लंबी उम्र, बीमार जीवन: अमेरिकी नागरिक 14 साल बीमारी में गुजार रहे, लैंसेट रिपोर्ट में खुलासा
सारांश
मुख्य बातें
द लैंसेट पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (GBD) अध्ययन के अनुसार, दुनियाभर में लोगों की औसत आयु तो बढ़ रही है, लेकिन स्वस्थ जीवन के वर्ष उसी अनुपात में नहीं बढ़ रहे। 2023 में अमेरिका में यह 'मॉर्बिडिटी गैप' — यानी कुल आयु और स्वस्थ आयु के बीच का अंतर — 14 वर्ष तक पहुँच गया, जो विश्व में सर्वाधिक है। यह अध्ययन 1990 से 2023 के बीच लगभग सभी देशों के स्वास्थ्य आँकड़ों पर आधारित है।
मॉर्बिडिटी गैप: क्या कहते हैं आँकड़े
अध्ययन के अनुसार, 1990 में वैश्विक औसत मॉर्बिडिटी गैप 8.8 वर्ष था, जो 2023 में बढ़कर 10.7 वर्ष हो गया — यानी तीन दशकों में लगभग दो वर्षों की वृद्धि। इसी अवधि में वैश्विक औसत जीवन प्रत्याशा 64.6 वर्ष से बढ़कर 73.8 वर्ष हो गई, जबकि स्वस्थ जीवन प्रत्याशा केवल 55.9 वर्ष से 63.1 वर्ष तक पहुँची।
सरल शब्दों में, कुल आयु में 9 वर्ष की वृद्धि हुई, लेकिन स्वस्थ वर्षों में केवल 7 वर्ष जुड़े। यही असमानता बीमारी के साथ बिताए जाने वाले वर्षों को लगातार बढ़ा रही है।
सबसे अधिक प्रभावित देश
2023 के आँकड़ों के अनुसार, मॉर्बिडिटी गैप में अमेरिका सबसे ऊपर है, जहाँ यह अंतर 14 वर्ष है। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया में 13.9 वर्ष और कनाडा में 13.7 वर्ष दर्ज किया गया। यह विरोधाभासी तस्वीर दर्शाती है कि उच्च जीवन प्रत्याशा वाले विकसित देशों में ही बीमारी के साथ बिताए जाने वाले वर्ष सबसे अधिक हैं।
महिलाओं पर असमान बोझ
रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के हर क्षेत्र में महिलाएँ पुरुषों की तुलना में अधिक लंबी आयु जीती हैं, किंतु बीमारी के साथ बिताए जाने वाले वर्ष भी उनके लिए अधिक हैं। 2023 में महिलाओं का औसत मॉर्बिडिटी गैप 12.1 वर्ष रहा, जबकि पुरुषों में यह 9.3 वर्ष था।
अध्ययन की सह-लेखिका और यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन के इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मैट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन (IHME) की वरिष्ठ वैज्ञानिक कैथरीन बिसिग्नानो ने कहा कि महिलाओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए उन बीमारियों और जोखिम कारकों पर पहले से काम करना होगा, जो दीर्घकालिक तकलीफों की वजह बनते हैं।
खराब स्वास्थ्य के प्रमुख कारण
रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर खराब स्वास्थ्य के सबसे बड़े कारण मांसपेशियों और हड्डियों से जुड़ी बीमारियाँ हैं, जिनमें कमर दर्द सर्वोच्च स्थान पर है। इसके बाद अवसाद और चिंता जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ, उम्र के साथ श्रवण क्षमता में कमी, गिरने से होने वाली चोटें और अन्य गैर-संचारी बीमारियाँ प्रमुख हैं।
शोध में यह भी पाया गया कि हाई ब्लड शुगर, बढ़ता मोटापा, तंबाकू सेवन और बच्चों तथा माताओं में कुपोषण जैसे जोखिम कारकों को सही जीवनशैली अपनाकर काफी हद तक कम किया जा सकता है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
IHME के निदेशक और अध्ययन के वरिष्ठ लेखक डॉ. क्रिस्टोफर जे.एल. मरे के अनुसार, भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था का लक्ष्य केवल लंबी जिंदगी नहीं, बल्कि बेहतर और स्वस्थ जिंदगी होना चाहिए। उन्होंने बीमारियों की रोकथाम, दीर्घकालिक उपचार की बेहतर व्यवस्था और पुरानी बीमारियों के प्रभावी प्रबंधन पर जोर दिया। यह ऐसे समय में आया है जब दुनियाभर की सरकारें स्वास्थ्य बजट पर दबाव झेल रही हैं और बुजुर्ग आबादी का अनुपात तेजी से बढ़ रहा है।