ऑस्ट्रेलिया में मोटापे का संकट: 32.8% वयस्क प्रभावित, तंबाकू से भी बड़ा स्वास्थ्य खतरा
सारांश
मुख्य बातें
ऑस्ट्रेलियन इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड वेलफेयर (AIHW) की 24 जून 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार, 2022-24 के दौरान 18 वर्ष और उससे अधिक उम्र के 32.8 प्रतिशत ऑस्ट्रेलियाई वयस्क मोटापे से ग्रस्त पाए गए — यानी देश में लगभग हर तीसरा वयस्क इस समस्या से जूझ रहा है। यह आँकड़ा 2017-18 के 31.3 प्रतिशत और 2014-15 के 27.9 प्रतिशत से काफी अधिक है, जो एक दशक में मोटापे की दर में लगातार और चिंताजनक वृद्धि को दर्शाता है।
मुख्य आँकड़े और रुझान
रिपोर्ट के अनुसार, 2022-24 में 67.1 प्रतिशत वयस्क या तो मोटापे से ग्रस्त थे या उनका वजन सामान्य से अधिक था। गंभीर मोटापे की श्रेणी में भी वृद्धि दर्ज की गई — 2022-24 में 13 प्रतिशत वयस्क गंभीर मोटापे से पीड़ित पाए गए, जबकि 2017-18 में यह आँकड़ा 11.7 प्रतिशत था।
लिंग के आधार पर विश्लेषण करने पर सामने आया कि पुरुषों में अधिक वजन या मोटापे की संभावना महिलाओं की तुलना में अधिक है। हालाँकि, गंभीर मोटापे की समस्या महिलाओं में अपेक्षाकृत ज़्यादा देखी गई।
बच्चों में भी बढ़ती चिंता
5 से 17 वर्ष की उम्र के बच्चों में भी स्थिति चिंताजनक है। 2022-24 में 28.1 प्रतिशत बच्चे अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त पाए गए, जबकि 2017-18 में यह आँकड़ा 24.9 प्रतिशत था। यह वृद्धि संकेत देती है कि मोटापे की समस्या अब केवल वयस्कों तक सीमित नहीं रही।
मोटापा बना सबसे बड़ा स्वास्थ्य जोखिम
AIHW की प्रवक्ता एमी यंग ने कहा कि मोटापा और अधिक वजन ऑस्ट्रेलिया के सामने एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन चुके हैं और यह समस्या लगभग सभी आयु वर्गों को प्रभावित कर रही है। उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में मोटापा और अधिक वजन ऑस्ट्रेलिया में बीमारी और मृत्यु का सबसे बड़ा जोखिम कारक बन गया है — इसने तंबाकू सेवन को भी पीछे छोड़ दिया है।
आर्थिक बोझ
मोटापे का असर केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। 2023-24 में ऑस्ट्रेलिया में मोटापे के सीधे उपचार पर लगभग 80 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग 55.3 करोड़ अमेरिकी डॉलर) खर्च हुए। इसके अतिरिक्त, मोटापे और अधिक वजन से जुड़ी संबद्ध बीमारियों के उपचार पर 1,000 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग 690 करोड़ अमेरिकी डॉलर) का अतिरिक्त व्यय हुआ।
विशेषज्ञों का नज़रिया और आगे की राह
विशेषज्ञों के अनुसार, मोटापा एक जटिल और दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्या है, जिसमें शरीर में अत्यधिक वसा संचय हो जाती है और इससे हृदय रोग, मधुमेह तथा कई अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, यह मुख्यतः शरीर में ग्रहण की जाने वाली और व्यय होने वाली कैलोरी के असंतुलन के कारण होता है, हालाँकि आनुवंशिक, पर्यावरणीय और सामाजिक-आर्थिक कारक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब ऑस्ट्रेलियाई सरकार अपनी राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीतियों की समीक्षा कर रही है, और इसके निष्कर्ष नीति-निर्माताओं पर दीर्घकालिक रोकथाम कार्यक्रमों में निवेश बढ़ाने का दबाव और बढ़ाएँगे।