निशाना बनाने वाली तंबाकू उद्योग की रणनीतियों का मुकाबला करने के लिए साहसिक कदम उठाए। भारत से दो सम्मान प्राप्त हुए — जयपुर के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव और केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के ICMR को यह मान्यता मिली।
आगे की राह
रिपोर्ट यह भी रेखांकित करती है कि लगभग सभी देश प्रभावी तंबाकू नियंत्रण उपायों को अपनाने और लागू करने में आगे बढ़ रहे हैं। हालाँकि, ई-सिगरेट और वेपिंग के बढ़ते चलन को देखते हुए नीति-निर्माताओं के सामने नई पीढ़ी को निकोटीन उत्पादों से बचाने की कड़ी चुनौती बनी हुई है।