दुर्गा पूजा पंडालों पर VHP की कोई गाइडलाइन नहीं: प्रवक्ता आलोक कुमार ने किया स्पष्ट
सारांश
मुख्य बातें
विश्व हिंदू परिषद (VHP) के प्रवक्ता आलोक कुमार ने 29 अगस्त 2026 को स्पष्ट किया कि संगठन ने पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा पंडालों में शाकाहारी या मांसाहारी भोजन को लेकर न कोई दिशा-निर्देश जारी किया है और न ही कोई आधिकारिक निर्णय लिया गया है। यह सफाई उस विवाद के बाद आई जिसमें VHP पर कथित तौर पर पंडाल आयोजकों के लिए नई गाइडलाइंस जारी करने का आरोप लगाया जा रहा था।
बैठक में क्या हुआ था
आलोक कुमार ने बताया कि बड़े त्योहारों से पहले VHP विभिन्न स्थानों पर आयोजकों के साथ बैठकें करता है। इसी क्रम में पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा पंडाल लगाने वाले कुछ आयोजकों की एक बैठक हुई थी, जिसमें पूजा की परंपरा, सांस्कृतिक पहलुओं और भक्ति के वातावरण पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि VHP का सुझाव है कि देवी की पूजा पारंपरिक और शास्त्रीय विधि से हो तथा पंडालों में स्वच्छता और शुचिता का ध्यान रखा जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक पत्रकार के सवाल पर एक स्वामी ने खाने के स्टॉलों में स्वच्छता बनाए रखने को एक अच्छा सुझाव बताया था। आलोक कुमार के अनुसार, इसे संगठन की आधिकारिक गाइडलाइन या आदेश के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है।
सुझाव और आयोजकों की स्वतंत्रता
VHP प्रवक्ता ने कहा कि संगठन की ओर से सुझाव दिए जाते हैं, जिन्हें आयोजक अपनी इच्छा के अनुसार अपनाते हैं। उन्होंने उदाहरण दिया कि करीब 8-10 साल पहले दिल्ली की रामलीला समितियों को भगवान राम के दरबार के साथ महर्षि वाल्मीकि की तस्वीर या झांकी रखने का सुझाव दिया गया था, और अब कई रामलीला आयोजनों में इसे अपनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि दुर्गा पूजा आयोजकों को किसी एक दिन 'वंदे मातरम' का पूरा गायन और भारत माता की पूजा करने का सुझाव दिया गया है।
मोहन भागवत के अमेरिका दौरे पर प्रतिक्रिया
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे और न्यूयॉर्क में प्रस्तावित ग्लोबल आउटरीच कार्यक्रम को लेकर उठे विवाद पर भी आलोक कुमार ने बात की। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में करीब 5,000 लोगों के शामिल होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम से पहले जिस तरह का विरोध और सोशल मीडिया विवाद सामने आया, वह चिंताजनक है।
आलोक कुमार ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण एकत्र होने और संगठन बनाने का अधिकार किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं हो सकता। उनका कहना था कि भागवत के कार्यक्रम को रोकने के प्रयास लोकतांत्रिक और मानवीय मूल्यों के विपरीत हैं, और इनके पीछे किसी 'वेस्टेड इंटरेस्ट ग्रुप' का प्रभाव हो सकता है।
समय रैना विवाद और अभिव्यक्ति की मर्यादा
स्टैंड-अप कॉमेडियन समय रैना से जुड़े सवाल पर आलोक कुमार ने कहा कि उन्हें उस बातचीत की पूरी जानकारी नहीं है। हालाँकि उन्होंने भारतीय संस्कृति में हास्य और अभिव्यक्ति की मर्यादा का उल्लेख करते हुए कहा कि हंसी और आनंद ज़रूरी हैं, लेकिन किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा से बचना चाहिए। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब धार्मिक भावनाओं और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच की रेखा को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस जारी है।