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वैश्विक तंबाकू सेवन में गिरावट, पर 1.5 करोड़ किशोर वेपिंग की चपेट में: WHO रिपोर्ट 2025

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वैश्विक तंबाकू सेवन में गिरावट, पर 1.5 करोड़ किशोर वेपिंग की चपेट में: WHO रिपोर्ट 2025

सारांश

दुनिया में तंबाकू सेवन घट रहा है — 2000 के 1.379 अरब से 2024 में 1.202 अरब तक। लेकिन WHO की नई रिपोर्ट एक खतरनाक पलटवार की चेतावनी देती है: 1.5 करोड़ किशोर वेपिंग कर रहे हैं, वयस्कों से 9 गुना अधिक दर पर। तंबाकू उद्योग की नई रणनीति अगली पीढ़ी को निशाना बना रही है।

मुख्य बातें

WHO रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक तंबाकू उपयोगकर्ताओं की संख्या 2000 के 1.379 अरब से घटकर 2024 में 1.202 अरब हो गई है।
1.5 करोड़ किशोर (आयु 13–15 वर्ष ) ई-सिगरेट या वेपिंग का उपयोग कर रहे हैं — वयस्कों से औसतन 9 गुना अधिक दर पर।
लगभग 4 करोड़ किशोर पारंपरिक तंबाकू उत्पादों का भी सेवन कर रहे हैं।
दक्षिण-पूर्व एशिया में 2010–2025 के बीच 6.9 करोड़ उपयोगकर्ताओं की कमी का अनुमान; अफ्रीका में संख्या बढ़ने की आशंका।
भारत से जयपुर स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव और ICMR को WHO ने तंबाकू नियंत्रण के लिए सम्मानित किया।
WHO के अनुसार, हर वर्ष 70 लाख से अधिक मौतें तंबाकू सेवन से होती हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में तंबाकू सेवन में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है — लेकिन इसी के साथ एक नई और गंभीर चुनौती सामने आई है: 13 से 15 वर्ष की आयु के लगभग 1.5 करोड़ किशोर ई-सिगरेट या वेपिंग का उपयोग कर रहे हैं। 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर जारी यह रिपोर्ट वर्ष 2000 से 2024 के बीच के रुझानों और 2025–2030 के अनुमानों पर आधारित है।

वैश्विक तंबाकू उपयोग में कमी के आंकड़े

WHO की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2000 में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लगभग 1.379 अरब लोग किसी न किसी तंबाकू उत्पाद का सेवन करते थे। 2024 तक यह संख्या घटकर 1.202 अरब रह गई है और अनुमान है कि 2025 तक यह आंकड़ा 1.196 अरब तक पहुँच जाएगा। सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रहे हैं।

लिंग के आधार पर देखें तो 2024 में कुल तंबाकू उपयोगकर्ताओं में 83 प्रतिशत पुरुष हैं — पुरुष उपयोगकर्ताओं की संख्या 99.7 करोड़ और महिला उपयोगकर्ताओं की संख्या 20.6 करोड़ दर्ज की गई। वर्ष 2000 में 34.2 करोड़ महिलाएं तंबाकू का उपयोग करती थीं, जो 2030 तक 18.2 करोड़ तक आने का अनुमान है।

किशोरों में वेपिंग की नई चुनौती

रिपोर्ट में सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि जिन देशों में आंकड़े उपलब्ध हैं, वहाँ किशोर वयस्कों की तुलना में औसतन नौ गुना अधिक वेपिंग करते पाए गए हैं। इसके अलावा, लगभग 4 करोड़ किशोर पारंपरिक तंबाकू उत्पादों का भी सेवन कर रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर तंबाकू नियंत्रण के प्रयास तेज़ हुए हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, निकोटीन अत्यधिक नशे की लत पैदा करने वाला पदार्थ है और कम उम्र में इसके संपर्क में आने से मस्तिष्क के विकास पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ने का जोखिम रहता है — क्योंकि इस आयु वर्ग में मस्तिष्क का विकास अभी जारी होता है।

तंबाकू उद्योग की बदलती रणनीति

WHO के स्वास्थ्य निर्धारक, संवर्धन और रोकथाम विभाग के निदेशक डॉ. एटियेन क्रुग ने चेतावनी दी है: 'तंबाकू से हर साल लाखों लोगों की मौत होने के बावजूद बड़ी तंबाकू कंपनियाँ अपने व्यापार मॉडल को नया रूप दे रही हैं। वे एक ओर घातक सिगरेट से मुनाफा कमाना जारी रखे हुए हैं, वहीं दूसरी ओर फ्लेवरयुक्त ई-सिगरेट, निकोटीन पाउच और अन्य निकोटीन उत्पादों को आक्रामक रूप से बढ़ावा दे रही हैं, जिनका लक्ष्य अगली पीढ़ी को अपनी गिरफ्त में लेना है।'

गौरतलब है कि WHO के अनुसार, हर वर्ष 70 लाख से अधिक लोगों की मौत तंबाकू सेवन से होती है। यह हृदय रोग, श्वसन संबंधी बीमारियों और 20 से अधिक प्रकार के कैंसर से जुड़ा है।

क्षेत्रीय स्थिति और भारत का योगदान

क्षेत्रीय स्तर पर दक्षिण-पूर्व एशिया में सबसे अधिक सुधार देखा गया है — 2010 से 2025 के बीच इस क्षेत्र में लगभग 6.9 करोड़ तंबाकू उपयोगकर्ताओं की कमी आने का अनुमान है। इसके विपरीत, अफ्रीका और पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्रों में उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़ने की आशंका है।

19 मई को WHO ने उन नेताओं और संगठनों को सम्मानित किया जिन्होंने युवाओं को निशाना बनाने वाली तंबाकू उद्योग की रणनीतियों का मुकाबला करने के लिए साहसिक कदम उठाए। भारत से दो सम्मान प्राप्त हुए — जयपुर के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव और केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के ICMR को यह मान्यता मिली।

आगे की राह

रिपोर्ट यह भी रेखांकित करती है कि लगभग सभी देश प्रभावी तंबाकू नियंत्रण उपायों को अपनाने और लागू करने में आगे बढ़ रहे हैं। हालाँकि, ई-सिगरेट और वेपिंग के बढ़ते चलन को देखते हुए नीति-निर्माताओं के सामने नई पीढ़ी को निकोटीन उत्पादों से बचाने की कड़ी चुनौती बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन WHO की रिपोर्ट एक असुविधाजनक सच्चाई उजागर करती है — तंबाकू उद्योग ने मैदान नहीं छोड़ा, बस अपना निशाना बदल लिया है। फ्लेवरयुक्त ई-सिगरेट और निकोटीन पाउच की मार्केटिंग स्पष्ट रूप से किशोरों को लक्षित करती है, और 'वयस्कों से 9 गुना अधिक' का आंकड़ा इसे साबित करता है। भारत के लिए यह विशेष चिंता का विषय है क्योंकि देश में ENDS पर प्रतिबंध के बावजूद इन उत्पादों की अवैध उपलब्धता बनी रहती है। ICMR और जयपुर स्वास्थ्य विभाग का WHO सम्मान प्रोत्साहक है, पर असली परीक्षा यह है कि क्या नीतिगत ढाँचा उद्योग की तेज़ी से बदलती रणनीतियों के साथ कदम मिला सकता है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

WHO की तंबाकू रिपोर्ट 2025 में क्या मुख्य निष्कर्ष हैं?
रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक तंबाकू उपयोगकर्ताओं की संख्या 2000 के 1.379 अरब से घटकर 2024 में 1.202 अरब हो गई है। साथ ही, 1.5 करोड़ किशोर वेपिंग कर रहे हैं — जो वयस्कों से 9 गुना अधिक दर है।
किशोरों में वेपिंग इतनी तेज़ी से क्यों बढ़ रही है?
WHO के अनुसार, तंबाकू कंपनियाँ फ्लेवरयुक्त ई-सिगरेट और निकोटीन पाउच को आक्रामक रूप से बढ़ावा दे रही हैं, जो विशेष रूप से युवाओं को आकर्षित करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। इन उत्पादों की आसान उपलब्धता और आकर्षक पैकेजिंग किशोरों को लक्षित करती है।
निकोटीन का किशोरों पर क्या स्वास्थ्य प्रभाव पड़ता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, कम उम्र में निकोटीन के संपर्क में आने से मस्तिष्क के विकास पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्योंकि इस आयु में मस्तिष्क का विकास जारी रहता है। इससे दीर्घकालिक लत और मानसिक तथा शारीरिक स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है।
तंबाकू नियंत्रण में भारत को WHO ने क्यों सम्मानित किया?
19 मई को WHO ने जयपुर के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव और केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के ICMR को युवाओं को लक्षित करने वाली तंबाकू उद्योग की रणनीतियों से मुकाबले के लिए साहसिक कदम उठाने पर सम्मानित किया।
2030 तक वैश्विक तंबाकू उपयोग का क्या अनुमान है?
WHO के अनुमानों के अनुसार, 2025 तक वैश्विक तंबाकू उपयोगकर्ताओं की संख्या 1.196 अरब तक आ जाएगी। महिला उपयोगकर्ताओं की संख्या 2030 तक 18.2 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है, जबकि अफ्रीका और पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्रों में संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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